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बच्चे की फोटो इंस्टाग्राम से हटवाने वालों, तुम्हारे 'ख़ूबसूरती' के पैमाने शर्मनाक हैं

अगर बच्चा नॉर्मल नहीं तो क्या उसे जिंदगी जीने का हक़ नहीं है?

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इंग्लैंड की चार्ली बेस्विक के जब हैरी बेस्विक पैदा हुआ तो वो 'गोल्‍डेनहेर सिंड्रोम' से पीड़ित था.
12 साल के एक लड़के की फोटो एक मां ने सोशल साइट इंस्टाग्राम पर अपलोड की, और वो फोटो इंस्टाग्राम ने हटा दी. सिर्फ इसलिए क्योंकि बच्चा लोगों के लिए 'नॉर्मल' नहीं था. लोगों ने उस फोटो को रिपोर्ट किया और हटा दिया गया. ये नॉर्मल होने की कौन सी परिभाषा है कि बच्चा जैसा पैदा हुआ वो लोगों के लिए 'घिनौना' हो गया. लोग उसे इंस्टाग्राम पर न देख सके.
इंग्लैंड की चार्ली बेस्विक के जब हैरी बेस्विक पैदा हुआ तो वो 'गोल्‍डेनहेर सिंड्रोम' से पीड़ित था. इस बीमारी में इंसान के चेहरे के कई अंग पूरी तरह से विकसित नहीं होते और शक्‍ल आधी-अधूरी रह जाती है. हैरी के भी बायीं आंख, नाक और कान नहीं थे. हैरी की मां ने फोटो इंस्टाग्राम पर अपलोड की. इंस्टाग्राम ने वो तस्वीर हटा दी. चार्ली बेस्विक ने इसका विरोध ट्विटर पर जताया कि मेरे बच्चे का फोटो उसके चेहरे की वजह से हटा दिया गया.
  उनका ये ट्वीट वायरल होने लगा. गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक इंस्टाग्राम ने खेद जताते हुए फोटो को रिस्टोर कर दिया. चार्ली बेस्विक को ईमेल में फोटो हटाने की वजह ये बताई कि उनको फोटो को रिपोर्ट किया गया था. इसलिए फोटो हटा दिया गया था. चार्ली ने इंस्टाग्राम पर फोटो के कैप्शन को एडिट करके लिखा, 'लोगों ने इस फोटो को रिपोर्ट किया. ये मेरे बेटे का चेहरा है. अगर इसे देखने में दिक्कत है तो स्क्रॉल करिए. आप पर शर्म आती है.' हालांकि चार्ली का कहना है कि इंस्टाग्राम ने इस हरकत के लिए माफ़ी नहीं मांगी है. वो चाहती हैं कि उनके बेटे का अपमान करने पर वो माफ़ी मांगे.  


सोशल मीडिया पर लोगों को रंगभेद, नस्लभेद के खिलाफ अभियान चलाते हुए देखा है. अगर बच्चा बिना आंख, नाक, कान के पैदा हुआ है. तो ये उसके लिए स्वभाविक है. वो बाकी लोगो के लिए इसलिए नॉर्मल नहीं रहा, क्योंकि उसके बाकी लोगों जैसे दो कान, दो आंख नहीं हैं. तो फिर इस तरह गोरा, काले को नॉर्मल नहीं मानेगा. एक नस्ल का इन्सान दूसरी नस्ल को नॉर्मल नहीं मानेगा. धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत तो इस फ़ॉर्मूले में कहीं टिकता ही नहीं है.
अगर बच्चे के आंख, कान न होने की वजह से उसका फोटो देखने पर आपको खौफ आता है. या फिर 'घिन' आती है तो दिक्कत आपमें नहीं, बल्कि सोच में है जो ये मान बैठी है कि आप ही सही हैं. अगर इस बच्चे को नहीं देख सकते तो रंगभेद या नस्लभेद पर कैसे हल्ला मचाते हो.
बच्चे की इस तस्वीर से इतनी दिक्कत हो गई. इंस्टाग्राम से तस्वीर हटवा दी गई. लेकिन जहां वो रहता है वहां क्या किया जाए? क्या लोग उससे बात करना बंद कर दें. क्या उसके दोस्त नहीं होने चाहिए. क्या उसको स्कूल नहीं जाना चाहिए? अगर इन सब सवालों का जवाब नहीं है, तो फिर क्या उसको जीने का हक़ नहीं है? ये बिल्कुल काले-गोरे वाला अंतर है. जाति की ऊंच-नीच वाला अंतर है. मेरी जाति ऊंची है इसलिए तुम नीचे ही बैठो बराबर में नहीं.
इंस्टाग्राम इस तरह पहले भी चर्चा में रह चुका है जब अमरीकी मॉडल एली जॉनसन के इंस्टाग्राम अकाउंट को बैन कर दिया गया था. वजह बताई थी कि साइट पर मॉडल की फोटोज ‘काफी अधिक सेक्सी' होती हैं. मॉडल ने 'फ्री द क्लीवेज' कैम्पेन चलाया था, जिसके जरिए वह एम्पावरमैंट पर चर्चा छेड़ रही थीं. बाद में इंस्टाग्राम ने उनके अकाउंट को दोबारा शुरू कर दिया था. यहां भी वही दिक्कत थी. जब मर्द अपनी अपर हाफ बॉडी की फोटो डालते हैं तो वो 'सेक्सी' दायरे में नहीं आतीं. यहां लड़के और लड़की का भेद है.
हर जगह खुद को अच्छा दिखाने के खांचे तैयार कर रखे हैं. फिर कैसे समानता की उम्मीद की जाए. बच्चे की तस्वीर को कुरूप या घिनौना बताकर रिपोर्ट करना शर्मनाक है. और इंस्टाग्राम का तस्वीर को हटा देना जाहिलपना है. जिसे इंसान, इंसान नज़र नहीं आया.


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