पालक पनीर पर दो भारतीयों से झगड़ा अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी को बहुत महंगा पड़ा. दोनों का दावा है कि यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो में रहते हुए उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा. उन्हें पालक पनीर गर्म करने तक से रोका गया. इसके खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई तो यूनिवर्सिटी ने उन्हें भविष्य में एडमिशन या नौकरी देने से इनकार कर दिया. हालांकि यूनिवर्सिटी को सबक सिखाए बिना दोनों भारत नहीं लौटे. उन्होंने अपने साथ हुए भेदभाद के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया था, जिसके तहत यूनिवर्सिटी को उन्हें 1.80 करोड़ रुपये का मुआवजा देना पड़ा.
अमेरिकी यूनिवर्सिटी को पालक-पनीर की 'कीमत' 1.80 करोड़ की पड़ी! भारतीयों ने सिखाया सबक
US University Palak Paneer Row: यूनिवर्सिटी को सबक सिखाए बिना दोनों भारत नहीं लौटे. उन्होंने अपने साथ हुए भेदभाद के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया था, जिसके तहत यूनिवर्सिटी को उन्हें 1.80 करोड़ रुपये का मुआवजा देना पड़ा.
.webp?width=360)

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यह कहानी है आदित्य प्रकाश और उनकी पार्टनर उर्मी भट्टाचार्य की. आदित्य भोपाल के रहने वाले हैं और उर्मी कोलकाता की. दोनों पहली बार दिल्ली में मिले थे. इसके बाद दोनों ने PhD करने के लिए अमेरिका में एडमिशन लिया. आदित्य ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ कोलोराडो बोल्डर के एंथ्रोपोलॉजी डिपार्टमेंट में एडमिशन लिया था. वहीं उर्मी ने पहले यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया में सोशियोलॉजी में एडमिशन लिया.बाद में वो भी यूनिवर्सिटी ऑफ़ कोलोराडो बोल्डर में चली गईं.
पालक पनीर से शुरू हुआ विवादरिपोर्ट के मुताबिक एडमिशन लेने के एक साल बाद, 5 सितंबर 2023 को आदित्य डिपार्टमेंट में माइक्रोवेव में अपना लंच गर्म कर रहे थे. उनके लंच में पालक पनीर था. आदित्य के मुताबिक तभी एक एक स्टाफ मेंबर आदित्य के पास आई और कहा कि उनके लंच में से ‘खराब गंध’ आ रही है. स्टाफ मेंबर से कहा कि वह अपना खाना वहां न गर्म करें, उसकी ‘बदबू बहुत तेज’ है. आदित्य ने जवाब दिया कि यह सिर्फ खाना है, इसे गर्म करके जा रहा हूं.
वाकया गुजर गया, लेकिन आदित्य के मन में भेदभाव की टीस छोड़ गया. उन्होंने इसे नस्लीय भेदभाव मानते हुए डिपार्टमेंट में शिकायत की. लेकिन डिपार्टमेंट ने उनकी बात सुनने की बजाय उन्हें और उनकी पार्टनर उर्मी को ही परेशान करना शुरू कर दिया. दोनों का आरोप है कि डिपार्टमेंट ने उन्हें मास्टर डिग्री देने से इनकार कर दिया, जो PhD स्टूडेंट्स को दी जाती है. उर्मी का ये भी आरोप है कि उन्हें टीचिंग असिस्टेंट की नौकरी से भी बिना किसी चेतावनी के निकाल दिया गया. आदित्य और उर्मी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस घटना के बाद से डिपार्टमेंट ने उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई करना शुरू कर दिया.
दोनों ने आरोप लगाया कि फैकल्टी के साथ मीटिंग में उनसे कहा जाता कि उनकी मौजूदगी से स्टाफ को ‘असुरक्षित महसूस’ करता है. उर्मी बताती हैं कि घटना के तीन दिन बाद वह और कुछ अन्य छात्र भारतीय खाना लेकर आए तो उन पर कैंपस में ‘दंगा भड़काने’ जैसा गंभीर आरोप लगा दिया गया. उर्मी ने स्टूडेंट कंडक्ट ऑफिस से इसकी शिकायत की तो इन शिकायतों को भी खारिज कर दिया गया.
आदित्य और उर्मी के मुताबिक भेदभावपूर्ण व्यवहार और लगातार बदले की भावना के कारण उन्हें मानसिक परेशानी और पीड़ा हुई. इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी के खिलाफ सितंबर, 2023 में ही सिविल राइट्स मुकदमा दायर कर दिया.
यह भी पढ़ें- क्या है “शक्सगाम घाटी” का पूरा विवाद और इतिहास, जिस पर भारत-चीन फिर आमने-सामने हैं
उन्होंने अदालत को बताया कि कैसे यूनिवर्सिटी में भेदभावपूर्ण व्यवहार को लेकर चिंता जताने के बाद उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई का एक पैटर्न अपनाया गया. हालांकि मुकदमे में यूनिवर्सिटी ने दोनों छात्रो के साथ समझौता कर लिया. उन्हें हर्जाने के तौर पर $200,000 (एक करोड़ 80 लाख रुपये) दिए. लेकिन दोनों के भविष्य में एडमिशन या नौकरी लेने पर बैन लगा दिया.
अब दोनों भारत लौट आए हैं. आदित्य और उर्मी का कहना है कि उनके साथ जो कुछ भी हुआ, वह नस्लीय भेदभाव की शर्मनाक मिसाल है. डॉनल्ड ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद यह और बढ़ा है, लोगों में दूसरी नस्ल के लोगों को लेकर सहानुभूति कम हो रही है. आदित्य कहते हैं कि अब वह वापस अमेरिका नहीं जाना चाहते, क्योंकि वह फिर से उस अनुभव का दोबारा से सामना नहीं करना चाहते हैं.
वीडियो: US के राजदूत सर्जियो गोर का संकेत, भारत-अमेरिका के बीच होगी नई डील?












.webp?width=275)




.webp?width=120)
.webp?width=120)


