सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाल में गुजरात हाई कोर्ट के चार जजों के ट्रांसफर की सिफारिश की है. इनमें कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने से इनकार करने वाले जज का नाम भी शामिल है. लिस्ट में वो जज भी हैं, जिन्होंने एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ के मामले में खुद को केस से अलग कर लिया था. जजों के ट्रांसफर की ये सिफारिश 3 अगस्त को हुई थी. 10 अगस्त को ये सार्वजनिक हुआ. कॉलेजियम ने जजों के ट्रांसफर के प्रस्ताव को "न्याय प्रणाली में बेहतरी" के लिए बताया है.
राहुल गांधी की सजा पर रोक ना लगाने वाले गुजरात HC के जज का नाम अब किस लिस्ट में आया?
जज ने कहा था कि सजा पर रोक लगाने का कोई 'आधार' नहीं है.


बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस अल्पेश वाई कोगजे का इलाहाबाद हाई कोर्ट, जस्टिस गीता गोपी का मद्रास हाई कोर्ट, जस्टिस हेमंत एम प्रच्छक का पटना हाई कोर्ट और जस्टिस समीर जे दवे का राजस्थान हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने की सिफारिश की गई है. इसके अलावा, कॉलेजियम ने कई और हाई कोर्ट से भी जजों के ट्रांसफर की सिफारिश की है.
जस्टिस हेमंत एम प्रच्छक वही हैं, जिन्होंने राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. अक्टूबर 2021 में वे गुजरात हाई कोर्ट के जज बने थे. 'मोदी सरनेम' मानहानि मामले में 7 जुलाई को गुजरात हाई कोर्ट ने राहुल की याचिका खारिज कर दी थी. 123 पन्ने के फैसले में जस्टिस हेमंत ने कहा था कि राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने का कोई 'आधार' नहीं है. उन्होंने यह भी कहा था कि सजा पर रोक न लगाने से राहुल के साथ कोई अन्याय नहीं होगा.
जस्टिस हेमंत ने अपने फैसले में कहा था कि याचिकाकर्ता (राहुल गांधी) के खिलाफ करीब 10 आपराधिक मामले लंबित हैं. निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाना कोई नियम नहीं है बल्कि अपवाद है. इसका इस्तेमाल दुर्लभ मामलों में होना चाहिए. जज ने कहा था कि लोअर कोर्ट का आदेश न्यायसंगत और सही है.
जस्टिस गोपी ने सुनवाई से खुद को अलग किया थाहालांकि पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया था. राहुल गांधी की सजा पर रोक लग गई. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सारी बातों को ध्यान में रखते हुए ट्रायल जज ने इस बात का कोई कारण नहीं दिया कि राहुल गांधी को अधिकतम सजा क्यों दी गई. दरअसल, सूरत की कोर्ट ने मानहानि केस में राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी सांसदी भी चली गई थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनकी सदस्यता बहाल हो गई.
ट्रांसफर सूची में जिस जस्टिस गीता गोपी का नाम है, उन्होंने भी राहुल गांधी के मामले में सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. उनके अलग होने के बाद ही ये मामला जस्टिस हेमंत प्रच्छक के पास गया था.
जस्टिस समीर दवे ने पिछले हफ्ते ही तीस्ता सीतलवाड़ के मामले में सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. तीस्ता ने 2002 दंगों से जुड़े मामले में कथित रूप से सबूत गढ़ने के आरोप में दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की थी. तीस्ता को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है. पिछले साल नवंबर में भी, जस्टिस दवे ने तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था.
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