29 अगस्त की दोपहर भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गया. रुपया 87.6963 पर खुला लेकिन डॉलर के मुकाबले गिरकर 88.1000 तक पहुंच गया. रुपया लंबे समय से कमज़ोर हो रहा था, पर हालिया गिरावट का कारण अमेरिका द्वारा भारतीय सामान पर लगाए गए 50% टैरिफ (शुल्क) को माना जा रहा है.
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले इतिहास के सबसे निचले स्तर पर, 1 डॉलर 88 रुपये के बराबर
रुपये में आई इस गिरावट का का कारण अमेरिका द्वारा लगाया गया 50 प्रतिशत टैरिफ माना जा रहा है.


रुपया शुरुआत में ही 6 पैसे कमजोर खुला क्योंकि डॉलर इंडेक्स में तेज़ी आई थी. विदेशी निवेशकों की शेयर बाज़ार में बिकवाली और अमेरिकी टैरिफ के आर्थिक असर ने भी रुपये पर दबाव डाला.
पिछले चार महीनों में भारतीय रुपया चीनी युआन के मुकाबले भी करीब 6% कमजोर हुआ है. 29 अगस्त को रुपया ऑफशोर युआन के मुकाबले 12.3307 तक गिर गया. इस तरह साप्ताहिक गिरावट 1.2% और मासिक गिरावट 1.6% हो गई. यह भी अमेरिका द्वारा भारत और चीन पर लगाए गए अलग-अलग टैरिफ के असर को दिखाता बताया जा रहा है.
रुपया युआन के मुकाबले कमजोर होने से भारतीय निर्यात चीनी सामान की तुलना में सस्ते हो सकते हैं. इससे अमेरिका के ऊंचे टैरिफ का असर कुछ हद तक कम हो सकता है. साथ ही, यह भारत का चीन के साथ बड़ा व्यापार घाटा (trade deficit) घटाने में भी मदद कर सकता है.
भारतीय रुपये में इस रिकॉर्ड गिरावट से ठीक एक दिन पहले अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 28 अगस्त को राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की इस बात को दोहराया कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर “मुनाफाखोरी” कर रहा है. हालांकि, अमेरिकी वित्त मंत्री ने यह भी उम्मीद जताई कि ज्यादा टैरिफ के बावजूद भारत और अमेरिका अंत में एक समझौते पर जरूर पहुंचेंगे.
उन्होंने Fox Business Network से कहा,
“आखिरकार हम (भारत और अमेरिका) एक साथ आएंगे.”
यह बयान उस वक्त आया जब अमेरिकी सरकार का 50% टैरिफ भारतीय सामान पर लागू हो चुका था. नतीज़ा भारतीय रुपया आज रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया.
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