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क्या पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ने वाले हैं?

1 मई से कमर्शियल गैस सिलेंडर, औद्योगिक डीजल, 5 किलोग्राम वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों को बेचे जाने वाले जेट ईंधन की कीमतों में वृद्धि की गई है.

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इस हफ्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल तक उछल गई थीं (फोटो क्रेडिट: Business Today))

पश्चिम एशिया सीजफायर की ‘छाया’ में फिलहाल राहत की सांसें ले रहा है. लेकिन युद्ध के प्रभावों ने ज्यादातर देशों को किसी न किसी तरह से दिक्कत में डाल रखा है. इस युद्ध की वजह से कच्चा तेल महंगा हुआ और आम लोगों की जरूरत के कई सामान महंगे हो गए. भारत समेत कई देश इस दिक्कत से जूझ रहे हैं. अब खबर आई है कि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं.

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टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अगले कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से इनकार नहीं किया जा सकता है. आगे कहा गया है कि इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद रिटेल मार्केट यानी पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले तेल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं. चार साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिससे तेल कंपनियों का नुकसान बढ़ रहा है. ऐसे में अगर वे पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाती हैं तो महंगाई और सताएगी.

हालांकि, 1 मई की सुबह इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने एक बयान जारी कर कहा है कि इंटरनेशनल मार्केट में वृद्धि के बावजूद भारत की सरकारी तेल और गैस कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतों के साथ-साथ घरेलू एलपीजी की दरों में इजाफा नहीं कर रही हैं. हालांकि कंपनियों ने 1 मई से कमर्शियल गैस सिलेंडर, औद्योगिक डीजल, 5 किलोग्राम वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों को बेचे जाने वाले जेट ईंधन की कीमतों में वृद्धि की है.

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कच्चा तेल 4 साल में सबसे महंगा

इस हफ्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत चार साल के उच्चतम स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल तक उछल गई. हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई. फिर भी ये 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही. ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही नहीं होने दे रहा है. शांतिवार्ता फिलहाल ठप है. अमेरिका और ईरान के नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं. साफ है आने वाले दिन और मुश्किल भरे हो सकते हैं.

पिछले हफ्ते भारत सरकार के तेल मंत्रालय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इसमें मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में लगभग चार सालों से पेट्रोल की कीमतें स्थिर हैं. लेकिन इस कारण सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल बिक्री पर लगभग 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कीमतों में वृद्धि की फिलहाल कोई योजना नहीं है.

पर सवाल है, कब तक?

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