ईरान पर हुए एक हमले में अमेरिका ने देश के सबसे ऊंचे पुल को टारगेट किया है. अमेरिका ने राजधानी तेहरान को करज से जोड़ने वाले B1 ब्रिज पर हमला किया है. इस हमले के बाद ईरान ने एक 'हिट लिस्ट' जारी की है. इस लिस्ट में खाड़ी देशों और जॉर्डन में मौजूद पुलों के नाम हैं. अपने देश के सबसे बड़े पुल पर हमले के बाद ईरान इन बड़े पुलों को निशाना बना सकता है.
ईरान ने सऊदी, UAE, जॉर्डन के 8 पुलों की लिस्ट निकाली, कहा- अब इनमें से कोई नहीं बचेगा
अमेरिका ने राजधानी तेहरान को करज से जोड़ने वाले B1 ब्रिज पर हमला किया है. इस हमले के बाद ईरान ने एक 'हिट लिस्ट' जारी की है. इस लिस्ट में खाड़ी देशों और जॉर्डन में मौजूद पुलों के नाम हैं.


ईरान की अर्ध-सरकारी मीडिया एजेंसी FARS पर इन संभावित टारगेट्स की लिस्ट जारी की गई है. कहा गया है कि अब इन सभी पुलों को निशाना बनाया जाएगा. ईरान की हिट लिस्ट में कई ऐसे पुल हैं जो गल्फ देशों के लिए अहम हैं. जैसे-
- जबार-अल-अहमद सी ब्रिज: कुवैत
- शेख जायेद ब्रिज: UAE
- अल-मकता ब्रिज: UAE
- शेख खलीफा ब्रिज: UAE
- किंग फहाद कॉजवे: सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाला ब्रिज
- किंग हुसैन ब्रिज: जॉर्डन
- दामिया ब्रिज: जॉर्डन
- अब्दून ब्रिज: जॉर्डन
ईरान के B1 ब्रिज को गिराने का वीडियो डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, उसमें देखा जा सकता है कि हवाई हमले के बाद पुल में आग लग गई और उससे घना धुआं निकलने लगा. ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने अपना रवैया नहीं बदला, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. आगे कहा,
‘उस देश का कुछ भी बाकी नहीं बचेगा, जो अब भी एक महान देश बन सकता था.’
इन हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि आम नागरिकों से जुड़ी इमारतों और पुलों पर किए गए हमले ईरानियों को घुटने टेकने पर मजबूर नहीं कर पाएंगे.
अमेरिका या इजरायल? पुल किसने उड़ाया?ईरान के B1 ब्रिज को उड़ाने का वीडियो वैसे तो प्रेसिडेंट ट्रंप ने शेयर किया है. इसलिए कहा जा रहा है कि ये हमला अमेरिका ने ही किया है. इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने पहले BBC को बताया था कि उन्हें हमले के बारे में पता नहीं था, जबकि द टाइम्स ऑफ इजरायल ने रिपोर्ट किया कि पुल पर अमेरिका का हमला हुआ था.
B1 ब्रिज मिडिल ईस्ट का सबसे ऊंचा पुल माना जाता है, जो लगभग 136 मीटर की ऊंचाई पर बना है और इसकी लंबाई करीब 1050 मीटर है. यह पुल इसी साल शुरू हुआ था और इसका मकसद तेहरान को उत्तरी इलाकों से जोड़ना और व्यापार को आसान बनाना था. इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 400 मिलियन डॉलर थी. भारतीय रुपयों में यह रकम करीब 3800 करोड़ के आसपास बैठती है. इस पुल के नुकसान से ट्रैफिक और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है.
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