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अवॉर्ड वापसी पार्ट-2: 10 लेखकों ने वापस लिए अवॉर्ड

शुरुआत करने वाली नयनतारा सहगल ने भी अवॉर्ड वापस लिया. अकादमी के पास है ही नहीं अवॉर्ड लौटाने की कोई पॉलिसी.

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नयनतारा सहगल
कुछ दिनों पहले 'इनटॉलरेंस' के मुद्दे पर अवॉर्ड लौटाने वाले लेखकों में से 10 ने अवॉर्ड वापस ले लिए हैं. इनमें जवाहरलाल नेहरू की भांजी नयनतारा सहगल भी शामिल हैं, जिन्होंने 'अवॉर्ड वापसी' शुरू किया था. दरअसल अकादमी यह कहते हुए कि उसके पास अवॉर्ड लौटाने का कोई तरीका नहीं है, अवॉर्ड संबंधित लेखकों को वापस भेज दिए. जबकि राजस्थानी लेखक नंद भारद्वाज ने कहा कि वह अकादमी के जवाब से 'संतुष्ट' हैं. कर्नाटक में लेखक एमएम कलबुर्गी और बाद में दादरी में बीफ के मुद्दे पर मोहम्मद अखलाक की हत्या के बाद इन लेखकों ने देश में 'इनटॉलरेंस' बढ़ने का आरोप लगाया था और अपने साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटा दिए थे. नयनतारा सहगल ने 'हिंदुस्तान टाइम्स' से कहा, 'अकादमी ने मुझे एक चिट्ठी लिखकर बताया कि उनके पास अवॉर्ड वापस लेने की कोई पॉलिसी नहीं है, इसलिए वे इसे दोबारा भेज रहे हैं. मैं इस पैसे को किसी अच्छे काम में लोगों के लिए इस्तेमाल करूंगी.' सहगल ने अकादमी को एक लाख रुपये की इनामी राशि का चेक वापस भेजा था, जो अकादमी ने उन्हें लौटा दिया.

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