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गुजरात चुनाव का ऐलान करने से पहले ही के.चु.आ. की ट्रोलिंग हुई, लोगों ने 'कठपुतली' बता दिया!

कांग्रेस ने चुनाव आयोग को निशाने पर लिया है.

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कांग्रेस ने इलेक्शन कमीशन को निशाने पर लिया.

14 अक्टूबर को केंद्रीय चुनाव आयोग (Election Commission) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. लोगों को अंदाजा था कि इस कॉन्फ्रेंस में इलेक्शन कमीशन गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनावों का ऐलान करेगा लेकिन इलेक्शन कमीशन ने केवल हिमाचल प्रदेश के चुनावों का ही ऐलान किया. इसके बाद तरह-तरह के कयास लगाए गए. कुछ दिन बाद प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात में रैलियां कर एक के बाद एक कई घोषणाएं कीं. अब गुरुवार (3 नवंबर) दोपहर को इलेक्शन कमीशन ने गुजरात चुनावों का ऐलान कर दिया है.

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गुजरात में चुनाव दो चरणों में होंगे. पहले चरण की वोटिंग 1 दिसंबर को और दूसरे चरण की वोटिंग 5 दिसंबर को होगी. चुनावी नतीजे 8 दिसंबर को आएंगे. अब इसे लेकर लोगों ने इलेक्शन कमीशन को निशाने पर लिया है. लोगों ने कहा कि गुजरात में पीएम मोदी की घोषणाएं पूरा करने के बाद चुनाव आयोग चुनावों की घोषणा कर रहा है. किसी ने आयोग को कठपुतली बता दिया. कांग्रेस ने लिखा कि भारत निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त संस्थान है. ये निष्पक्ष चुनाव कराता है.' साथ में इमोजी बनाई. देखिए ट्वीट...

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संतोष गुप्ता नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘एक देश एक चुनाव" पर सबसे पहले फुदक कर भांगड़ा करने वाले चुनाव आयोग से आज पूछा जाना चाहिए कि गुजरात और हिमाचल का चुनाव वो साथ क्यों नहीं करा पाया?’

आरजेडी पार्टी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, 

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‘प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के गुजरात में ऐन चुनावों से पहले नई घोषणाएं, शिलान्यास और उद्घाटन करने संबंधित सभी कार्यक्रम समाप्त हो गए हैं. दूसरे राज्यों के प्रॉजेक्ट्स जबरन गुजरात लाए जा चुके हैं. इसलिए अब चाहे तो चुनाव आयोग गुजरात चुनाव का ऐलान कर सकता है.’

एक ने लिखा कि देश को टी एन शेषन साहब जैसे चुनाव आयोग की जरूरत है.'

वहीं कुछ एक लोगों ने चुनाव आयोग का सपोर्ट भी किया. एक यूजर ने लिखा कि कांग्रेस के लोग गुजरात के चुनाव परिणाम के बाद क्या बोलेंगे? ये सोच सोचकर हम परेशान हो रहे थे लेकिन कांग्रेस के ही लोगों ने शुरुआती बहानेबाजी चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर उसका शुभारंभ कर दिया है जो परिणाम आने के बाद EVM पर समाप्त होने वाला है.'

एक ने लिखा कि चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वालों को इन तस्वीरों को देखना चाहिए. हिमाचल में चुनाव करवाने के लिए किस तरह से दुर्गाम पहाड़ों को पार करते हुए चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए प्रतिबद्ध है.'

वैसे आपका इस पूरे मामले पर क्या मानना है? हमें कॉमेंट करके बताइए और ऐसी ही वायरल खबरों के लिए पढ़ते रहिए द लल्लनटॉप.

देखें वीडियो- चुनाव आयोग ने उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे पर ये रोक लगाई!

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