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सरकार ने निजी डेटा संरक्षण विधेयक वापस लिया, कुछ नया आएगा

संसदीय समिति ने इस बिल में 81 संशोधन सुझाए हैं.

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केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव. (फोटो: पीटीआई)

केंद्र सरकार ने बुधवार, 3 अगस्त को लोकसभा से निजी डेटा संरक्षण विधेयक वापस ले लिया. इस विषय पर अब केंद्र द्वारा एक नया बिल पेश किया जाएगा.

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केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे लेकर लोकसभा में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया और विधेयक को वापस लिया गया.

देश के नागरिकों का निजी डेटा सुरक्षित रखने के लिए ये बिल लाया गया था. सरकार ने 11 दिसंबर 2019 को संसद में ये विधेयक पेश किया था. लेकिन विपक्ष और जानकारों ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि बिल के प्रावधानों में निजी डेटा को लेकर पर्याप्त सुरक्षा नहीं है.

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इसके बाद विधेयक पर विस्तृत विचार-विमर्श करने के लिए इस बिल को संसद की संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया था. समिति की रिपोर्ट को 16 दिसंबर 2021 को लोकसभा में पेश किया गया था.

केंद्र सरकार ने इस विधेयक को इसलिए वापस लिया है ताकि संसदीय समिति की सिफारिशों के आधार पर नया विधेयक तैयार किया जाए और फिर उसे संसद में पेश किया जाए.

बिल वापस लेने की बात करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, 

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'संसद की संयुक्त समिति ने निजी डेटा संरक्षण विधेयक 2019 पर विस्तार से विचार-विमर्श किया है. इसमें 81 संशोधन सुझाए गए हैं और डिजिटल इकोसिस्टम पर मजबूत व्यवस्था तैयार करने के लिए 12 सिफारिशें की गई हैं.'

उन्होंने आगे कहा, 

'संसदीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस दिशा में एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है. इसलिए, यह प्रस्ताव किया जाता है कि 'निजी डेटा संरक्षण विधेयक 2019' को वापस किया जाए और इस कानूनी ढांचे को लागू करने के लिए नया विधेयक पेश किया जाए.'

मालूम हो कि जब ये विधेयक संसद में पेश किया गया था तो विपक्षी पार्टियों और सिविल सोसायटीज ने इसका खुला विरोध किया था और कहा था कि ये बिल निजी डेटा की सुरक्षा के नाम पर पेश किया गया है, लेकिन सरकार ने इसके तहत अपने पास मनमानी शक्तियां एकत्रित कर ली हैं. यही वजह है कि सरकार से ही निजी डेटा को खतरा है.

विपक्ष ने कहा था कि इस विधेयक के प्रावधानों का फायदा उठाकर सरकार निजी डेटा का बेतहाशा दुरुपयोग कर सकती है. उसे आशंका थी कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और कई अन्य कारणों का हवाला देकर लोगों के निजी डेटा को कभी भी प्राप्त कर सकती है, जो कि उचित नहीं है. इसके कारण जनता की निगरानी  करना आसान हो जाएगा.

हालांकि सरकार ने ये दलील दी थी कि विधेयक के प्रावधानों में पहले ही पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए गए हैं कि यदि निजी डेटा का कोई दुरुपयोग करता है तो उससे तगड़ा जुर्माना वसूला जाएगा. हालांकि विरोध के चलते विधेयक से जुड़े विवादों का समाधान करने के लिए सरकार को इसे संसदीय समिति के पास भेजना पड़ा था.

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