ईरान ने 2 मार्च को मीडिया के सामने ऐलान किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद किया जा रहा है. ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड नेवी (IRGC Navy) ने धमकी दी थी कि अगर कोई भी जहाज वहां से गुजरा तो उसे जला दिया जाएगा. इस बयान के तीन दिन बाद ईरान अपनी ही बात से पलट गया. अब कहा कि हमने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद नहीं किया है, और जो भी ऐसा दावा कर रहा है, वो बेबुनियाद आरोप लगा रहा है. इसके अलावा एक और ऑडियो वायरल हो रहा था. इस ऑडियो में IRGC नेवी कथित तौर पर कह रही थी कि स्ट्रेट और होर्मुज बंद है. कहा गया कि ये ऑडियो वहां से गुजर रहे सभी जहाजों को उनके रेडियो सेट्स के चैनल 16 पर भेजा गया था.
'हम अमेरिका की तरह नहीं... ', स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का स्टैंड बदला, दुनिया को दे दी बड़ी राहत
Strait of Hormuz को लेकर Iran ने नया बयान जारी किया है. इस क्षेत्र से दुनिया के कुल पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का 25% से ज्यादा हिस्सा होकर गुजरता है. अरब देशों की अर्थव्यवस्था के लिए ये रूट बेहद अहम है. ईरान ने सबको बड़ी राहत दे दी है.
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2 मार्च को ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के कमांडर-इन-चीफ के सीनियर एडवाइजर, ब्रिगेडियर जनरल सरदार इब्राहिम जबारी ने कहा था,
'तेल की कीमत 81 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैंऔर दुनिया इसके कम से कम 200 डॉलर तक पहुंचने का इंतजार कर रही है. वो इस क्षेत्र से प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल तेल की लूट और निकासी कर रहे हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है. जो भी इसे पार करने की कोशिश करेगा, उसे हमारी वीर और समर्पित नौसेना आग से खत्म कर देगी. अगर वो इस क्षेत्र में दाखिल होने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें निश्चित रूप से गंभीर और निर्णायक मुठभेड़ का सामना करना पड़ेगा. हम इस क्षेत्र में उनकी पाइपलाइनों को भी खत्म कर देंगे और इस क्षेत्र से तेल के निर्यात की अनुमति नहीं देंगे.'
लेकिन इस बयान के तीन दिन बाद यानी 5 मार्च को ईरान अपनी बात से पलट गया. सोशल मीडिया पर लिखा,
'ये दावा कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है, निराधार और बेतुका है. ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून और नेविगेशन की स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्ध है. असल में समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने वाला अमेरिका ही है. ईरान के तट से लगभग 2,000 मील दूर, भारत में नौसैनिक अतिथि के रूप में आए ईरानी फ्रिगेट Dena पर, जिसमें 130 नाविक सवार थे. अमेरिकी पनडुब्बी ने बिना किसी चेतावनी के हमला कर उसे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में डुबो दिया था. इस हमले में 100 से ज्यादा नाविकों की मौत हो गई. ये लापरवाह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और नेविगेशन की स्वतंत्रता के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन करता है.'

17 फरवरी को इंडियन नेवी द्वारा आयोजित ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026’ और नेवल अभ्यास ‘मिलन-2026’ में हिस्सा लेने के लिए ईरानी नेवी का जहाज IRIS डेना भारत आया था. कार्यक्रम में शामिल होने के बाद ये जहाज हिंद महासागर के रास्ते वापस ईरान लौट रहा था. लेकिन 4 मार्च को अमेरिका ने सबमरीन से हमला कर इस जहाज को डुबो दिया. इसमें कथित तौर पर 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई. जहाज पर हमले की बात अमेरिका ने खुद स्वीकार की. और अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इसका एक फुटेेज भी जारी किया था.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्या है?स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक संकरा सा वॉटरवे यानी जलमार्ग है. ये फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है. फिर आगे जाकर ये अरब सागर से मिल जाता है. इसके उत्तर में ईरान है. दक्षिण में UAE और ओमान हैं. इसके आसपास सारे ऐसे देश हैं जो बड़ी मात्रा में तेल प्रोड्यूस करते हैं. दुनियाभर में इसी रास्ते से तेल सप्लाई होता है. भारत में भी इसी रास्ते से तेल आता है.

अमेरिका के एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, दुनिया के कुल पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स में से 25% से ज्यादा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है. अरब देशों की अर्थव्यवस्था के लिए ये रूट बेहद अहम है. अगर ये रूट बंद किया गया तो दुनियाभर के लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी. हालांकि, ईरान ने अपना बयान बदल लिया है. और दावा किया है कि रूट को बंद नहीं किया गया है.
वीडियो: दुनियादारी: हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत को डुबाकर अमेरिका ने भारत को उकसाया?















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