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एक्टर बनना है या स्टार? बंबई जाने से पहले सोच लो

पढ़िए HERO बनने के लिए बंबई जाने वालों के चकाचौंध से सने, उधड़े कुछ किस्से.

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बॉम्बे टॉकीज फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी
बॉलीवुड. फिल्म इंडस्ट्री. टॉप मॉडल. सेलेब्रिटी, रेड कारपेट. पेज 3. पढ़कर दिमाग में क्या घूम जाता है. खूबसूरत हीरोइनें, चमक-धमक, हीरो की दमदार एंट्री. लेकिन ये तो वो है जो दिखता है. जो नहीं दिख पाता, असली कहानी वहीं छिपी होती है.
मुंबई में रहने वाली एक लड़की. मॉडल बनना चाहती थी. चंडीगढ़ के एक फेमस कास्टिंग डायरेक्टर दर्शन औलख का नंबर मिला. Whatsapp पर वो उनसे बातें करने लगी. दर्शन Whatsapp पर उसको मॉडलिंग के अच्छे मौकों के बारे में बता रहे थे. अचानक उन्होंने लड़की से उसकी न्यूड फ़ोटोज़ मांगी. लड़की चौंक गई. उसे कुछ अजीब लगा. डाउट क्लियर करने के लिए उसने दर्शन की फेसबुक प्रोफाइल पर मेसेज किया. पूछा, 'जो आपकी Whatsapp प्रोफाइल से मुझसे बात कर रहा है, क्या वो आप ही हैं?' दर्शन चौंक गए. बोले, नहीं, मैं तो तुमसे यहां फेसबुक पर बात कर रहा हूं. लड़की ने तुरंत उनको अपनी Whatsapp चैट का स्क्रीनशॉट भेजा. दर्शन बोले, ये तो कोई और है. जो मेरा नाम, मेरी फोटो और मेरी पहचान यूज़ कर रहा है. फिर दर्शन ने चंडीगढ़ पुलिस में 'आइडेंटिटी थेफ़्ट' की कंप्लेंट की. 
पुलिस ने साइबर सेल से मदद ली. साइबर सेल ने जांच की. हरप्रीत बावा नाम के एक आदमी को पकड़ा. उसके पास 2 मोबाइल मिले. फिर जो पता चला वो बड़ा ही अजीब था. मोबाइल में हज़ारों लड़कियों के न्यूड फ़ोटोज़ मिले. हरप्रीत ने बताया  कि वो दर्शन के नाम से नई मॉडल्स से चैट करता था. क्योंकि दर्शन एक फेमस कास्टिंग डायरेक्टर हैं. डिस्प्ले फोटो में हरप्रीत कभी सलमान खान, कभी दर्शन औलख की फोटो लगाता था.
लड़कियां उसका भरोसा कर लेती थीं. फिर वो उनसे उनके न्यूड फोटोज मांगता था. कहता था कि एक 'बोल्ड' फिल्म के लिए 'बोल्ड' हीरोइन की जरूरत है. फिर उनको हीरोइन बनाने की बात करता था. लड़कियां फोटोज भेज देती थी. उसके बाद वो उन लड़कियों को ब्लैकमेल करता था. सेक्शुअली हैरेस करता था. हैरेसमेंट वाले मामले में अभी तक कोई भी लड़की सामने नहीं आई है. जब जांच में हरप्रीत से पूछताछ की गई तो उसने कहा कि ये सब झूठा इल्ज़ाम है. उसको इस मामले में कुछ नहीं मालूम. उसको झूठ बोल कर फंसाया जा रहा है.
ये इस तरह का पहला मामला नहीं है. पहले दिमाग में ख्याल आया कि क्या बड़ी बात है? इस तरह की चीज़ें आए दिन होती रहती हैं. लेकिन जब साथियों से डिस्कशन हुआ, तो ये ख्याल आया कि 'इस तरह की चीज़ें आए दिन होती रहती हैं' ये अपने आप में कितनी बड़ी बात है? बंबई फिलिम में काम करने के लिए तमाम लोग हर साल, हर दिन जाते हैं. कुछ टिक जाते हैं और बहुत सारे लौट आते हैं. हम आपको यहां कुछ किस्से पढ़ाने जा रहे हैं. मायानगरी बंबई के.



