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ईरान को जेडी वेंस पसंद, ट्रंप के दामाद नहीं... US से बातचीत शुरू होने से पहले इसकी वजह सामने आई

Iran America Talks: JD Vance जंग शुरू होने के बाद से ज्यादातर मौकों पर गायब रहे हैं. लेकिन जब से चर्चा चली कि अमेरिका और ईरान बातचीत के लिए Pakistan में बैठेंगे, जेडी वेंस की अचानक पिक्चर में एंट्री हो गई है.

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ईरान के साथ युद्ध पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (बीच में) ने ज्यादातर चुप्पी ही साध रखी है. (ITG/X/Reuters)

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी को जंग भड़की तो, तीनों देशों के नेताओं ने खुलकर बयान दिए. एक-दूसरे को धमकियां और चेतावनियां दीं. माहौल गर्माता गया. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अलग ही रुख अपनाते दिखे. उन्होंने चुप्पी साधे रखी और सीधे तौर पर कोई आक्रामक प्रतिक्रिया नहीं दी. अब खबर है कि उनकी यही खामोशी ईरान को रास आ गई है, और इसलिए तेहरान चाहता है कि बातचीत की मेज पर जेडी वेंस ही सामने हों.

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युद्ध से पहले अमेरिका के मिडिल ईस्ट के लिए दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ईरान के साथ डील पर बात कर रहे थे. लेकिन बातचीत के बीच ही अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बमबारी कर दी, जिसमें सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई.

ईरान स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की बातचीत को धोखा मानता है. ब्रिटिश अखबार द गॉर्डियन को एक ईरानी डिप्लोमैटिक सूत्र ने बताया कि ईरानी पक्ष जेडी वेंस को एक ज्यादा स्वीकार्य मध्यस्थ के तौर पर देखता है. माना जाता है कि वेंस नहीं चाहते थे कि अमेरिका को मिडिल ईस्ट के किसी युद्ध में उलझाया जाए. वेंस ने ईरान पर ट्रंप के हमले का समर्थन तो किया, लेकिन इस मामले पर वे ज्यादातर चुप ही रहे हैं.

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ईरानी सूत्र ने कहा कि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ बातचीत का कोई फायदा नहीं है. ईरान स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की अगुवाई में हुई पहले की बातचीत को ट्रंप प्रशासन की एक चाल के तौर पर देखता है, जिसका मकसद ईरान को धोखे में रखना था.

ट्रंप के दामाद पर भरोसा क्यों नहीं?

क्योंकि ईरान की विटकॉफ और कुशनर के जरिए अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील पर बातचीत चल रही थी. तभी अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया. सूत्र का कहना है कि इसलिए ईरान को स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पर भरोसा नहीं है. वहीं, जेडी वेंस जंग के समय से ज्यादातर गायब रहे हैं. लेकिन जब से चर्चा चली कि अमेरिका और ईरान बातचीत के लिए पाकिस्तान में बैठेंगे, जेडी वेंस की अचानक पिक्चर में एंट्री हो गई.

मीडिया में दावा किया जाने लगा कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में संभावित मीटिंग में अमेरिका की तरफ से जेडी वेंस होंगे. हालांकि, अमेरिका या ईरान ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. अमेरिका-ईरान के बीच चल रही बातचीत से जुड़े सूत्रों ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि ईरान से बात करने के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का नाम तेजी से उभरा है. रिपोर्ट में सूत्रों ने दावा किया तेहरान सीधे जेडी वेंस से ही बात करना चाहता है.

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जेडी वेंस पर इतना भरोसा क्यों?

जेडी वेंस को लंबे समय से विदेशी सैन्य मामलों में दखल देने का विरोधी माना जाता रहा है. पर्दे के पीछे की यह जानकारी वेंस को एक संभावित मुख्य वार्ताकार के तौर पर पेश करती है. यह ना केवल प्रशासन के अंदर उनके बढ़ते प्रभाव को दिखाता है, बल्कि ईरानी अधिकारियों के बीच इस सोच को भी मजबूत करता है कि जेडी वेंस एक अलग तरह के अमेरिकी वार्ताकार की नुमाइंदगी करते हैं.

यह भी पढ़ें: US-ईरान दोनों कह रहे हमने बातचीत की पहल नहीं की, तो पाकिस्तान में मीटिंग करवा कौन रहा?

खबरें हैं कि ईरान जेडी वेंस को ही अपने पसंदीदा वार्ताकार के तौर पर चुनना चाहेगा, लेकिन वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने द पोस्ट को बताया कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ही तय करेंगे कि ईरान के साथ कौन बात करेगा.

24 मार्च को मीडिया से बात करते हुए डॉनल्ड ट्रंप ने भी कहा,

"हम (ईरान के साथ) अभी बातचीत कर रहे हैं, और अब आपने देख लिया है कि कल मैंने जो कहा था, वह बिल्कुल सही था. हम इस समय बातचीत के दौर में हैं. वे (स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर) मार्को रूबियो और जेडी वेंस के साथ मिलकर यह काम कर रहे हैं. हमारे साथ कई लोग इस काम में लगे हुए हैं."

अगर डॉनल्ड ट्रंप ईरान के साथ डील करने के लिए जेडी वेंस को कमान सौंपने का फैसला करते हैं, तो यह उन्हें खुद को एक 'डीलमेकर' (समझौता कराने वाले) के तौर पर साबित करने का एक बड़ा मौका दे सकता है.

वीडियो: ईरान जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से फर्जी नामों से निकल रहे जहाज?

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