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इजरायली नागरिक वोट डालने अपने देश लौट रहे, इनकी संख्या देख नेतन्याहू घबराए!

Israel Election: इजरायल में 73 लाख से अधिक मतदाता हैं और ओपिनियन पोल के अनुसार दोनों पक्षों के बीच कांटे की टक्कर है. विदेशों में रह रहे इजरायली नागरिकों की वापसी इस चुनाव में काफी अहम साबित हो सकती है. लेकिन नेतन्याहू की पार्टी इनसे घबराई हुई क्यों है?

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विदेशों में रहने वाले हज़ारों इजरायली 27 अक्टूबर के चुनाव के लिए अपने देश लौट रहे हैं. (courtesy: ITG)

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  • इजरायल में 27 अक्टूबर 2023 को आम चुनाव होंगे, जो हमास के अक्टूबर हमले और युद्ध की पृष्ठभूमि में पहली बार आयोजित होंगे और इसमें विदेशों में रहने वाले नागरिक भी वोट डालने के लिए लौट रहे हैं।
  • हमास के 7 अक्टूबर के हमले और गाजा तथा ईरान के साथ जारी युद्ध के कारण इजरायल में चुनाव के दौरान सुरक्षा मुद्दे तथा विदेश में रहने वाले नागरिकों के वोट देने के अधिकार का विवाद उत्पन्न हुआ है।
  • विदेशों से लगभग 67,000 इजरायली मतदाता अपनी वापसी कर रहे हैं, जो चुनाव के परिणाम पर प्रभाव डाल सकते हैं, जिससे नेतन्याहू की लिकुड पार्टी समेत राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

इजरायल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव है. हमास के 7 अक्टूबर, 2023 वाले हमले के बाद इजरायल में ये पहला आम चुनाव होगा. इस हमले के बाद इजरायल की गाजा के साथ जंग छिड़ गई. और इस साल ईरान के खिलाफ भी युद्ध छिड़ गया. अब 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले कई इजरायली अपने देश अपना वोट डालने के लिए वापस लौट रहे हैं. इस बात से बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी लिकुड पार्टी की चिंता बढ़ गई है. 

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इजरायली कानून के तहत, विदेश में रहने वाले ज़्यादातर नागरिकों को डाक या ऑनलाइन वोट डालने की अनुमति नहीं है. केवल राजनयिकों और कुछ आधिकारिक प्रतिनिधियों को ही इसमें छूट दी गई है. नतीजतन जो लोग वोट डालना चाहते हैं, उन्हें इजरायल आना होगा.

2026 के चुनाव को, बेंजामिन नेतन्याहू के युद्धों को संभालने के तरीके और इजरायल के अति-दक्षिणपंथी (एक्सट्रीम राइट-विंग) रुख की ओर बढ़ने पर, एक तरह के जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के रूप में देखा जा रहा है. 

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कितने नागरिक वापस लौट रहे?

तेलअवीव के बेन गुरियन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बहुत से नागरिक लैंड करेंगे. इस बार संख्या काफी बड़ी होने की उम्मीद है. अमेरिका स्थित एक समूह के अनुमान के अनुसार, लगभग 67,000 इजरायली अपने देश में वोट डालने आ रहे हैं. इनमें से लगभग आधे लोग अमेरिका से आ रहे हैं, जबकि बाकी लोग यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और दुनिया के अन्य हिस्सों से यात्रा कर रहे हैं. इनमें से ज्यादातर लोग अपनी यात्रा का खर्च खुद उठा रहे हैं.

इंडिया टुडे के रिपोर्टर प्रणय उपाध्याय ने कुछ यात्रियों से बात भी की. उनमें कुछ अपना वोट डालने के लिए काफी उत्साहित दिखे. उन्होंने अज़रबैजान और एशिया के अन्य हिस्सों से यात्रा करके आए इजरायलियों से बात की, जो वोट डालने के लिए काफी उत्सुक थे.

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क्यों ज़रूरी हैं ये वोटर्स? 

विदेशों में रह रहे इजरायली नागरिकों की वापसी चुनाव में काफी अहम साबित हो सकती है. इजरायल में 73 लाख से अधिक मतदाता हैं, और ओपिनियन पोल के अनुसार दोनों पक्षों के बीच कांटे की टक्कर है. जानकारों का मानना ​​है कि विदेशों में रहने वाले इजरायली राजनीतिक बदलाव के पक्ष में हैं. इसलिए उनका वोट अहम है. अनुमानों के अनुसार, वे लगभग दो सीटों के बराबर नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं. 

इसी से जुड़ा नेतन्याहू की लिकुड पार्टी पर एक आरोप है. दावा किया गया कि लिकुड पार्टी ने एक अभियान को ब्लॉक करने की कोशिश की है. ये अभियान विदेशों में रह रहे इजरायली नागरिकों के वोट से जुड़ा था. 27 अक्टूबर को नेसेट (Knesset) की सभी 120 सीटों के लिए मतदान होगा. ओपिनियन पोल के मुताबिक, विपक्षी गुट को 52 सीटें और नेतन्याहू के धार्मिक-राष्ट्रवादी गठबंधन को 50 सीटें मिलने का अनुमान है.   

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