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गुजरात: बूचड़खाना बंद करने के खिलाफ डाली थी याचिका, HC बोला- एक दो दिन ना खाओ

अहमदाबाद नगर निगम ने जैन पर्व पर्युषण के मौके पर कुछ दिन के लिए बूचड़खाने बंद करने का निर्णय लिया है.

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(प्रतीकात्मक तस्वीर: इंडिया टुडे)

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने त्योहारों पर बूचड़खाना (Slaughter House) बंद करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर कहा है कि 'लोग एक या दो दिन मांस खाने से बच सकते हैं'. अहमदाबाद नगर निगम ने जैन त्योहार 'पर्युषण' के मौके पर शहर के एकमात्र बूचड़खाने को बंद करने का फैसला किया था. इसी के खिलाफ बीते सोमवार 29 अगस्त को गुजरात की कुल हिंद जमीयत-अल कुरेश एक्शन कमेटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. 

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदाबाद नगर निगम की स्थायी समिति ने 18 अगस्त को पारित अपने एक प्रस्ताव में कहा था कि विभाग ने पर्युषण पर्व के मौके पर 24 और 31 अगस्त और इससे संबंधित त्योहारों के चलते 5 और 9 सितंबर को बूचड़खाने को बंद करने का फैसला लिया है.

इसे लेकर जब हाईकोर्ट में सुनवाई शुरु हुई तो जस्टिस संदीप भट्ट की पीठ ने शुरुआत में ही कहा कि आप एक या दो दिन खाने (मांस) से खुद को रोक सकते हैं. हालांकि, इसपर याचिकाकर्ता ने कहा कि ये मामला 'खुद को रोकने का नहीं' बल्कि मौलिक अधिकार का विषय है. उन्होंने कहा,

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'हम एक मिनट के लिए भी देश के नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित नहीं कर सकते हैं. अन्य मौकों पर भी बूचड़खानों को बंद किया गया था. इसलिए हम कोर्ट के सामने आए हैं कि अगर न्यायालय कोई उचित आदेश पारित करता है, तो समय रहते इस प्रक्रिया को रोका जा सकता है.'

याचिकाकर्ता ने आगे कहा, 

'क्योंकि अहमदाबाद शहर में सिर्फ एक ही बूचड़खाना है और जैन त्योहार पर्युषण के मौके पर इसे बंद कर दिया गया था. इस संबंध में 23 अगस्त को अहमदाबाद नगर निगम के कमिश्नर के पास उचित तरीके से पक्ष रखा गया था.'

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गुजरात HC ने लगाई थी फटकार

रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता ने ये भी दलील दी कि अगर बूचड़खाने को चालू रखा जाता है, तो इससे किसी व्यक्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि बल्कि यह राष्ट्रीय पोषण संस्थान की गाइडलाइन के अनुरूप है, जिसमें कहा गया है कि लोगों को प्रोटीन-युक्त चीजें जरूर खानी चाहिए.

याचिकाकर्ता ने ये भी कहा कि खुद गुजरात हाईकोर्ट ने दिसंबर 2021 में कहा था कि अहमदाबाद नगर निगम को लोगों की खाने की आदतों को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

इस मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी. याचिकाकर्ता ने इस संबंध में कोर्ट के सामने और साक्ष्य पेश करने की बात कही है.

इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट ने दिसंबर 2021 वाले अपने आदेश में नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई थी और पूछा था कि क्या सरकार को लोगों के खान-पान से कोई समस्या है. अहमदाबाद नगर निगम ने स्ट्रीट पर नॉन-वेज फूड्स बेच रहे रेहड़ी-पटरियों को हटाने का आदेश दिया था.

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