
शहीद जवानों में बिहार के सीआरपीएफ के जवान पिंटू सिंह भी थे.
ये 1 तारीख की बात थी. पूरे देश का ध्यान विंग कमांडर अभिनंदन की ही तरफ था. लेकिन 2 तारीख को जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए जवानों का अंतिम संस्कार होना था. उनके शवों को ताबूत में रखकर उनके परिवार वालों तक पहुंचाना था. जब सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान अपने साथियों के शवों को गाड़ियों में रख रह थे, तो उनकी आंखों में आंसू थे. वो रो रहे थे. देखिए उसका वीडियो जिसे जम्मू-कश्मीर के पत्रकार रिफ़त अब्दुल्ला ने ट्वीट किया है.
ये उन जवानों के आंसू हैं, जो आतंकियों से मुठभेड़ करते हैं. लेकिन आंसू भावुकता के हैं, ये आंसू इंसानियत के हैं. क्योंकि इन जवानों ने अपने साथी खोए हैं. ऐसी मुठभेड़ में, जो कश्मीर की नियति बन गई है. पहले पुलवामा में आतंकी हमला हुआ, तो 40 जवान शहीद हुए. उस वक्त को पलटवार का भी मौका नहीं था. अब मुठभेड़ हुई तो चार जवान शहीद हुए. पलटवार भी हुआ, दो आतंकी मारे भी गए. लेकिन जिन जवानों ने अपने चार साथी खो दिए, उनकी आंखों के आंसुओं को तो सूखने में वक्त लगेगा ही लगेगा.
विंग कमांडर अभिनंदन से पहले 1971 में पाकिस्तान में फंसे जेएल भार्गव की कहानी






















