The Lallantop

इजरायली सेना 'टूट' हो सकती है, IDF चीफ ने खुद चेताया, 10 बड़े खतरे भी बताए

इजरायली सेना एक साथ कई मोर्चे पर युद्ध में फंसी है. इस बीच इजरायल डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने सेना में मैनपावर की भारी कमी को लेकर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि युद्ध के लंबा खिंचने के चलते सक्रिय सैनिकों और रिजर्व सैनिकों की संख्या में भारी कमी आई है.

Advertisement
post-main-image
IDF के चीफ ऑफ स्टाफ इयाल जमीर पहले भी लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के खिलाफ रहे हैं. (Reuters)

गाजा में हमास से युद्ध, लेबनान में हिजबुल्लाह से टकराव और पिछले लगभग एक महीने से ईरान से जंग. इजरायल एक साथ कई मोर्चों पर हिंसक संघर्ष में उलझा हुआ है. इसके चलते इजरायली सुरक्षा बलों पर काफी दबाव है. इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने सेना में मैनपावर की कमी को लेकर चेतावनी दी है. उनका मानना है कि अगर नई भर्ती नहीं हुई तो IDF 'कॉलैप्स' कर जाएगा. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

द जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 25 मार्च को इजरायल के सुरक्षा कैबिनेट की बैठक हुई. इस बैठक में लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने चेतावनी दी कि अगर मैनपावर की कमी पूरी नहीं हुई तो IDF जल्दी ही कोलैप्स कर सकता है. उन्होंने मीटिंग में सेना से जुड़े 10 रेड फ्लैग (खतरे के संकेत) बताए.

IDF चीफ के बताए गए 10 रेड फ्लैग

Advertisement

1. जवानों की भारी कमी - युद्ध के लंबा खिंचने और कई मोर्चों पर उलझने के चलते सक्रिय सैनिकों और रिजर्व बलों की संख्या में भारी गिरावट आई है.

2. मिशन का बढ़ता बोझ - मौजूदा सैनिकों पर उनकी क्षमता से ज्यादा ड्यूटी का दबाव पड़ रहा है. 

3. रिजर्व फोर्स की थकान - बार बार मोर्चे पर बुलाने के चलते रिजर्व सैनिकों में भी शारीरिक और मानसिक थकान की शिकायत आई है.

Advertisement

4. अर्थव्यवस्था पर असर - रिजर्व सैनिकों के लंबे समय तक मोर्चे पर रहने से देश की अर्थव्यवस्था और उनके निजी रोजगार पर बहुत बुरा असर हो रहा है.

5. हथियारों की आपूर्ति - इजरायल पिछले 900 दिनों से कहीं न कहीं युद्ध में उलझा हुआ है. इसके चलते गोला-बारूद और सैन्य उपकरणों के स्टॉक में कमी आने का खतरा है. 

6. कमांडर्स की कमी - अग्रिम मोर्चे पर अनुभवी फील्ड कमांडरों और अधिकारियों की संख्या लगातार कम हो रही है.

7. भर्ती में असमानता - समाज के कुछ वर्गों (जैसे अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी) को अनिवार्य सर्विस से छूट देना बाकी सैनिकों में असंतोष पैदा कर रहा है. 

8. ट्रेनिंग की कमी - युद्ध में व्यस्त होने के चलते नए रंगरूटों और मौजूदा यूनिट्स की रेगुलर ट्रेनिंग नहीं हो पा रही है.

9. मानसिक स्वास्थ्य संकट - लंबे समय तक युद्ध के मोर्चे पर रहने से सैनिकों में पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) के मामले बढ़ रहे हैं.

10. इंटरनल स्ट्रक्चरल कोलैप्स - अगर तुरंत नए सैनिकों की भर्ती और संसाधनों का मैनेजमेंट नहीं किया गया तो सेना अंदरूनी तौर पर कोलैप्स कर सकती है.

इजरायल अक्टूबर 2023 से युद्ध में है

7 अक्टूबर, 2023. हमास ने इजरायल पर हमला किया था. इस घटना के बाद से इजरायल लगातार युद्ध और संघर्ष में उलझा हुआ है. इजरायली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 7 अक्टूबर के बाद से अलग-अलग संघर्षों में कुल 1,152 इजरायली सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. इनमें इजरायल सुरक्षा बल (IDF), इजरायल पुलिस, शिन बेट (सुरक्षा एजेंसी) और नागरिक आपातकालीन प्रतिक्रिया दल के सदस्य शामिल हैं.

वीडियो: ईरान ने अमेरिका-इजरायल के सामने रखीं 6 शर्तें, क्या होगा अब सीजफायर?

Advertisement