चकाचौंध से उधड़े किस्से

1.

हमारे घर के पास रामजी धोबी एक गुमटी में अपनी दुकान लगाते थे. घर में बीवी थी. 4 बच्चे थे. मोहल्ले के सब लोग रामजी से ही कपड़े प्रेस करवाते थे. एक दिन अचानक ही रामजी गायब हो गए. एक दिन, दो दिन, तीन दिन. चौथे दिन लोगों को चिंता हुई. कहीं कुछ हो तो नहीं गया. कुछ अंकल लोग गए उनके घर हाल-चाल लेने. देखा तो दो लड़के बाहर खेल रहे हैं. एक सो रहा है और एक को रामजी की बीवी पीट रही हैं. रामजी कहीं नहीं थे. लोगों ने पूछा कहां गए. बीवी ने बताया, बंबई. फिलिम में हीरो बन्ने. करीब 10 महीने बाद रामजी वापस आ गए. बोले बंबई एकदमे घटिया जगह है. न रहने का सुख है ना खाने-पीने का ढंग. और लोग तो बहुतए नीच. इसके आगे कोई कुछ भी पूछता, रामजी टाल देते. अब कपड़ा प्रेस करने की एक और दुकान खोल लिए हैं. ज़िंदगी फिर से पुराने ढर्रे पर चल दी है.
Photo: AP
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2.

जनरल स्टोर वाले गुप्ता जी की बेटी शिखा 'भागकर' दिल्ली चली गई थी. उसको मॉडलिंग करनी थी. क्योंकि स्कूल में किसी ने उसको कह दिया था. वो ऐश्वर्या राय जैसी लगती है. अब शिखा को ऐश्वर्या ही बनना था. घर वालों ने पूरी बात छुपा ली. किसी को भनक भी नहीं लगने दी. कि शिखा भाग कर दिल्ली चली गई है. खबर फ़ैल जाती तो शिखा की शादी कैसे हो पाती. गुप्ता जी ग्राहकों से चिढ़ कर बोलने लगे थे. बात-बात पर खिसिया जाते थे. एक दिन दुकान में काम करने वाला पप्पू देर से काम पर आया. गुप्ता जी ने उसको बलभर मारा. इतना मारा कि पप्पू मुंह से खून फेंक दिया. गुस्से में पप्पू ने नौकरी छोड़ दी. उसके बाद पूरे मोहल्ले में ये बात फैला दी. गुप्ता जी की लड़की भाग गई है. गुप्ता जी अब दुकान पर कम बैठते थे. एक दिन गुप्ता जी के पास फ़ोन आया, संदिग्ध हालत में शिखा की मौत हो गई है. दो दिनों बाद टीवी में खबर चली, इलाहबाद से मॉडलिंग के लिए दिल्ली आई एक लड़की की न्यूड फ़ोटोज़ इंटरनेट पर वायरल हो गई थीं. लड़की ने खुदखुशी कर ली. एक हफ्ते बाद लोकल न्यूज़पेपर में खबर छपी, 'बेटी की मौत से दुखी जनरल स्टोर मालिक ने की खुदखुशी. पूरा परिवार सदमे में.'


3.

मेरा एक दोस्त एक्टर है. असिस्टेंट डायरेक्टर भी है. मुंबई में रहता है. अच्छा कमाता-खाता है. जब वो मुंबई में नया था, लगभग हर रोज़ ऑडिशन देने जाता है. पर कई बार पहुंचते ही वहां पर पहला सवाल होता था, सेक्शुअल ओरिएंटेशन क्या है तुम्हारा. बिना किसी इंट्रोडक्शन के. बातें शुरू ही इस बात से होती थीं. 'विल यू डू मी अ फेवर?' कहता है, इंडस्ट्री में कास्टिंग के नाम से फंसाने वाले 60 परसेंट से ज्यादा फ्रॉड है.
 
Photo: Reuters
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4.

