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सिर्फ एक पैसेंजर के लिए चलती है जापान में ये ट्रेन

रोज एक ही समय आ कर प्लैटफॉर्म पर खड़ी हो जाती है. ट्रेन उसे ले जाती है. फिर छोड़ जाती है.

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सोर्स: सिटी लैब
उत्तरी जापान में एक होकैदो नाम का एक आइलैंड है. वहां पर है कमी-शिराताकी नाम का एक ट्रेन स्टेशन. अकेला, सुनसान. सालों बीत गए, इस स्टेशन पर कोई पैसेंजर नहीं चढ़ता. सिवा एक लड़की के. रोज एक ही समय आ कर प्लैटफॉर्म पर खड़ी हो जाती है. ट्रेन उसे ले जाती है. फिर छोड़ जाती है. दिन भर में सिर्फ दो ही बार ट्रेन रूकती है. सालों से एक ही पैसेंजर के लिए.
कमी-शिराताकी स्टेशन
कमी-शिराताकी स्टेशन

जी नहीं, किसी फिल्म का सीन नहीं है ये. न ही कहानी है. बल्कि जापान रेलवे का लिया हुआ फैसला है. स्टेशन की लोकेशन ऐसी जगह है जहां बहुत कम पॉपुलेशन रहती है. स्टेशन से बिलकुल भी रेवेन्यू नहीं आता था. तो सरकार ने फैसला लिया कि स्टेशन को बंद कर दिया जाएगा. फिर पता पड़ा कि एक बच्ची है जो रोज उस स्टेशन से स्कूल जाया करती है. बस रेलवे ने ये फैसला लिया कि जबतक बच्ची का स्कूल खत्म नहीं हो जाता, स्टेशन बंद नहीं किया जाएगा. ट्रेन का टाइम टेबल भी बच्ची के स्कूल के टाइम के हिसाब से बना दिया गया है.
Kamishirataki timetable JAPAN
स्टेशन के टाइम टेबल. दिन भर में बस दो ही बार यहां ट्रेन रूकती है. सोर्स: विकिपीडिया

जापान में जबसे नई तकनीक वाली ट्रेनें आयी हैं, पुरानी ट्रेनों से घाटे के अलावा कुछ नहीं मिलता. फिर भी सिर्फ एक बच्ची की पढ़ाई के लिए ट्रेन चलाकर जापान रेलवे ने 'पब्लिक सर्विस' की एक मिसाल कायम की है.

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