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Indian Railways: 5 साल में 200 नई ट्रेनें और वो भी स्वेदशी, जानिए आपके शहर को रेलवे से क्या मिलने वाला है

Indian Railways का चेहरा बदलने वाला है. रेल मंत्रालय, तेलंगाना के काजीपेट में नई फैक्ट्री से अगले 5 साल में 200 आधुनिक स्वदेशी इंटरसिटी ट्रेनें शुरू करेगा. इसके लिए 300 किमी वाले रूट का पूरा प्लान तैयार किया जा चुका है. साथ ही देश के नक्शे पर एक नई फैक्ट्री चमकने वाली है. जो आने वाले दिनों में देश के पटरियों की पूरी कहानी बदल देगी.

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5 साल में 200 आधुनिक स्वदेशी इंटरसिटी ट्रेनें शुरू करेगा (फोटो- PTI)

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  • तेलंगाना के काजीपेट में भारत की नई रेल वैगन और कोच मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगभग तैयार है, जहां अगले पांच सालों में 200 स्वदेशी इंटरसिटी ट्रेनें बनेंगी।
  • काजीपेट में ये फैक्ट्री भारत की विदेशी निर्भरता खत्म करने के उद्देश्य से स्थापित की गई है, ताकि घरेलू तकनीक से छोटी दूरी की ट्रेनें तैयार की जा सकें।
  • इन नई इंटरसिटी ट्रेनों से कम दूरी की यात्राएं सस्ती और बेहतर होंगी, जिससे छोटे शहरों के लोगों को शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलेंगे।

अगर आप भी आए दिन 150 से 300 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं, अपने घर से किसी पास के शहर नौकरी करने जाते हैं, या फिर पढ़ाई के लिए डेली अप-डाउन करते हैं, तो यह खबर खास आपके लिए है. तेलंगाना के काजीपेट में देश की नई रेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बनकर लगभग तैयार है. रेल मंत्रालय (Indian Railways) ने साफ कर दिया है कि अगले 5 सालों में यहां से एक या दो नहीं, बल्कि पूरी 200 नई स्वदेशी इंटरसिटी ट्रेनें बनकर निकलेंगी.

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ये ट्रेनें लंबी दूरी वाली वंदे भारत या राजधानी जैसी नहीं होंगी, बल्कि इनका सीधा फोकस आपकी और हमारी रोजमर्रा की छोटी यात्राओं को आसान बनाना है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस पूरी खबर के मायने क्या हैं और यह आम भारतीय रेलयात्री की जिंदगी को कैसे बदलने वाली है.

काजीपेट फैक्ट्री का काम आखिरी चरण में

मशहूर अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना के काजीपेट में बन रही यह वैगन और कोच मैन्युफैक्चरिंग यूनिट अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. रेल मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद गंभीर है और खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव इसकी प्रोग्रेस पर नजर रख रहे हैं.

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इस फैक्ट्री का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2023 में किया था. तब से लेकर अब तक इसका काम रिकॉर्ड तेजी से आगे बढ़ा है. द हिंदू की रिपोर्ट बताती है कि इस यूनिट का मुख्य मकसद भारतीय रेलवे की बाहरी देशों पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना है. यहां बनने वाली सभी 200 ट्रेनें पूरी तरह से 'मेड इन इंडिया' यानी स्वदेशी होंगी. रेलवे का प्लान है कि जैसे ही इस फैक्ट्री का पहला फेज चालू होगा, वहां से ट्रेनों का प्रोडक्शन शुरू कर दिया जाएगा ताकि अगले 5 साल के टारगेट को समय पर पूरा किया जा सके.

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काजीपेट में बन रही यह वैगन और कोच मैन्युफैक्चरिंग यूनिट (फोटो- Indian Railways)

शॉर्ट-डिस्टेंस कनेक्टिविटी पर फोकस

आखिर इन 200 नई ट्रेनों को चलाने के पीछे रेलवे की सोच क्या है? इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, रेलवे इस बार लंबी दूरी की ट्रेनों के बजाय 'शॉर्ट-डिस्टेंस कनेक्टिविटी' यानी कम दूरी के रूट पर बड़ा दांव खेल रहा है. ये सभी 200 ट्रेनें अधिकतम 300 किलोमीटर तक के सफर के लिए डिजाइन की जा रही हैं.

अब तक होता ये था कि छोटे शहरों से बड़े शहरों के बीच चलने वाली पैसेंजर या एक्सप्रेस ट्रेनों की हालत बहुत अच्छी नहीं होती थी. उनमें भीड़ ज्यादा होती थी और सुविधाएं कम. इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह नई योजना सीधे तौर पर डेली कम्यूटर्स यानी रोज सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और छात्रों को ध्यान में रखकर बनाई गई है. इन ट्रेनों के रूट इस तरह तय किए जाएंगे कि दो बड़े केंद्रों के बीच पड़ने वाले छोटे-छोटे कस्बों और स्टेशनों को भी इसका पूरा फायदा मिल सके. इससे छोटे शहरों के लोगों को बड़े शहरों में रोजगार और शिक्षा के लिए आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी.

