जयराम रमेश ने तरुण विजय को राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण का प्रमुख बनाए जाने पर सवाल क्यों उठाए?
कांग्रेस नेता ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को लेटर भी लिखा.
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तरुण विजय (बाएं)की राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण के चेयरमैन के रूप में नियुक्ति को जयराम रमेश (दाएं)ने गलत बताया है.
जयराम रमेश. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री. उन्होंने राज्यसभा के पूर्व सांसद और पत्रकार तरुण विजय की राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण (National Monuments Authority या NMA) के चेयरमैन के रूप में नियुक्ति को गलत बताया है. साथ ही इस संबंध में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को लेटर लिखा है.
क्या है लेटर में?
जयराम रमेश ने लेटर में लिखा है कि मार्च 2010 में संसद ने Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains (Amendment and Validation) Act, 2010 पास किया था. इसका सेक्शन 20 F कहता है कि भारत सरकार ऑफिशल गैजेट के जरिए एक अथॉरिटी बनाएगी जिसे National Monuments Authority कहा जाएगा. राष्ट्रपति इसके लिए ऐसे चेयरमैन की नियुक्ति करेंगे जो कि आर्कोलोजी, कंट्री और टाउन प्लानिंग, आर्किटेक्ट और हेरिटेज का एक्सपर्ट और अनुभवी होगा. जयराम रमेश ने आगे लिखा है कि यह पहली बार है जब भारत सरकार ने National Monuments Authority के चेयरमैन के रूप में एक ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति की है जिसका एजुकेशनल और प्रोफेशनल बैकग्राउंड इस पद के लिए सेट की गई क्वालिफिकेशन से मैच नहीं करता. उन्होंने ये भी लिखा है कि यह नियुक्ति संसद द्वारा पारित कानून के मुताबिक भी नहीं है. इस पद पर पूर्व राज्यसभा मेंबर की नियुक्ति असंगत है. जयराम रमेश ने लिखा है कि वह कल्चर मिनिस्टर के खिलाफ प्रिविलेज मोशन लाएंगे. क्योंकि मंत्री ने संसद की ओर से पास कानून के प्रावधान की जानबूझकर अवहेलना की है. इतना ही नहीं उन्होंने वास्तव में इस कानून का मजाक उड़ाया है.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, भाजपा नेता और पूर्व सांसद तरुण विजय, जो कई वर्षों तक आरएसएस के मुखपत्र पांचजन्य के संपादक भी रहे, को 2019 में अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. विजय के पदभार संभालने से पहले हिमांशु प्रभा रे और सुष्मिता पांडे अध्यक्ष रह चुके हैं. जयराम रमेश का कहना है कि ये दोनों साख वाले प्रसिद्ध शिक्षाविद थे. दी लल्लनटॉप ने इस मामले में जयराम रमेश को कई बार फोन लगाया लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई. अगर उनका कोई जवाब आता है तो जरूर बताएंगे. वहीं तरुण विजय को दो बार फोन किया गया. लेकिन किसी मीटिंग में होने की वजह से उनसे भी बात नहीं हो पाई. जैसे ही उनका जवाब आता है हम आपको जरूर बताएंगे.
National Monuments Authority क्या है?
राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण संस्कृति मंत्रालय के तहत आता है. इसकी स्थापना प्राचीन संस्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष (संशोधन और विधिमान्यकरण) अधिनियम, 2010 के प्रावधानों के अनुसार की गई है. यह मार्च, 2010 में अधिनियमित किया गया था. अधिनियम में NMA के गठन का प्रावधान है. इसमें एक पूर्णकालिक अध्यक्ष और अधिकतम 5 पूर्णकालिक और 5 अंशकालिक सदस्य और एक सदस्य सचिव की व्यवस्था है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक इसके पदेन सदस्य हैं. NMA को केंद्रीय संरक्षित स्मारकों के पास स्मारकों और स्थलों के संरक्षण से संबंधित कई कार्य सौंपे गए हैं. ये इस क्षेत्र में निर्माण संबंधी गतिविधियों के लिए परमिशन देने का भी काम करता है. बढ़ते शहरीकरण, विकास और बढ़ती जनसंख्या से भूमि पर दबाव बढ़ रहा है. इसमें केंद्रीय संरक्षित स्मारकों के पास की जमीन भी शामिल है. प्राधिकरण ये देखता है कि विकास और स्मारकों के संरक्षण की जरूरतों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए केंद्रीय संरक्षित स्मारकों के पास विकास कराया जाए. प्राचीन संस्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम में संशोधन के बाद इन प्रावधानों में 2010 में बदलाव किया गया. NMA और सक्षम प्राधिकारियों (सीए) की स्थापना की गई. अब इस क्षेत्र में निर्माण संबंधी कार्य के लिए जितने आवेदन आते हैं उस पर प्राधिकरण विचार करता है और निर्माण की मंजूरी और नामंजूरी देता है.
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