अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद अब उनके ‘दोस्त’ बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी जाने वाली है. इजरायल में अरब पार्टियों के गठबंधन वाले ‘जॉइंट लिस्ट’ ने नेतन्याहू के खिलाफ याशर पार्टी के गादी आइजेनकोट को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. इससे आइजेनकोट के इजरायल के नए प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है. जॉइंट लिस्ट के एक डेलीगेशन ने देश के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात की और आइजेनकोट को सरकार बनाने के लिए सपोर्ट करने की सिफारिश की.
'सबसे बुरे' नेतन्याहू का गेम ओवर? जॉइंट लिस्ट ने 'कम बुरे' आइजेनकोट को समर्थन दिया
इजरायल में अरब पार्टियों के गठबंधन जॉइंट लिस्ट ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ गादी आइजेनकोट को समर्थन देने का ऐलान किया है.

गठबंधन ने ये भी साफ किया कि वह सरकार में शामिल नहीं होगी बल्कि बाहर रहते हुए ही याशर पार्टी को सपोर्ट करेगी. जॉइंट लिस्ट के मुताबिक, उसका मकसद सिर्फ प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को हटाना है. जाहिर है कि आइजेनकोट के साथ भी कई बड़े मुद्दों पर पार्टी के मतभेद हैं. लेकिन नेतन्याहू की सरकार को हटाने के सवाल पर पार्टी ने आइजेनकोट का जवाब चुन लिया है.
क्या है जॉइंट लिस्ट?जॉइंट लिस्ट इजरायल के अरबी नागरिकों की आवाज के तौर पर उभरा था. यह तीन अरब नेतृत्व वाले गुटों के बीच एक गठबंधन है, जिसमें तीन पार्टियां कम्युनिस्ट हदाश, सेक्युलरिस्ट ता'ल और नेशनलिस्ट बलाद शामिल हैं. ये पार्टियां कई मुद्दों पर बहुत अलग राय रखती हैं, लेकिन हरेक की अपने दम पर नेसेट में एंट्री नहीं हो सकती. लिहाजा ये साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं. इस गठबंधन का मकसद ही अरब पार्टियों को एक साथ लाना और इजरायली संसद (नेसेट) में उन्हें ज्यादा से ज्यादा सीटें दिलाना है.
टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉइंट लिस्ट के अध्यक्ष यूसुफ जबरीन ने कहा कि अरब वोटर्स बदलाव की मांग कर रहे हैं. आइजेनकोट को समर्थन देना इसी बदलाव की मांग को आवाज देना है. जबरीन ने कहा कि मौजूदा नेतन्याहू सरकार के शासन में अरब नागरिकों को नस्लभेद, भेदभाव, अपराध और अलग-थलग किए जाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है.
जबरीन ने ये भी बताया कि आइजेनकोट के साथ उनकी पार्टी के कई मुद्दों पर मतभेद हैं. जैसे उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान अरब नागरिकों के खिलाफ भड़काऊ बयानों का मजबूती से विरोध नहीं किया. उन्होंने कहा,
हम अच्छे और बेहतर के बीच चुनाव नहीं कर रहे हैं. बल्कि जिसे हम बुरा और उससे भी बुरा मानते हैं, उनके बीच चुनाव कर रहे हैं.
बता दें कि 27 अक्टूबर को इजरायल की 120 सदस्यों वाली नेसेट के लिए चुनाव हुए थे. इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग ने चुनाव के नतीजों को सर्टिफाइड कर दिया है और उसे चुनाव में धांधली के कोई सबूत नहीं मिले. नतीजों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलीं. यानी दोनों में से कोई भी गठबंधन अपने दम पर सरकार नहीं बना सकता. सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होगी.
ऐसी हालत में अरबों के नेतृत्व वाली जॉइंट लिस्ट किंगमेकर की भूमिका में है. उसे कुल 11 सीटें मिली हैं. 8 सीटें राअम को मिली हैं, जिसने जॉइंट लिस्ट से अलग होकर चुनाव लड़ा था. यानी अरब पार्टियों के पास 19 सीटें हैं और ये जिसे सपोर्ट करेंगी, उसकी ही सरकार बनेगी.
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राष्ट्रपति इसाक हर्जोग सरकार बनाने की कवायद में पार्टियों से मुलाकात कर रहे हैं. उनके पास बातचीत पूरी करने और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम तय करने के लिए 11 नवंबर तक का समय है. नई सरकार के विश्वास मत हासिल करने तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे. अगर कोई भी पक्ष गठबंधन बनाकर सरकार बनाने में नाकाम रहता है तो इजरायल में फिर से चुनाव हो सकते हैं.
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