चुनाव आयोग (ECI) ने 16 अगस्त, 2024 को जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों के तहत विधानसभा चुनाव कराने का एलान कर दिया है. इसके बाद से यहां के दिग्गज नेताओं की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वो चुनाव आयोग को पिछले 24 घंटों में हुए तबादलों की जांच करने के लिए लिख रहे हैं. उन्होंने कहा,
एक दशक बाद जम्मू-कश्मीर में होने जा रहे चुनाव, क्या बोले फारूक, उमर, महबूबा जैसे दिग्गज नेता?
जून, 2018 में BJP ने गठबंधन से हाथ खींच लिए और महबूबा मुफ्ती की सरकार गिर गई. इसके बाद से अब तक जम्मू-कश्मीर में बहुत कुछ बदल गया. इस बीच बार-बार यहां विधानसभा चुनाव कराने के वादे किए जाते रहे. लेकिन इसकी घोषणा अब जाकर हुई है.


“हम भारत के चुनाव आयोग को लिख रहे हैं कि उन्हें पिछले 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर में हुए तबादलों की जांच करनी चाहिए. कई अधिकारियों का अचानक तबादला कर दिया गया है. हमें संदेह है कि ये तबादले एलजी द्वारा भाजपा की बी और सी टीमों को लाभ पहुंचाने के लिए किए गए हैं, जिन्हें भाजपा ने यहां रखा है. पिछले 1-2 वर्षों में कुछ नेताओं की सुरक्षा कम की गई और वापस ली गई. हम आयोग से अनुरोध करते हैं कि वो आदेश दें और सुनिश्चित करें कि उनकी सुरक्षा बहाल की जाए.”
अब्दुल्ला ने आगे कहा,
“देर आए दुरुस्त आए. चुनाव आयोग ने तीन चरणों में चुनाव की तारीखों की घोषणा की है. 1987-88 के बाद ये पहली बार है जब जम्मू-कश्मीर में इतने कम चरणों में चुनाव कराए जा रहे हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस इस दिन के लिए तैयार थी. हम जल्द ही अपना चुनाव अभियान शुरू करेंगे.”
पूर्व सीएम ने आगे कहा,
“उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव जम्मू-कश्मीर को केंद्र के शासन से मुक्त कर देंगे. मुझे हमेशा से उम्मीद थी कि चुनाव होंगे. राज्य में सरकार बने सालों हो गए हैं, लोगों के प्रतिनिधि होने चाहिए जो लोगों की समस्याओं का समाधान करें. नेशनल कॉन्फ्रेंस अकेले ही चुनाव लड़ेगी.”
वहीं कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर ने जम्मू-कश्मीर में चुनाव की तारीख के एलान पर कहा,
"मैं इसका स्वागत करता हूं. भले ही देर हो गई हो, लेकिन कम से कम एक कदम तो उठाया गया है. आज जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए खुशी का दिन है. सदन के गठन के बाद हम राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. लोगों को सावधानी से वोट देना होगा और उन लोगों को वोट देना होगा जो राज्य के दर्जे के लिए लड़ेंगे."
जम्मू-कश्मीर में पिछली बार नवंबर-दिसंबर 2014 में पांच चरणों के तहत चुनाव हुआ था. तब जम्मू-कश्मीर राज्य था. दिवंगत मुफ्ती मुहम्मद सईद के नेतृत्व में PDP-BJP ने गठबंधन सरकार बनाई थी. जनवरी, 2016 में उनका निधन हो गया. इसके बाद उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती ने सत्ता संभाली. लेकिन जून, 2018 में BJP ने हाथ खींच लिए और गठबंधन टूट गया. सरकार गिर गई. इसके बाद से अब तक जम्मू-कश्मीर में बहुत कुछ बदल गया. अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया गया. जम्मू-कश्मीर का बंटवारा हो गया. लद्दाख अलग कर दिया गया. J&K को केंद्रशासित प्रदेश घोषित कर दिया गया. इस बीच बार-बार यहां विधानसभा चुनाव कराने के वादे किए जाते रहे. लेकिन इसकी घोषणा अब जाकर हुई है.
जम्मू-कश्मीर के साथ हरियाणा विधानसभा चुनाव की भी घोषणा की गई है. यहां 90 सीटों पर मतदान होगा. इनमें से 73 सीटें जनरल हैं और 17 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. वहीं जम्मू-कश्मीर में भी 90 सीटों के लिए चुनाव होगा. इनमें से 74 सीटें जनरल हैं. 16 सीटों को रिजर्व्ड रखा गया है. वहीं 8 सीटें अनुसूचित जनजाति और 7 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. दोनों चुनावों के वोटिंग की गिनती 4 अक्टूबर को होगी.
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