हुआ ये है कि नोटबंदी से पहले मंदिरों को थोक के भाव से चंदा मिला था. जिसे अब खपाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है. तो वो भक्तों से उन्हें चलाने के लिए मदद मांग रहे हैं. मंदिर आपसे इन पैसों के ब्याज नहीं लेगा. जितना आप लेंगे उतना अगले साल अप्रैल तक आपको वापस करना होगा. वो भी नए नोटों में. लालबाग के मंदिर के ट्रस्टी कहते हैं, 'मंदिर पैसों का ब्याज भक्तों से नहीं लेगा. लोग अपनी जरूरत के अनुसार उसे खर्च कर सकते हैं.' लोगों को जब इसके बारे में पता चला तो कईयों का कहना है कि ये भगवान का आशीर्वाद हो सकता है. अगर आपको भी पैसों की जरूरत है. और आप मुंबई में रहते हैं तो कट लीजिए पास के जैन मंदिर में. पैसे लीजिए. ब्याज की चिंता से मुक्त होकर पैसों का इस्तेमाल करिए और फिर उन्हें लंबी लाइन में लगकर बदलिए. और अप्रैल तक उन्हें मंदिर को पकड़ा आइए.मंदिरों ने पैसे देने के साथ एक शर्त रखी है. मंदिरों को वो पैसे अप्रैल तक वापस चाहिए. वो भी नए नोटों में.लगा न जोर का झटका धीरे से.
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