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'हमें डर नहीं लगता, यूरेनियम एनरिचमेंट नहीं छोड़ेंगे...', अमेरिकी सैन्य तैनाती पर ईरान का बड़ा बयान

US Iran Tension: विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को कभी नहीं छोड़ेगा, भले ही देश पर युद्ध थोप दिया जाए.

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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव जारी है. (फाइल फोटो: आजतक)

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव जारी है (US Iran Tension). विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को कभी नहीं छोड़ेगा, भले ही देश पर युद्ध थोप दिया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि वह अमेरिका की युद्ध की धमकियों से डरेगा नहीं.

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NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, अराघची ने रविवार, 8 फरवरी को तेहरान में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि ईरान को वाशिंगटन पर बहुत कम भरोसा है और अमेरिका नए सिरे से शुरू हुई बातचीत को गंभीरता से ले रहा है. बाद में उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के संबंध में अपने ‘रणनीतिक साझेदारों’ चीन और रूस से सलाह मशविरा कर रहा है. 

अमेरिका और ईरान ने शुक्रवार, 6 फरवरी को ओमान में बातचीत शुरू की. बताया जा रहा है कि इस बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा हुई. ईरान अपने ऊपर लगे अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को हटवाने की भी कोशिश कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ हुई बातचीत को ‘बहुत अच्छा’ बताया लेकिन उन्होंने दबाव बनाए रखा और चेतावनी दी कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करता है, तो ‘इसके परिणाम बहुत गंभीर होंगे.’

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अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु बम बनाने की कोशिश करना बंद करे और उसके साथ इसे लेकर समझौता करे. डॉनल्ड ट्रंप इसे लेकर लगातार ईरान को धमका भी रहे हैं. अमेरिकी जंगी बेड़ा भी ईरान के आसपास के अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में भेज दिया गया है. 

इस पर ईरान के विदेश मंत्री ने कहा,

हम संवर्धन पर इतना जोर क्यों देते हैं और इसे छोड़ने से इनकार क्यों करते हैं, भले ही हम पर युद्ध थोपा जाए? क्योंकि किसी को भी हमारे व्यवहार को निर्देशित करने का अधिकार नहीं है.

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उन्होंने अरब सागर में एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन की तैनाती का जिक्र करते हुए कहा, "क्षेत्र में उनकी सैन्य तैनाती से हमें डर नहीं लगता."

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ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. ये विरोध प्रदर्शन शुरुआत में आम लोगों की नाराज़गी से शुरू हुए थे. इसकी बड़ी वजह यह थी कि दिसंबर 2025 के आखिर में ईरानी मुद्रा की कीमत गिरकर एक डॉलर के मुकाबले 14 लाख से भी नीचे पहुंच गई और महंगाई अपने चरम पर . इसके बाद यह गुस्सा धीरे-धीरे पूरी सरकार के खिलाफ बड़े प्रदर्शनों में बदल गया.

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप चेतावनी दे चुके हैं कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को मारता है या कैदियों की सामूहिक हत्या करता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब तक करीब 7000 लोग मारे गए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया है. हालांकि, ईरान सरकार इन आंकड़ों को गलत बताती है. 

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