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कैसी होंगी ये आधुनिक ट्रेनें?

अब सवाल उठता है कि ये ट्रेनें दिखने में कैसी होंगी और इनमें क्या सुविधाएं मिलेंगी? रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बारीक नजर रखने वाली वेबसाइट 'मेट्रो रेल न्यूज' ने इन ट्रेनों के तकनीकी पक्ष को सामने रखा है. रिपोर्ट के अनुसार, ये ट्रेनें पूरी तरह से आधुनिक और नई जनरेशन की तकनीक से लैस होंगी.

मेट्रो रेल न्यूज की रिपोर्ट से सामने आई कुछ बड़ी तकनीकी जानकारियां इस प्रकार हैं.

रफ्तार और क्षमता: ये नई इंटरसिटी ट्रेनें 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम होंगी. इनमें 20 कोच यानी डब्बे होंगे, जिससे एक बार में हजारों यात्री सफर कर सकेंगे.

ऑटोमैटिक दरवाजे: सुरक्षा के लिहाज से इन ट्रेनों में मेट्रो और वंदे भारत की तरह ऑटोमैटिक दरवाजे लगे होंगे. जब तक दरवाजे बंद नहीं होंगे, ट्रेन आगे नहीं बढ़ेगी.

बेहतर वेंटिलेशन और आराम: इन ट्रेनों का इंटीरियर बिल्कुल नया होगा. बैठने के लिए आरामदायक सीटें होंगी और हवा के वेंटिलेशन के लिए खास इंतजाम किए जाएंगे ताकि भीड़ होने पर भी घुटन महसूस न हो.

एनर्जी की बचत: इन ट्रेनों में 'रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम' का इस्तेमाल किया जाएगा. इसका मतलब यह है कि जब भी ट्रेन में ब्रेक लगाया जाएगा, उससे बिजली पैदा होगी और वही बिजली वापस ग्रिड में चली जाएगी. इससे रेलवे का बिजली का खर्च बहुत कम हो जाएगा.

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काजीपेट प्रोजेक्ट और नई इंटरसिटी ट्रेनों का पूरा गणित

काजीपेट प्रोजेक्ट और नई इंटरसिटी ट्रेनों का पूरा गणित

रेल मंत्रालय का अगला 5 साल का पूरा ब्लूप्रिंट

खास बात पूरी जानकारी
फैक्ट्री की लोकेशन काजीपेट, तेलंगाना
कुल ट्रेनों का टारगेट 200 स्वदेशी इंटरसिटी ट्रेनें
समय सीमा अगले 5 साल (2026 से 2031 तक)
सफर की दूरी अधिकतम 300 किलोमीटर (कम दूरी के रूट्स)
ट्रेन की टॉप स्पीड 130 किलोमीटर प्रति घंटा
कोच की संख्या प्रति ट्रेन 20 आधुनिक कोच (ज्यादा क्षमता)
मुख्य फीचर्स ऑटोमैटिक गेट्स, रीजनरेटिव ब्रेकिंग, 100% स्वदेशी तकनीक
डेटा सोर्स: रेल मंत्रालय समीक्षा रिपोर्ट

नोट: AI की मदद से तैयार ग्राफिक

आम जनता को इससे क्या फायदा होने वाला है?

इस पूरी योजना का सबसे बड़ा असर भारतीय मध्यम वर्ग और रोज कमाने-खाने वाले लोगों पर पड़ेगा. अभी देश में वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनें चल रही हैं, जिनका किराया आम पैसेंजर ट्रेनों से काफी ज्यादा होता है. लेकिन काजीपेट से निकलने वाली ये 200 इंटरसिटी ट्रेनें आम लोगों के बजट को ध्यान में रखकर चलाई जाएंगी.

कम दूरी के रूट पर इन आधुनिक ट्रेनों के आने से सड़कों पर गाड़ियों का दबाव कम होगा. जो लोग अभी अपनी कार या बसों से 200-300 किलोमीटर का सफर तय करते हैं, वे बेहद कम खर्च में और बिना किसी ट्रैफिक के आराम से अपने डेस्टिनेशन पर पहुंच सकेंगे. सबसे बड़ी बात यह है कि इन ट्रेनों के आने से देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों का आर्थिक विकास तेजी से होगा क्योंकि जब कनेक्टिविटी बेहतर होती है, तो व्यापार अपने आप बढ़ने लगता है.

शॉर्ट-डिस्टेंस कनेक्टिविटी का यह नया मॉडल आने वाले समय में भारतीय रेलवे का सबसे बड़ा गेम चेंजर साबित होने जा रहा है. तेलंगाना की यह नई फैक्ट्री देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है.

वीडियो: रेलवे ने बदला टिकट कैंसिल का नियम, अश्विनी वैष्णव ने क्या बताया?

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