खैर रिकॉर्ड का क्या है, बनते-टूटते रहते हैं. मगर चौथे दिन कई चीजें ऐसी हुई जिन्हें देख मजा आया. इंडिया ने अपने 151/3 के ओवरनाइट स्कोर के आगे खेलना शुरू किया. पुजारा और रहाणे ने बढ़िया 87 रनों की साझेदारी की. पुजारा 71 रन बनाकर आउट हुए. फिर आए रोहित शर्मा और एक रन बनाकर नैथन लायन की घुमती गेंद का शिकार हुए. फिर पधारे ऋषभ पंत. ओवर नैथन लायन का था. टेस्ट क्रिकेट है, हर कोई थोड़ा क्रीज को भांपता है, बॉलर को आंकता है और डिफेंस करके अपनी नजरे टिकाता है. मगर ये ऋषभ पंत हैं. इनकी क्रिकेट ट्रेनिंग में ये सब नहीं. पहली ही गेंद पर आगे बढ़कर छक्का मारने की कोशिश की. लॉन्ग ऑन पर कोई था तो बच गए. दो रन भागकर ले लिए. खुद नैथन लायन हंसने लगे कि क्या गजब का क्रिकेटर है ये. कोई डर ही नहीं कि विकेट चला जाए. फिर भी पंत रुके नहीं और नैथन लायन के एक ओवर में तीन चौके और एक छक्का जड़ दिया. यानी चार गेंदों पर 18 रन मार दिए. पता नहीं किस जल्दी में थे. इनकी इसी जल्दबाजी का फायदा उठाया नैथन लायन ने और लॉन्ग ऑन पर कैच आउट करवा दिया. 16 गेंदों पर 28 रनों की ये पारी 2-मिनट नूडल्स की तरह थी.

ऋषभ पंत पहली गेंद से फायर हो जाते हैं.
पंत ने आउट होकर टीम इंडिया की टेल को ऑस्ट्रेलिया के सामने एक्सपोज कर दिया. अश्विन आए और 5 रन बनाकर गए, फिर जल्दी रन बनाने के चक्कर में रहाणे भी नैथन लायन की गेंद पर स्वीप शॉप खेलने निकले और कैच आउट हो गए. तब तक रहाणे 70 रन बना चुके थे. इशांत शर्मा और मोहम्मद शमी अंडा बनाकर आउट हो गए. इंडिया की पारी के आखिरी चार विकेट 29 गेंदों में गिर गए और रन भी कुल चार बने, वो भी बाइज के. नैथन लायन ने इंडियन बल्लेबाजों को एक बार फिर अपनी फिरकी में फंसाया और 6 विकेट ले लिए. स्कोर था 307. 15 रन लीड के तो कुल हुआ 322. 323 का टारगेट मिला ऑस्ट्रेलिया को.
अब यहां ऑस्ट्रेलिया की सलामी जोड़ी मैदान पर थी. इशांत शर्मा के हाथ में गेंद थी. पहले ओवर की दूसरी गेंद और इशांत ने एलबीडब्ल्यू की अपील की. अंपायर ने उंगली उठा दी. कप्तान कोहली खुशी से झूम पड़े. ऑस्ट्रेलिया के लिए ये बड़ा झटका था. स्कोर 0-1 हो गया. मगर फिंच ने रिव्यू ले लिया. थर्ड अंपायर ने हर बार की तरह रिव्यू की शुरुआत इशांत के पैर से की. और ये क्या, यहां तो इशांत का पैर लाइन से बाहर था. बस हल्की सी ऐड़ी लाइन को छू रही थी. फिर तो आगे इस ये चेक करने की जरूरत ही नहीं पड़ी. क्योंकि ये नो बॉल थी. फील्डर्स वापस अपनी पॉजिशन्स पर पहुंच गए. पिछली पारी में इशांत की गेंद पर जीरो पर बोल्ड होने वाले फिंच की सांस में सांस आई.
मगर उसके थोड़ी देर बाद एक ऐसा मौका आया जब फिंच को भी समझ नहीं आया कि क्या करें. हुआ ये कि अश्विन की गेंद को फिंच ने पैड के सहारे डिफेंड करने की कोशिश की. गेंद पैड और ग्लव के बीच से निकल कर ऋषभ पंत के दस्तानों में चली गई. अंपायर ने उंगली उठा दी और पूरी टीम इंडिया खुशी में उछल पड़ी. फिंच कन्फ्यूज दिखे. वो नॉन स्ट्राइकर के पास गए और ये तय नहीं कर पाए कि रिव्यू लें या नहीं. आखिरकार, फिंच वापस चल दिए. फिंच वो भरोसा खो चुके थे क्योंकि पहले तो रन नहीं बन रहे, ऊपर से टीम के लिए एक रिव्यू खोने का डर भी था. मगर जब कमेंट्री बॉक्स पर बैठे माइकल कलार्क ने ये देखा तो वो गुस्साते दिखे. उन्होंने कहा- धरती पर कौन ही ऐसा प्लेयर होगा जो इस तरह वापस चल देगा, जब रिव्यू का ऑप्शन था और उसमें साफ तौर पर फिंच एक बार फिर से बचते दिख रहे थे. स्निकोमीटर में गेंद ग्लव से लगती नहीं दिख रही थी. इसी को कहते हैं- दूध का जला, कोल्ड ड्रिंक भी फूंक-फूंक कर पीता है.

रोहित शर्मा ने उस्मान ख़्वाजा का जबरदस्त कैच पकड़ कर इंडिया को जीत के करीब कर दिया है.
ऑस्ट्रेलिया का पहला विकेट 28 के स्कोर पर गिर गया. उसके बाद मारकस हैरिस को मोहम्मद शमी ने 26 रन पर निपटा दिया. मगर इंडिया की झोली में उस्मान ख्वाजा की विकेट जल्दी ही गिर गई. अश्विन की गेंद को आगे बढ़कर खेलने की कोशिश में ख्वाजा रोहित शर्मा के हाथों शानदार कैच दे बैठे. रोहित शर्मा ने यहां ये कैच लेकर मानों अपने रन न बना पाने के गिल्ट को कम किया है. 60 के स्कोर पर 3 विकेट खोने के बाद ऑस्ट्रेलिया का चौथा विकेट 84 के स्कोर पर गिरा. हैंड्सकॉम्ब ने शमी की गेंद को ड्राइव करने के चक्कर में पुजारा को कैच थमा दिया.
तमाम रिकॉर्ड्स और इतिहास ये बताता है कि ऑस्ट्रेलिया ये मैच नहीं जीत पाएगी. साथ ही 1947 में हुए पहले टेस्ट से लेकर 2018 तक इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में सीरीज का पहला टेस्ट कभी नहीं जीता है. 71 सालों में ये पहली बार होगा. इंडिया ने अभी तक 11 ओपनिंग टेस्ट मैचों में 9 हारे हैं और दो ड्रॉ किए हैं. तो हर लिहाज से एडिलेड में मिलती दिख रही ये जीत खास होने वाली है. क्रेडिट कप्तान कोहली को जाएगा.



















