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जज साहब ने फैसला सुनाते वक्त की थी टिप्पणी, रिटायरमेंट के बाद पुलिस कमिश्नर ने केस ठोक दिया

Gurugram News: पूर्व कमिश्नर कृष्ण कुमार राव के वकील प्रवेश यादव ने बताया कि जस्टिस अमित सहरावत ने एक जमानत अर्जी आदेश में तत्कालीन कमिश्नर के बारे में टिप्पणी की थी.

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पूर्व पुलिस कमीश्नर कृष्ण कुमार राव और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज अमित सहरावत (फोटो- igroh.haryanapolice/hisar.dcourts.gov)

गुरुग्राम के पूर्व पुलिस कमिश्नर कृष्ण कुमार राव ने एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज अमित सहरावत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है (Defamation Suit Against Judge). जज से हर्जाने के तौर पर एक करोड़ रुपये की मांग की गई है. मामला 2021 के एक केस की सुनवाई से जुड़ा है. जज अमित सहरावत ने एक न्यायिक आदेश में पूर्व कमिश्नर के खिलाफ टिप्पणी कर दी थी.

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सिविल कोर्ट में दायर इस मामले को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. अगली सुनवाई 21 नवंबर को होने वाली है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व कमिश्नर कृष्ण कुमार राव के वकील प्रवेश यादव ने बताया कि जस्टिस अमित सहरावत ने एक जमानत अर्जी आदेश में तत्कालीन कमिश्नर के बारे में टिप्पणी की थी. खबर है कि पूर्व कमिश्नर ने आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती भी दी थी. तब अदालत ने आदेश से उन टिप्पणियों को हटाने का आदेश दिया था लेकिन सेशन कोर्ट का आदेश सार्वजनिक हो गया जिससे पूर्व कमिश्नर की की छवि प्रभावित हुई. इसी वजह से मुकदमा दायर किया गया.

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क्या हुआ था?

मामला 4 अगस्त, 2021 का है. गैंगस्टर विकास लगरपुरिया के लोगों ने एक निजी कंपनी के फ्लैट में घुसकर करोड़ों रुपये चोरी किए थे. मुख्य आरोपी डॉ. सुचेंद्र जैन नवल ने अपने बयान में आरोप लगाया था कि उन्होंने मामले को रफा-दफा करने के लिए तत्कालीन गुड़गांव पुलिस डीसीपी (क्राइम) धीरज सेतिया को रिश्वत दी थी.

मामला कोर्ट पहुंचा. फरवरी 2022 में धीरज सेतिया को जमानत देने से इनकार करने वाले आदेश में कहा गया,

4 अक्टूबर 2021 को गैंगस्टर ने 2.5 करोड़ रुपये से भरे बैग के साथ डीसीपी (क्राइम) के ऑफिस का दौरा किया और बगल के ऑफिस वाले तत्कालीन आयुक्त कृष्ण कुमार राव को इसकी जानकारी नहीं थी. वो क्या कर रहे थे. सरकार ने किस उद्देश्य से आयुक्त को वहां तैनात किया था.

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आदेश में धीरज सेतिया को डीसीपी (क्राइम) का अतिरिक्त प्रभार सौंपने के कृष्ण कुमार राव के आदेश पर भी सवाल उठाया गया था.

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मानहानि के मुकदमे में पूर्व कमिश्नर ने तर्क दिया कि जज की टिप्पणी अनुमान पर आधारित थी और इसका कोई न्यायिक आधार नहीं था. उन्होंने कहा कि वो टिप्पणियां व्यक्तिगत प्रकृति की थीं और जमानत आवेदन के फैसले से असंबंधित थीं.

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