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ज़ीका - वो वायरस जिसे डेंगू का मौसेरा भाई बताया जाता है

ये वही वायरस है जिसने ब्राज़ील में बच्चों की ज़िंदगियां तबाह की थीं.

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साल 2015 में ज़ीका वायरस की वजह से दक्षिण अमेरिकी देशों में खास तरह के बच्चे पैदा होने से हड़कंप मच गया था.
भारत में Zika virus के पहले तीन केस कंफर्म हो गए हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की वेबसाइट के मुताबिक भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात की तस्दीक की है कि अहमदाबाद के बापूनगर इलाके में तीन लोग ज़ीका वायरस से पीड़ित हैं. इन लोगों के सैम्पल इस साल की जनवरी में अहमदाबाद मेडिकल कॉलेज और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजे गए थे.
ज़ीका वही वायरस है जिसके चलते 2015 से दक्षिण अमरीका (खासकर ब्राज़ील) में ऐसे बच्चे पैदा हो रहे हैं जिनके सिर आम बच्चों से काफी छोटे होते हैं. इन बच्चों को माइक्रोसिफैली नाम की बीमारी है. जब इन बच्चों की पहली तस्वीरें दुनिया के सामने आई थीं, पूरी दुनिया सकते में रह गई थी. काफी पड़ताल के बाद सामने आया था कि माइक्रोसिफैली ज़ीका वायरस की वजह से फैलती है. इसलिए भारत में ज़ीका के केस कंफर्म होना परेशान करने वाली बात है. तो जानिए ज़ीका वायरस है क्या बला और हमें क्या सावधानी बरतनी चाहिए.
 
जीका फैलाने वाले एडीज़ मच्छर (फोटोःAP)
ज़ीका फैलाने वाले एडीज़ मच्छर (फोटोःAP)

ज़ीका नाम कैसे पड़ा?
ज़ीका की खोज 1947 में युगांडा के ज़ीका जंगलों में हुई थी. इसी लिए वायरस का नाम ज़ीका वायरस है. वैज्ञानिक वहां के बंदरों में यलो फीवर पर रिसर्च कर रहे थे तब ये वायरस पहचान में आया था. इंसानों में इसके पहले केस 1952 में युगांडा और तंज़ानिया में मिले थे.
इस वायरस के संपर्क में आने पर उसी तरह के लक्षण नज़र आते हैं जैसे डेंगू होने पर होते हैं. मसलन बुखार, सरदर्द, आंखों में जलन और बदन दर्द. इसीलिए इसे डेंगू का कज़िन भी कहा जाता है. 2015 में ब्राज़ील में सामने आए माइक्रोसिफैली के मामलों से पहले वैज्ञानिक ये नहीं जानते थे कि ज़ीका से माइक्रोसिफैली भी हो सकती है.
किसी बच्चे को माइक्रोसिफैली होने की संभावना तब होती है जब कोई प्रेगनेंट औरत ज़ीका की चपेट में आए. माइक्रोसिफैली के अलावा ज़ीका से गुलियन बार सिंड्रोम और दूसरी न्योरोलॉजिकल बीमारियां भी हो सकती हैं.
माइक्रोसिफैली से पीड़ित एक बच्चा
माइक्रोसिफैली से पीड़ित एक बच्चा

कैसे फैलता है?
ज़ीका डेंगू का मौसेरा भाई है तो फैलता भी उसी तरह है जैसे डेंगू फैलता है. माने एडीज़ मच्छर के काटने से. यही मच्छर चिकन गुनिया भी फैलाता है. ये मच्छर नम और गर्म जगहों में पाया जाता है. इसलिए इक्वेटर के पास के इलाकों में इसके मामले ज़्यादा पाए जाते हैं. इक्वेटर भारत से नहीं गुज़रती, लेकिन यहां भी इस मच्छर के पैदा होने और परिवार बढ़ाने के लिए पर्याप्त गर्मी और नमी है.
एक प्रेगनेंट मां से ज़ीका उसके बच्चे तक पहुंच सकता है. इसके अलावा ज़ीका सेक्स के दौरान भी एक पार्टनर से दूसरे तक पहुंच सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि इसका मतलब ये हुआ कि ज़ीका ब्लड ट्रांसफ्यूज़न (एक व्यक्त का खून दूसरे को चढ़ाने से) से भी फैल सकता है.
कैसे मालूम करें कि ज़ीका से बीमार हैं ?
ज़ीका वायरस का पता खून, पेशाब या फिर वीर्य की जांच से चल जाता है.
इलाज क्या है ?
आमतौर पर ज़ीका के लिए किसी खास इलाज की ज़रूरत नहीं पड़ती. कुछ दिन अपना ध्यान रखने और आराम करने से अपने आप ठीक हो जाता है. इसलिए ज़ीका को लेकर उतना हो-हल्ला कभी रहा नहीं. लेकिन माइक्रोसिफैली से ज़ीका का संबंध सामने आने के बाद ज़ीका को लेकर डर फैला है. कोशिश की जा रही है कि ज़ीका के लिए एक टीका बनाया जाए. लेकिन अब तक इसमें कामयाबी नहीं मिली है और अभी इसमें सालों लगने की संभावना है. कुछ समय पहले खबर आई थी कि भारत में ज़ीका का एक टीका बना लिया गया है. लेकिन वो भी फिलहाल बाज़ार में उपलब्ध नहीं है. तो फिलहाल ये समझिए कि रोकथाम ही इलाज है.
तो बचें कैसे?
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भारत में कुछ लोगों में ज़ीका को लेकर पैसिव इम्यूनिटी पाई जाती है. माने इनका शरीर इस वायरस के हमले को झेलने के लिए तैयार है. तो ये लोग ज़ीका से बचे हुए हैं. बाकी लोगों के पास ज़ीका से बचने का सबसे बढ़िया तरीका यही है कि मच्छरों की पैदावार को रोका जाए. पानी जमा न होने दिया जाए जिसमें मच्छर अंडे देते हैं. मच्छरों वाली जगह पर रहते हों तो हल्के रंग के कपड़े पहनें, पूरी बांह वाले. किसी ऐसे देश की यात्रा करके आए हों जहां ज़ीका के मामले सामने आए हों तो क अपने पार्टनर से छह महीनों तक बिना प्रोटेक्शन सेक्शुअल संबंध न बनाएं.


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