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STD ट्रीटमेंट का बिल 7 लाख रुपये आया, गुस्साए पेशंट ने अस्पताल को 150 रुपये के नकली बम से 'हिला' डाला

शिवाजी इतना बड़ा बिल नहीं चुका पा रहा था. उसे ऐसा भी लग रहा था कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट उसका आर्थिक रूप से शोषण कर रहा है. इसके बाद उसने यह नकली बम वाला प्लान बनाया. प्लान के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर हॉस्पिटल के बाथरूम में 150 रुपये की एक टाइमर घड़ी रखी थी.

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पुणे में एक प्राइवेट हॉस्पिटल में फेक बम लगाने वाला शख्स गिरफ्तार. (फोटो- इंडिया टुडे)
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ओंकार वाबळे

महाराष्ट्र में पुणे एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने नागपुर से एक शख्स को गिरफ्तार किया है. उस पर आरोप है कि उसने पुणे के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में नकली बम लगाया था. आरोपी हॉस्पिटल के बताए मेडिकल खर्च को लेकर नाराज था. इसी वजह से उसने हॉस्पिटल मैनेजमेंट को ब्लैकमेल करने का प्लान बनाया.

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मामला हडपसर के उषा किरण हॉस्पिटल का है. नकली बम रखने वाले आरोपी की पहचान शिवाजी राठौड़ के तौर पर हुई है. इंडिया टुडे से जुड़े ओंकार वाबले की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवाजी उषा किरण हॉस्पिटल में सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STD) का इलाज कराने गया था. हॉस्पिटल ने इलाज का बिल बनाया, जो कथित तौर पर 7 लाख रुपये था.

शिवाजी इतना बड़ा बिल नहीं चुका पा रहा था. उसे ऐसा भी लग रहा था कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट उसका आर्थिक रूप से शोषण कर रहा है. इसके बाद उसने यह नकली बम वाला प्लान बनाया. प्लान के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर हॉस्पिटल के बाथरूम में 150 रुपये की एक टाइमर घड़ी रखी थी.

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बाथरूम में बम होने की सूचना हॉस्पिटल में फैल गई. इसके बाद मैनेजमेंट ने घटना की सूचना पुलिस को दी. पुलिस ने जांच के दौरान बाथरूम से 150 रुपये वाली घड़ी को बरामद किया. मामले की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि बिल न चुका पाने की वजह से आरोपी ने मैनेजमेंट को धमकाने का प्लान बनाया था.  

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, शिवाजी ने संदिग्ध घड़ी को उषा किरण हॉस्पिटल के एक बाथरूम में रखा था. उसने कथित तौर पर नकली बम बनाने के लिए 150 रुपये वाली एक टाइमर घड़ी खरीदी थी. हालांकि, उसने नकली जिलेटिन स्टिक्स (एक प्रकार का औद्योगिक विस्फोटक) पर कोई ग्लू नहीं लगाया था.

नकली बम के सेटअप को सही करने के लिए आरोपी ने हॉस्पिटल के पास स्थित एक स्टेशनरी शॉप से डबल-डेकर (दोनों ओर) टेप खरीदा था, जिसका पेमेंट UPI के जरिए किया था. पुलिस ने जांच के दौरान UPI ट्रांजैक्शन को भी खंगाला, जिसके जरिए आरोपी तक पहुंचा गया.

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पुलिस ने सर्विलांस के जरिए शिवाजी को ट्रैक करना शुरू किया, मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए पुणे ATS ने शिवाजी को नागपुर में ट्रैक किया और उसे वहीं से गिरफ्तार किया. घटना के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हॉस्पिटल से बरामद किया गया डिवाइस कोई बम नहीं था. बल्कि, हॉस्पिटल मैनेजमेंट को डराने के लिए बनाया गया था.

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