शरबत गुल. हरी आंखों वाली ख्वातीन अब इंडिया आएगी. उनका बेंगलुरु में फ्री में इलाज किया जाएगा. ये वही औरत हैं जो 'अफगान गर्ल' के नाम से पहचानी गईं. पेशावर के एक शरणार्थी शिविर में नेशनल ज्योग्राफिक के फोटोग्राफर स्टीव मकरी ने इनका फोटो खींचा था. उस वक्त ये छोटी बच्ची थीं. और ये फोटो 1985 में मैगजीन में छपी थी. और फेमस हो गईं. बाद में उनपर डॉक्यूमेंट्री भी बनी. लोग उनको ‘अफगान वॉर की मोनालीसा’ कहने लगे. अफगान गर्ल ने 30 साल शरणार्थी के तौर पर पाकिस्तान में गुज़ारे. फर्जी शिनाख्ती कार्ड बनवाने के इल्जाम में पकड़ी गईं और कोर्ट ने 15 दिन की कैद सुना दी. साथ ही एक लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भी. लोगों ने इस सजा पर हैरानी जताई. कहा गया कि जिसे पूरी दुनिया जानती है उसको पाकिस्तान में फर्जी पहचान पत्र बनवाने के इल्जाम में पकड़ा गया. जबकि जिन लोगों ने वो पहचान पटर बनाकर दिया उनका कुछ पता नहीं. कुछ ने लोगों ने तंज किया था कि अगर शरबत गुल भी आतंकी होती तो पाकिस्तान बड़े आराम से रखता. हालांकि पाकिस्तान का एक पक्ष वो भी था जो कह रहे थे कि कानून तोड़ना तो जुर्म है उसकी सजा तो मिलनी ही थी. शरबत गुल को पाकिस्तान में सजा काटने के बाद देश निकाला कर दिया. अब वो अफगानिस्तान में हैं.
शरबत गुल सेहत से जुड़ी कुछ परेशानियों के अलावा हैपेटाइटिस सी से पीड़ित हैं. इंडियन गवर्नमेंट उनके मुफ्त इलाज की पेशकश की है, जिसपर इंडिया में अफगानिस्तान के राजदूत शादिया अब्दाली ने आभार जताया है.

अफगानिस्तान के राजदूत शादिया अब्दाली ने ट्वीट किया, 'आइकॉनिक अफगान शरबत गुला मुफ्त में इलाज के लिए जल्द ही भारत में होंगी. सच्चा दोस्त होने के लिए भारत को शुक्रिया!' शरबत गुल तीन बच्चों की मां हैं. उनका बेंगलुरु के एक हॉस्पिटल में इलाज हो सकता है. शरबत गुल की तस्वीर अफगानिस्तान में शरणार्थी संकट का सिंबल बन गई थी.
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