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खामेनेई की मौत पर भारत ने जताया दुख, सुप्रीम लीडर की तस्वीर के सामने बैठ विदेश सचिव ने ये लिखा

भारत सरकार ने उनकी मौत के पांच दिन बाद पहली बार खामेनेई की मौत को लेकर संवेदना व्यक्त की है. इससे पहले अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर भारत सरकार ने बेहद नपी तुली प्रतिक्रिया दी है. सरकार ने ईरान और खाड़ी इलाके में हो रही मौतें और विनाश पर चिंता जाहिर करते हुए संवाद और कूटनीति का सहारा लेने का आह्वान किया है.

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भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी दूतावास में जाकर खामेनेई की मौत पर शोक प्रकट किया है. (इंडिया टुडे)

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के 5 दिन बाद भारत की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है. भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचे और खामेनेई की हत्या पर शोक व्यक्त किया.

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विदेश सचिव ने ईरानी दूतावास में भारत सरकार की ओर से शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किया. इंडिया टुडे/आजतक के मुताबिक उन्होंने शोक पुस्तिका पर लिखा, 

“भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से गहरी संवेदनाएं. हम दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं.”

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक और 7 दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की गई है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने उनकी मौत पर श्रद्धांजलि अर्पित की है.

भारत सरकार ने उनकी मौत के पांच दिन बाद पहली बार खामेनेई की मौत को लेकर संवेदना व्यक्त की है. इससे पहले अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर भारत सरकार ने नपी-तुली प्रतिक्रिया दी. सरकार ने ईरान और खाड़ी इलाके में हो रही मौतों और विनाश पर चिंता जाहिर करते हुए संवाद और कूटनीति का सहारा लेने का आह्वान किया है.

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया 

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भारतीय विदेश मंत्रालय ने अब तक मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष को लेकर दो प्रमुख बयान जारी किए हैं. एक 28 फरवरी को संघर्ष के पहले दिन, और दूसरा संघर्ष के चौथे दिन यानी 3 मार्च को. 

3 मार्च को अपना दूसरा बयान जारी करते हुए विदेश मंत्रालय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपनी अपील को दोहराया. साथ ही मंत्रालय ने ये भी बताया कि इस संघर्ष में कुछ भारतीय हताहत हुए हैं, जबकि कुछ लोग लापता चल रहे हैं. विदेश मंत्रालय ने अपने पिछले बयान का हवाला देते हुए कहा, 

“हमने 28 फरवरी 2026 को ईरान और खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष की शुरुआत पर गहरी चिंता जाहिर की थी. उस समय भी भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ने से रोकने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था. दुर्भाग्यवश रमजान के पवित्र महीने में इस इलाके में स्थिति काफी बिगड़ गई है.”

आपको बता दें कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने युद्ध के पहले दिन ईरानी विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरागची से फोन पर बात की थी. इसके बाद कहा गया कि बातचीत के बाद जारी किए गए प्रेस नोट में भारत की तरफ से शोक संवेदना प्रकट करने या अमेरिका-इजरायल के हमले की आलोचना का कोई जिक्र नहीं था.

वीडियो: ईरान-अमेरिका युद्ध का पांचवा दिन, क्या-क्या हुआ?

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