रवि अब हमारे बीच नहीं रहे. झांसी गए थे, ऑफिस के काम से. तस्वीरें खीचनी थी रेल वाली ट्रेन की, जो सूखे में पानी लेकर गई थी. लेकिन रवि के जुनून ने उसे ट्रेन के ऊपर पहुंचा दिया. वो ट्रेन की छत पर खड़ा हो गया. आपको शायद नासमझी लगे. लेकिन वो ट्रेन के कंटेनर का ढक्कन हटा कर उसमें पड़े गंदे पानी की तस्वीर लेना चाहता था.ये तस्वीर ज़रूरी इसलिए थी क्योंकि वो पानी लोगों के पीने के लिए लाया गया था. लेकिन होनी को कुछ और ही मंज़ूर था. ट्रेन के ऊपर से जा रही हाईटेंशन वायर उसे छू गई. रवि के तेज करंट लगा.

जिंदगी की आखिरी तस्वीर और रवि की जिंदगी अधूरी रह गई. रवि सबको अलविदा कह गया. लेकिन वो याद रहेगा हमेशा. उन्हें भी जो उसे पर्सनली नहीं जानते. उसका काम ही उसकी पहचान था और यही पहचान लोगों के दिलों में ज़िंदा रहेगी.
रवि का परिवार लुधियाना में रहता है. घर में माता-पिता और तीन बहनें हैं. साल 2005 से इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ा था. मुज्जफरनगर दंगों की तस्वीरों ने रवि को 2014 में PCI की तरफ से क्रिएटिव एक्सिलेंस का अवॉर्ड दिलवाया. यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रवि के परिवार को 20 लाख रुपये देने का वादा किया है.

2014 में PCI की तरफ से क्रिएटिव एक्सिलेंस का अवॉर्ड लेते रवि कनौजिया
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