'मैं ट्रेन में बैठी थी. बोरीवली में रहने वाली एक दोस्त से मिलकर वापस घर लौट रही थी. लेडीज कम्पार्टमेंट में बैठी हुई थी. मैं उस तरफ मुंह करके बैठी हुई थी,जिस तरफ से हैंडीकैप्ड सेक्शन को देखा जा सकता था. लेकिन बीच में रेलिंग थी. मेरी बायीं तरफ एक लड़की बैठी थी. तभी मैंने देखा कि अगले कोच से ही लोहे के रॉड की जालियों से एक शख्स मेरी बगल में मौजूद एक दूसरी पैसेंजर की ओर इशारा कर रहा है. उसका हाथ लड़की के चेहरे की तरफ बढ़ रहा है. लड़की उससे बच रही है. मैंने हेडफोन लगा रखा था. म्यूजिक सुन रही थी. तो उसकी बात नहीं सुन पाई. मुझे लगा वो हैंडीकैप्ड के लिए कम्पार्टमेंट है. जिसमें लोग रोजाना सफर करते हैं. होगा कोई सफर कर रहा होगा. ये सोचकर मैंने निगाह हटा ली. लेकिन ये लड़का उसको गालियां दे रहा था. मैंने सुना वो बोल रहा था, मादर$#%. उसने एक बार नहीं कई बार उसे गालियां दीं. मैंने आंखें नीचे कर लीं. लड़की देख रही थी शायद उसको मदद की ज़रूरत थी. जब उसने फिर से उसके गाल को छूने की कोशिश की और फिर गालियां दीं. तो मैंने उसे देखा. और घूरती रही. मुझे उम्मीद थी कि कुछ देर में ये शख्स अपनी नजरें हटा लेगा, लेकिन उस शख्स को जरा भी डर नहीं लगा. बल्कि वो मेरी तरफ आ गया. और अपना हाथ पैंट की जिप तक ले गया. पेंट खोलकर लिंग को बाहर निकाल लिया. वहीं खड़े होकर मास्टरबेट करने लगा. तब मैंने अपनी साथ चल रहीं दूसरी लेडीज़ से बताया कि वो मुझे देखकर मास्टरबेट कर रहा है. मैंने पुलिस हेल्पलाइन पर कॉल करने को बोला. फोन करके मैंने कम्पार्टमेंट, टाइम, सभी कुछ उसे बताया, लेकिन पूरी बात सुनकर हेल्पलाइन पर फोन रिसीव करने वाला शख्स ठहाके मारकर हंसने लगा. मैंने उनसे पूछा कि क्या वो उसे कांदिवली में पकड़ लेंगे. उधर से कोई जवाब नहीं मिला. बल्कि फोन काट दिया गया. उन्हें ये मज़ाकिया लगा. मुझे नहीं पता इसके बाद उस शख्स को पकड़ा या नहीं. क्योंकि जब कांदिवली आया तो वो कम्पार्टमेंट से उतरा और महिला कोच में घुसना चाह रहा था. जब 6 महिलाएं चिल्लाईं तो वो वहां से भाग गया. मैं कम्पार्टमेंट के गेट तक गई. उसने मुझे धमकाया कि मैं तुम्हारा रेप कर दूंगा.'पूजा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि क्या हेल्पलाइन सच में हमारी मदद करती हैं. या फिर वो मार्केटिंग और पीआर के लिए ही है.
'रेप मुझे डराता है. हमें इस डर को खत्म करना चाहिए. ये एक बड़ी बात होगी लेकिन ऐसा करने से रेप रुकेंगे. ये बड़ी बात इसलिए है क्योंकि रेप के बाद जिस्मानी और मानसिक तौर पर जो दर्द होता है उसे बताया नहीं जा सकता. लेकिन डराया इसलिए जाता है कि समाज का सम्मान मेरी वेजाइना में है. इसलिए नहीं डराया जाता कि इससे मेरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी.' बस हो . ट्रेन हो. या फिर कोई और जगह. यहां तक कि मेट्रो तक में. लड़कियों का सेक्शुअल हैरेसमेंट किया जाता है. लड़की देखते ही मानसिक दिवालियापन बाहर आ जाता है. ये दिखाता है कि सेक्स के बारे में कितने न समझ हैं. जो सिर्फ लड़की को देखते ही शुरू हो जाते हैं. इनके लिए लड़की का मतलब उसके साथ सेक्स करना ही होता है. कि वो अकेली है या घर से बाहर है तो वो सेक्स कर लेगी. इन हरकतों को रोकने के लिए सेक्स का ज्ञान देना समाज के लिए ज़रूरी है.
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