त्रिपाठी जी की लड़की घर पर सबसे लड़ कर मुंबई पहुंची थी. घर वालों ने कह दिया था, वो मर गई उनके लिए. कई दिनों तक वो तकिया भर-भर के रोई. फिर लगा, रोने थोड़ी आई है बंबई.  अपना सपना पूरा करना है. एक एजेंट मिल गया कल्याण वाली फ़ास्ट लोकल में. एक ऑडिशन का जुगाड़ हुआ. एजेंट ने कहा, ऑडिशन के लिए बहुत सारे पैसे लगेंगे. लड़की शहर में नई थी. इस फील्ड में नई थी. उंगली में सोने की अंगूठी थी. जो पापा ने बारहवीं पास होने के बाद दी थी. बेच दी. ऑडिशन दिया. सेलेक्ट कर ली गई. एजेंट ने कहा कि उसको लीड रोल दिया जाएगा. लेकिन इसके लिए उसको डायरेक्टर को 'खुश' करना पड़ेगा. लड़की घबरा गई. भन्नाते हुए निकल गयी हॉल से बाहर. दो दिनों तक इधर-उधर भटकती रही.  खाने के पैसे भी नहीं होते. फिर एक होटल में रिसेप्शनिस्ट बन गई. अब पैसे इकट्ठे करके एक एक्टिंग स्कूल में एडमिशन ले लिया है.


तो तुमको भी इश्टार  बनना है? 

ये जो इत्ते  सारे किस्से हैं, वो कभी ख़त्म नहीं होते. छोटे-छोटे शहरों से ना जाने कितने लोग हर रोज़ मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद या चेन्नई पहुंचते हैं. एक्टर बनना है, मॉडलिंग करनी है. सुपरस्टार बनना है. कुछ लोगों को अच्छे मौके मिल जाते हैं. कुछ फंस जाते हैं.
'गौतम किशनचंदानी' एक दशक से ज्यादा समय से कास्टिंग डायरेक्टर हैं. उन्होंने ब्लैक फ्राइडे, नो स्मोकिंग, गुलाल, देव डी, वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई, नो वन किल्ड और घनचक्कर जैसी फिल्मों में कास्टिंग की है. फिलहाल वो अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स को डायरेक्ट करने में बिजी हैं. वे बताते हैं कि टैलेंट और इंटेलिजेंस की हमेशा ही कद्र होती है. इसीलिए ट्रेंड और टैलेंटेड लोगों के साथ इस तरह की बदसलूकी अक्सर नहीं होती. उनसे कोई 'फेवर' और 'कॉम्प्रोमाईज़' जैसी बातें नहीं करेगा.
Gautam Kiashanchandani Photo: Facebook
Gautam Kiashanchandani
Photo: Facebook

