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"चीनी सामान की जगह अमेरीकी उत्पाद को प्राथमिकता..." ट्रंप के टैरिफ से बचने के लिए ये तैयारी कर रही है सरकार

US Reciprocal Tariff: भारत सरकार अमेरिकी टैरिफ से बचने के उपाए खोज रही है. भारतीय निर्यातकों के लिए अच्छे अवसर और बाजार तक उनकी बेहतर पहुंच को सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

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भारत सरकार अमेरिकी टैरिफ से बचने के उपाए खोज रही है. (फाइल फोटो: PTI/इंडिया टुडे)

अमेरिका की ओर से लगाया गया रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) आगामी 2 अप्रैल से लागू हो सकता है. इसको लेकर भारतीय निर्यातक आशंका में हैं. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने उन क्षेत्रों की पहचान करने को कहा है, जहां चीन और दूसरे देशों के सामान के बदले अमेरिकी सामानों को प्राथमिकता दी जा सकती है. 

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इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले से जुड़े अधिकारियों के हवाले से इसे रिपोर्ट किया है. पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे मौके आए जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर भारत की आलोचना की. उन्होंने खुले मंचों से कहा कि भारत में व्यापार करना मुश्किल है क्योंकि वहां बहुत ज्यादा टैरिफ लगाया जाता है. इसके बाद उन्होंने रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा की. इसका मतलब है कि जो देश अमेरिका पर जितना टैरिफ लगाएगा, अमेरिका भी उन पर उतना ही टैरिफ लगाएगा.

भारत सरकार अब अमेरिकी टैरिफ से बचने के उपाए खोज रही है. भारतीय निर्यातकों के लिए अच्छे अवसर और बाजार तक उनकी बेहतर पहुंच को सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं. 

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Piyush Goyal ने क्या कहा?

मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए कई रणनीतियों पर काम कर रही है. 13 मार्च को उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक हुई थी. इसमें टैरिफ के कारण आने वाले बदलावों पर चर्चा की गई.

स्टील और एल्युमिनियम निर्यातकों ने सरकार को बताया कि ट्रंप के 25 प्रतिशत टैरिफ से पहले ही 5 बिलियन डॉलर (करीब 41,000 करोड़ रुपये) के निर्यात पर असर पड़ा है. इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने बताया कि अमेरिकी टैरिफ से MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) क्षेत्र को ज्यादा चिंता है. करीब 1 बिलियन डॉलर ( 8600 करोड़ रुपये से अधिक) का सामान अभी समुद्र में सफर कर रहा है और वो भी इस टैरिफ की चपेट में आ जाएगा.

इस बैठक में सरकार ने अमेरिकी सामानों को बाजार में जगह देने की संभावनाओं पर चर्चा की. कपड़ा उद्योग ने अमेरिकी उत्पादों के लिए शून्य-ड्यूटी (Zero Duty) एक्सेस देने पर सहमति जताई. यानी कि उन पर कोई टैक्स ना लगे. वहीं, रत्न और आभूषण (Gems & Jewellery) सेक्टर ने कटे और पॉलिश किए गए हीरों पर वर्तमान के 5 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 2.5 प्रतिशत करने की मांग की. 

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भारत को फायदा या नुकसान?

बैठक में कुछ निर्यातकों ने कहा कि अमेरिका की टैरिफ नीतियों से भारत को फायदा भी हो सकता है. वहीं इसके कारण चीन, मैक्सिको और कनाडा जैसे देशों को नुकसान हो सकता है. उन्होंने कहा कि भारत में सामान बनाने की लागत कम है. इसलिए हमारा देश कई सेक्टर्स में आगे बढ़ सकता है. बैठक में भाग लेने वाले एक सदस्य ने कहा कि ये भारत के लिए अच्छा मौका हो सकता है. जब बाकी के देश भारी टैरिफ लगा रहे हैं तो भारतीय सामानों की मांग बढ़ सकती है.

इस बीच विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने आगाह किया है कि बढ़ते टैरिफ और व्यापार नीति में अनिश्चितता से ग्लोबल मार्केट पर असर पड़ सकता है. 

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