हुआ क्या था?

डिप्टी एसपी संदीप वर्मा ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी थी.
दरअसल करीब एक हफ्ते पहले कौंच के डिप्टी एसपी संदीप वर्मा ने फेसबुक पर एक टिप्पणी की. संदीप वर्मा ने फेसबुक पर लिखा था-
'रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे. ये नारा तो ठीक है, लेकिन अगर कैरियर पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मंदिर बनने के बाद मंदिर के सामने बैठकर भीख मांगनी पड़ेगी.'अब संदीप वर्मा ने फेसबुक पर ये टिप्पणी लिख तो दी. लेकिन इससे हिंदुवादी संगठन नाराज हो गए. उन्होंने संदीप वर्मा को हटाने को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. विश्व हिंदु परिषद के जिलाध्यक्ष इंद्रपाल सिंह चौहान और जिला मंत्री बलबीर सिंह जादौन समेत कई लोग कोंच में गांधी चबूतरे पर धरने पर बैठ गए और अनशन शुरू कर दिया. नतीजा ये हुआ कि आनन-फानन में संदीप वर्मा को फेसबुक पोस्ट हटानी पड़ी और उन्हें माफी मांगनी पड़ी. फेसबुक पोस्ट हटाने और माफी मांगने के बाद बीजेपी के जिलाध्यक्ष नागेंद्र गुप्ता ने अनशन पर बैठे हिंदुवादी संगठन के लोगों को जूस पिलाकर अनशन खत्म करवाया.

25 दिसंबर को संदीप वर्मा का ट्रांसफर कर दिया गया.
वहीं 25 दिसंबर को शासन से संदीप वर्मा के ट्रांसफर का आदेश आ गया. बिना किसी को कार्यभार ग्रहण करवाए, संदीप वर्मा को वहां से हटाकर भ्रष्टाचार निवारण संगठन में भेज दिया गया. इस मामले में एसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने सिर्फ इतना कहा कि ये शासन से आया हुआ आदेश था जिसका पालन किया गया. इसके अलावा उन्होंने कुछ भी नहीं कहा. इतना ही नहीं, संदीप वर्मा ने भी बात करने से इन्कार कर दिया.
लोगों के चहेते थे संदीप वर्मा

संदीप वर्मा ने झांसी मेडिकल कॉलेज को अपना शरीर दान कर दिया है.
कोंच के डिप्टी एसपी रहे संदीप वर्मा लोगों के चहेते थे. पिछले दिनों उन्होंने झांसी मेडिकल कॉलेज को अपना शरीर दान में दे दिया था. इसकी खूब तारीफ हुई थी. उनके इस फैसले को देखते हुए और भी कई लोगों ने देह दान की थी. जब उनका ट्रांसफर हुआ, तो लोगों ने मालाएं पहनाकर उन्हें विदा किया और सोशल मीडिया पर लिखा कि आप बहुत याद आएंगे.
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