लड़के ने कहा "सर अभी तो एडमिशन नहीं हो रहा है, जब एडमिशन होने वाला होगा तो मैं दाढ़ी कटवा लूंगा." लेकिन स्टाफ ने टेस्ट में बच्चे को फेल कर दिया.बच्चे ने स्कूल के प्रबंधक से कहा, कम से कम कॉपी ही दिखा दो. वो भी नहीं दिखाई. बेचारा बच्चा पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष के पास गया. वहां उसकी नहीं सुनी गई. फिर कलेक्टर के पास गया. उनने एक्शन लेने की बात कही.लेकिन सोचिए ये क्या बात हुई, अजब जबर्दस्ती है. अव्वल तो स्कूल लेवल के बच्चों को दाढ़ी आती नहीं, इसकी आ गई होगी. उसका मन है दाढ़ी रखने का तो इनको क्या दिक्कत है. दिक्कत है तो नियम बताएं. टेस्ट के नंबर बता दें. ये क्या कि खुन्नस में फेल कर दें. आपको बच्चा पढ़ाना है या हजामत की दुकान के ग्राहक बढ़ाने हैं? 98% हैं उस लड़के के. उसकी दाढ़ी दिखी नंबर नहीं, उसे न लेकर नुकसान किसका हो रहा है. और ये सब और बुरा हो जाता है जब इसमें धार्मिक एंगल आ जाता है.
दाढ़ी थी, कॉलेज वालों ने 'मुसलमान छात्र' को एडमिशन नहीं दिया
मऊ की बात है, लड़के ने कहा एडमिशन हो जाने दो, स्टाफ वालों ने टेस्ट में ही फेल कर दिया.
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Symbolic image- Source- Amrit Public School, Sahadatpura, Mau फेसबुक
अब ऐसा है कि जून-जमाना ऐसा है कि आदमी को आदमी मिलता ही नहीं. धंसे पड़े हैं सब हिंदू-मुसलमान में. इतने भीतर तक धंस गए हैं कि पढ़-पढ़ कपार पिराने लग जाता है. नई बकलोली आई है. मऊ जिले से एक कॉलेज से. कॉलेज वालों ने मुसलमान लड़के के दाढ़ी रखने पर एडमिशन न देनी की बात कही है. यार कॉलेज नहीं इंटर कॉलेज है. यहां वाले इंटर कॉलेज को कॉलेज कहते हैं. अब सारे जिले में इसका विरोध हो रहा है. लड़का जो था होशियार था. डॉन वास्को स्कूल से हाईस्कूल की परीक्षा पास किया. 98% मार्क्स मिले. अब जिस स्कूल में वो पढ़ता था, वहां इंटर की क्लास ही नहीं थी. एडमिशन के लिए अमृत पब्लिक स्कूल में इंट्रेंस एग्जाम का फॉर्म लेने गया. लड़के के परसेंट नहीं दिखे, स्कूल वालों को उसकी दाढ़ी दिख गई. स्टाफ ने फरमान सुना दिया. एडमिशन लेना है तो दाढ़ी कटवानी पड़ेगी.
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