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जंग की आग से बेफिक्र समंदर किनारे झूलता बचपन, ईरान की इस बच्ची का वीडियो दिल में उतर जाएगा

इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर अटैक किया था. ईरान ने हमले की प्रतिक्रिया में इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थिति अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. धीरे-धीरे इस युद्ध ने पूरे मिडिल ईस्ट को अपने चपेट में ले लिया है. युद्ध के रूकने के भी आसार नजर नहीं आ रहे. इस बीच ईरान से एक बेहद मासूम और दमदार तस्वीर आई है.

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ईरान के बंदर अब्बास के समुद्री तट से एक बच्ची की तस्वीर सामने आई है. (इंस्टा ग्रैब)

मिडिल ईस्ट पिछले 28 दिनों से युद्ध में झुलस रहा है. अब तक लड़ाई खत्म होने के ठोस संकेत नहीं मिले हैं. युद्ध सरदार जीत-हार के गुणा गणित में उलझे हैं. इंसानी जान सबसे सस्ती चीज नजर आने लगी है. इस बीच ईरान से दिल को छू लेने वाली मासूमियत से भरी बेहद दमदार तस्वीर सामने आई है. जो युद्ध के विरोधाभासों को बखूबी दिखाती है.

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वीडियो ईरान के बंदर अब्बास शहर से आया है. यह ईरान का सबसे महत्वपूर्ण नौसेनिक अड्डा है. यहां समुद्री तट पर एक छोटी बच्ची झूला झूलती नजर आ रही है. उसके पीछे नौसेना अड्डे से काले धुएं का खौफनाक गुबार उठता दिख रहा है, जिस पर अभी-अभी हमला हुआ था. लेकिन बच्ची उससे बिल्कुल बेखबर और बेफिक्र अपनी दुनिया में मगन दिख रही है.

यह दृश्य 'बड़ों' की बनाई व्यवस्था को मुंह चिढ़ाने वाली है. उनके थोपे गए युद्ध की विभीषिका को बच्ची की मासूमियत ने नकार दिया है. यह उनकी बनाई व्यवस्था से उसका अबोध विद्रोह है, जहां इंसान की जान की कोई कीमत नहीं है. यह दृश्य निर्दोषों की मासूमियत और युद्ध ‘प्रेमियों’ की भयानक सच्चाई के बीच के गहरे विरोधाभास को भी दिखाता है.

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अमेरिकी सेना ने 26 मार्च को ईरान के बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे पर हमला करने का दावा किया था. लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है. इस छोटी बच्ची का वीडियो ऐसे समय में आया है, जब ईरानी सरकार ने एक बेहद परेशान करने वाला फैसला लिया है. इस फैसले के मुताबिक, ईरान की सेना युद्ध में बच्चों की मदद लेगी. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक अधिकारी ने 26 मार्च को सरकारी मीडिया को बताया कि अब ईरान में 12 साल तक के बच्चे युद्ध से जुड़े सहायक कामों में हिस्सा ले सकते हैं. 

IRGC के सांस्कृतिक अधिकारी रहीम नदाली ने बताया कि इस मुहिम को फॉर ईरान (For Iran) नाम दिया गया है. इसके तहत 12 साल तक के बच्चों की भर्ती की जाएगी. इनसे पेट्रोलिंग (गश्ती), चेकपॉइंट और लॉजिस्टिक्स (साजो सामान के इंतजाम) जैसे कामों में मदद ली जाएगी. नदाली ने आगे बताया,

 जो लोग सेना की मदद के लिए आगे आ रहे हैं उनकी उम्र काफी कम है. वे खुद मदद की पेशकश कर रहे हैं. इसलिए हमने न्यूनतम उम्र सीमा घटाकर 12 साल कर दी है. अब 12 साल और उससे ज्यादा उम्र के बच्चे चाहें तो इन कामों में हिस्सा ले सकते हैं. 

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ईरान ने यह कदम 'Convention on the Rights of the Child' के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बावजूद उठाया है. यह कन्वेंशन सेना से जुड़ी गतिविधियों में बच्चों के इस्तेमाल पर रोक लगाता है. संयुक्त राष्ट्र ने साल 1989 में इस कन्वेंशन को अडॉप्ट किया था.

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