कश्मीर. एक सुलगता सवाल. पूरे देश का. भारत-पाक के राजनयिक संबंधों में ये विषय नंबर वन है. अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत की बांह मरोड़नी हो तो यही मुद्दा काम लिया जाता है. देश में आएं तो जम्मू एवं कश्मीर से जुड़े दो मोटे मुद्दे हैं - आंतकवाद और कश्मीरी पंडितों का पलायन. बहुत बरसों बाद इनमें से दूसरे मुद्दे पर कुछ नया सुनने को मिला है. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के गठबंधन वाली जेएंडके सरकार की सीएम महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को कहा कि वे कश्मीरी विस्थापितों की गरिमामय वापसी को प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने कहा कि इनकी वापसी के लिए संयुक्त कॉलोनियां बनाई जाएंगी. उन्होंने आंतकियों और कश्मीरी विस्थापितों के लिए दिलचस्प शब्द इस्तेमाल किया. उन्होंने इस विचार को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया कि पंडितों को उन्हीं घरों में लौटना चाहिए जो उन्होंने 1990 के बाद छोड़े थे.
महबूबा ने कहा, 'मैं बिल्लियों (आंतकियों) के आगे कबूतरों (विस्थापितों) को कैसे छोड़ सकती हूं?'
विधानसभा में शनिवार को अपना पहला भाषण देते हुए महबूबा ने बोला, 'कश्मीरी पंडितों के लिए ट्रांजिट आवास बनाने के प्रस्ताव को वर्किंग ग्रुप्स ने मंजूर कर दिया है. हमारे यहां जम्मू में मुस्लिम और सिख समेत अन्य धर्मों के प्रवासी भी रहते हैं और इन ट्रांजिट रिहाइशों में 50 फीसदी अन्य धर्मों के लोगों के लिए आरक्षित रखे जाएंगे.'
कश्मीरी पंडितों को वापस लाने पर अपना समर्पण दिखाते हुए कहा, 'मैं आप लोगों की मदद से उन्हें वापस लेकर आऊंगी.'
राज्यपाल के भाषण पर हो रही चर्चा के जवाब में महबूबा मुफ्ती ने एक और चर्चित मुद्दे पर टिप्पणी की. साल 2011 में राज्य में ये प्रस्ताव उठाया गया था कि यहां एक सैनिक कॉलोनी बनाई जाएगी. महबूबा ने कहा कि उनकी सरकार के पास इस कॉलोनी के लिए कोई जमीन नहीं है. वे बोलीं कि ये कॉलोनी सिर्फ राज्य के पूर्व-सैनिकों के लिए स्थापित होनी थी लेकिन जमीन की अनुपलब्धता के कारण इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है.
