हर साल हिन्दू तीर्थयात्रियों का एक बड़ा जत्था अमरनाथ की यात्रा के लिए निकलता है. शिव भक्तों की ये यात्रा जुलाई के महीने में शुरू होती है. इस यात्रा का अंतिम मकसद होता है बर्फ से बने शिवलिंग के दर्शन करना. ये शिवलिंग गुफ़ा में गिरने वाली बर्फ़ से खुद-ब-खुद बनता है. इसे किसी ईश्वरीय चमत्कार से कम नहीं माना जाता है. यही चमत्कार इस यात्रा की यूएसपी है. हर साल बनने वाले शिवलिंग की इस साल की तस्वीर सामने आई है. शिवलिंग ने पूरा आकार ले लिया है. पर दिक्कत ये है कि इस बार का शिवलिंग अब तक का सबसे छोटा शिवलिंग है. इस तरह की बातों के जानकार ग्लोबल वार्मिंग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. पिछले साल मई के पहले हफ्ते में शिवलिंग का आकार 18 फीट के करीब था जो इस साल मई के पहले हफ़्ते में मात्र 10 फीट के करीब है. अंतर है 8 फ़ीट का. पिछले 10 सालों का रिकॉर्ड उठा कर देखें तो मई के महीने में शिवलिंग का आकार 20 फीट के करीब होता ही होता था.

इस साल अमरनाथ यात्रा 2 जुलाई से शुरू हो रही है. शिवलिंग का बनना यहां आने वाले हज़ारों श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है. पर शिवलिंग का साइज़ श्रद्धालुओं के लिए निराश करने वाला है. कश्मीर यूनिवर्सिटी में अर्थ साइंस के विशेषज्ञ शकील रामशू कहते हैं,
इस बार घाटी में तापमान औसत से ज्यादा रहा और पहाड़ों पर सर्दी के मौसम में काफी कम बर्फबारी हुई. जिसकी वजह से शिवलिंग का साइज़ घटा है. इस साल की अमरनाथ यात्रा के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इसलिए अमरनाथ श्राइन बोर्ड की 4 सदस्यीय टीम ने अमरनाथ गुफा में जाकर वहां के जमीनी हालात का जायजा लिया. अभी अमरनाथ गुफा के आस-पास काफी बर्फ मौजूद है लेकिन यह बर्फ भी पिछले साल के मुकाबले काफी कम है. बहुत जल्द अमरनाथ गुफा के रास्ते तैयार किए जाएंगे.