
रेलवे स्टेशन पर सामान रखना महंगा होने वाला है.
सीधी बात ये है कि एक बार फिर रेलवे आपकी जेब पर बोझ बढ़ाने को तैयार है. और इस बार बढ़ रहा है क्लॉक रूम और लॉकरों के इस्तेमाल का चार्ज. कितना बढ़ रहा है, ये तो अभी तय नहीं है. मगर इनका चार्ज बढ़ाने का तरीका बदल दिया गया है. पहले ये चार्ज रेलवे बोर्ड खुद बढ़ाता था. मगर अब ये अधिकार मंडल रेल प्रबंधकों (डीआरएम) को दे दिया गया है. अब वो ही तय करेंगे कि स्टेशनों पर इस सुविधा का शुल्क कितना बढ़ाना है. इसके तहत पहले इन सुविधाओं का कायाकल्प भी किया जाएगा. सारा सिस्टम कंप्यूटराइज्ड होगा. इसका काम रेलवे प्राइवेट वेंडर्स को देने की तैयारी में है. जल्द ही इसके लिए बोली लगाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. नया सिस्टम बनने के बाद हर साल वेंडर इसके रेट भी रिवाइज कर सकेगा. माने हर साल इसका चार्ज बढ़ना तय.
रेलवे के अधिकारियों का मानना है कि तमाम ऐसे स्टेशन हैं, जहां भारी संख्या में टूरिस्ट आते हैं. और तमाम टूरिस्ट अपना लगेज स्टेशन के क्लॉक रूम में जमा करवा देते हैं. तो कहीं ये बोझ ज्यादा हो जाता है तो कुछ स्टेशन पर ये नाम मात्र रहता है. इस लिहाज से डीआरएम के पास ये अधिकार होना चाहिए कि वो अपनी लोकल कंडीशंस के हिसाब से इनका चार्ज तय करें.

बाकी तो रेलगाड़ी बढ़िया चल ही रही है.
पहले ये था चार्ज
फिलहाल रेलवे 24 घंटे के लिए लॉकर में सामान रखने पर 20 रुपए लेता है. इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त 24 घंटे के लिए 30 रुपए वसूले जाते हैं. इसके पहले यह चार्ज 15 रुपए था. क्लॉकरूम का चार्ज 24 घंटे के लिए 15 रुपए है. सन 2000 में यह सात रुपए था. और हर एक्स्ट्रा 24 घंटे के लिए यात्रियों से 20 रुपए लिए जाते हैं. इससे पहले ये चार्ज 10 रुपए था. और अब ये चार्ज क्या होगा, वो डीआरएम अपने स्टेशन के हिसाब से तय करेंगे. माने अलग-अलग स्टेशनों में इसके चार्ज अलग हो जाएंगे, जो कि अभी एक हैं.
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