जैसे जैसे इंडस्ट्री में आने वालों का नंबर बढ़ रहा है. उनको भीतर ले जाने का दावा करने वाले फ्रॉड लोगों की दुकानें भी गर्म हो गई हैं. हर रोज़ जो हज़ारों लोग मुंबई आते हैं. उनके सपनों और उनके पैसे पर जीने वाले गिद्ध भी बहुत हैं यहां. तैयार बैठे रहते हैं कि कब किसको फंसा ले. और उसको सपने पूरे करने का लालच दे कर कायदे से बेवक़ूफ़ बनाएं. फंसाया उन्हीं लोगों को जाता है जिनको एक्टिंग या इस फील्ड के बारे में कुछ भी पता नहीं होता.
गौतम कहते हैं. जो लोग मुंबई आते हैं हीरो-हीरोइन बनने. उनमें से ज़्यादातर, एक्टर नहीं बनना चाहते, वो स्टार बनना चाहते हैं. जो चमक, शोहरत, बंगला, गाड़ी फिल्मों में दिखता है. वैसा. वो मेहनत नहीं दिख रही होती, जिसके बल पर लोगों ने ये सब चीज़ें खड़ी की होती हैं. उनकी कोई भी तैयारी नहीं होती है. कोई ट्रेनिंग नहीं होती है. मुंबई भरी पड़ी है ऐसे लोगों से. जो अपनी जॉब, अपना परिवार, अपना सब छोड़ कर मॉडल या एक्टर बनने आए हैं. कई बार सिर्फ इसलिए कि दोस्तों ने कह दिया, तुम बहुत सुन्दर हो. या हैंडसम हो. तुमको तो फिल्मों में होना चाहिए था. 
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अगर सच में एक्टर बनना है तो फिल्मों की, इंडस्ट्री की बेसिक समझ होनी चाहिए. अगर कहीं मैथ्स पढ़ाने जा रहे हो तो बेसिक मैथ्स आना तो पहली शर्त है ना.  IMDB पर फिल्मों के डिटेल्स के साथ कास्टिंग टीम की डिटेल भी होती है. उस टीम से फेसबुक या ट्विटर पर कांटेक्ट किया जा सकता है. आज की डेट में इंटरनेट पर हर डिटेल मौजूद है. जिस कास्टिंग एजेंसी को अच्छे रिव्यू मिले हों. या कई लोगों ने रिकमेंड किया हो. उनसे कांटेक्ट करके अपना पोर्टफोलियो बनवा लो.
बहुत सारी ऐसी कास्टिंग एजेंसियां हैं, जो अपनी मैगज़ीनें निकालती हैं. उनमें नए मॉडल्स और एक्टर्स की प्रोफाइल होती है. उनकी फोटोज होती हैं. इन मैगजीनों को फिल्मों और ऐड कंपनी के लोगों को भेजा जाता है. इन मैगजीनों और ऑनलाइन डाटाबेस में देखा जाता है. फिल्म, टीवी सीरियल या ऐड फिल्मों में काम करने के लिए जब ऑडिशन होते हैं. वो लोग कास्टिंग एजेंसियों को ही कांटेक्ट करते हैं. कास्टिंग एजेंसियों के पास अपना डेटाबेस होता है. हर उम्र, फिजीक और शक्ल सूरत के एक्टरों की जानकारी होती है. जैसा रोल होता है, उसी हिसाब से एक्टरों को ऑडिशन के लिए बुला लिया जाता है.
अगर चाहते हो एक्टर बनना. तो इन टटपुंजिओं के चक्कर में न पड़ो. एक्टिंग वाले काम को सीरियसली लो. सिर्फ इसलिए कि हम फैन हैं, हम भी इस्टार  बन जाएंगे. ऐसा नहीं होता. किसी एक चीज़ में खुद को बहुत ट्रेन करना पड़ेगा. फिल्मों को पढ़ाई की तरह देखो. समझो. थिएटर ज्वाइन कर लो. कोई एक्टिंग वर्कशॉप करो. डांस सीखो. गाना सीखो. अगर कॉमेडी अच्छी कर लेते हो तो अपनी कला को निखारो. बस जो भी करो, तैयारी बहुत अच्छी रखो. जब किसी के पास टैलेंट है, क्रिएटिविटी है, उसकी हमेशा इज्ज़त की जाएगी.
तो अगर फिल्मों में काम करना है. पहले देख लो कि उत्ती  मेहनत कर पाओगे या नहीं. अगर घिस के रात दिन काम करने की हिम्मत है, तभी जाओ. और हां, अगर कोई कास्टिंग एजेंट न्यूड फ़ोटोज़ मांगे तो समझ जाओ कि वो पक्का फ्रॉड है. क्योंकि जो लोग वाकई में तुमको अच्छा काम देना चाहेंगे, उनको तुम्हारी एक्टिंग और टैलेंट से मतलब होगा. तुम्हारी न्यूड फ़ोटो से नहीं.
और अगर लगे कि ये फील्ड तुम्हारे लिए नहीं है. तो घबराना मत. यही एक फील्ड नहीं है दुनिया में. ये नहीं तो कुछ और सही, कुछ और नहीं तो कुछ और. रास्ता निकल ही आता है. लेकिन प्लीज़, किसी एक धोखे की वजह से खुद को ख़त्म मत कर लेना. क्योंकि इसके बाद भी ज़िन्दगी में बहुत कुछ अच्छा होने वाला है. बस ज़रूरी है कि वो देखने के लिए तुम सही-सलामत रहो, जिंदा रहो.

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