रुपया भले ही कमजोर हो रहा हो पर देश की अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अच्छी खबर आई है. वित्त वर्ष (FY) 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) देश की विकास दर में 7.8% रही. भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि अप्रैल–जून में 7.8% GDP वृद्धि यह दिखाती है कि देश की अर्थव्यवस्था की रफ़्तार और स्थिरता दोनों मजबूत हो रही हैं. खपत और निवेश अब भी अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार बने हुए हैं.
रुपया गिर रहा लेकिन GDP बढ़ गई, अप्रैल-जून तिमाही में विकास दर 7.8% रही
भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि अप्रैल–जून में 7.8% GDP वृद्धि यह दिखाती है कि देश की अर्थव्यवस्था की रफ़्तार और स्थिरता दोनों मजबूत हो रही हैं. खपत और निवेश अब भी अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार बने हुए हैं.
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CEA का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ़ को ‘घरेलू सुधार और नियमों में ढील देने का अवसर’ समझना चाहिए और साथ ही भारत को नए निर्यात बाज़ार तलाशने चाहिए. उन्होंने कहा,
“हम उम्मीद करते हैं कि जीडीपी वृद्धि 6.3% से 6.8% के लक्ष्य दायरे में बनी रहेगी. हालांकि कुछ चुनौतियां भी हैं.”
इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस तिमाही के दौरान निजी खपत का हिस्सा जीडीपी में पिछले 15 साल में सबसे ऊंचा रहा. रिपोर्ट के मुताबिक शहरी मांग बढ़ रही है, FMCG बिक्री और UPI लेनदेन तेज़ हैं. ग्रामीण मांग भी मज़बूत है, ग्रामीण क्षेत्रों में FMCG बिक्री 8.4% बढ़ी.
रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च (capital expenditure) पहली तिमाही में 30% बढ़ा. स्थायी पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation) 7.8% बढ़ा. कृषि क्षेत्र 3.7% बढ़ा (पिछले साल 1.5% था). सेवाओं का क्षेत्र सबसे बड़ा सहारा रहा, 9.3% की तेज़ वृद्धि. जबकि उद्योग क्षेत्र में स्थिरता आई है. इसके अलावा निर्यात में मजबूती आई है और महंगाई (inflation) का दबाव कम माना जा रहा है. रोज़गार बाज़ार में भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं.
NSO के आंकड़ों के अनुसार…- वास्तविक जीडीपी (Real GDP) Q1 FY26 में ₹47.89 लाख करोड़ रही (पिछले साल ₹44.42 लाख करोड़ थी).
- नाममात्र जीडीपी (Nominal GDP) 8.8% बढ़कर ₹86.05 लाख करोड़ रही.
- खनन (Mining) 3.1% घटा और बिजली-गैस-जल आपूर्ति की वृद्धि 0.5% रही.
- लेकिन कृषि और सेवाओं ने कुल वृद्धि को ऊपर खींचा.
भारत अब भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है. चीन की वृद्धि इसी तिमाही में 5.2% रही. हालांकि, अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक व्यापार की स्थिति और अमेरिका के ऊंचे टैरिफ़ से आने वाले महीनों में भारत के निर्यात पर दबाव पड़ सकता है.
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