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वो गैंगस्टर जिसके खौफ से दाऊद को गुजरात छोड़कर भागना पड़ा

अहमदाबाद की कोर्ट में शाहरुख की रईस पर 101 करोड़ का मुकदमा. केस किया है गैंगस्टर के बेटे ने.

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फोटो - thelallantop
शाहरुख खान की फिल्म बाद में आती है. विवाद पहले आ जाते हैं. इस बार 'रईस' की कैसेट उलझ गई है. बताते हैं ये पिच्चर बन रही है गुजरात के गैंगस्टर अब्दुल लतीफ पर. उसी के बेटे की पिटीशन पर अहमदाबाद की एक कोर्ट ने शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस को नोटिस भेज दिया है. लड़के का कहना है हमारे अब्बा का नाम खराब कर रहे हैं ये लोग. हमको हर्जाना दें. पूरे 101 करोड़ का. 101? सीरियसली? भाई को समझ नहीं आया होगा हर्जाना लेना है या नेग. लतीफ के बेटे मुश्ताक अहमद शेख ने फिल्म की रिलीज और प्रमोशन वगैरह भी बंद करवाने को कहा है. उनका कहना है सेकंड हाफ में हमारे पापा को गलत तरीके से दिखाया है. तुमने कहां देख लिया? पिच्चर आ गई क्या? लल्लन पूछता है. मुश्ताक ने बताया फिल्म लिखते वक़्त ये लोग हमारे पास आए थे. फैमिली के पास आए, बैठे. स्क्रिप्ट लिखी. लल्लन को लगता है, क्रू वालों ने नमकीन-बिस्कुट ज्यादा खा लिए वही वसूला जा रहा है.

कौन था लतीफ अहमदाबाद के दरियापुर इलाके में रहता था अब्दुल लतीफ. वहीं के कालूपुर ओवरब्रिज के पास देशी दारु बेचने से उसने क्राइम की दुनिया में बिस्मिल्ला किया. धीरे-धीरे उसने टेस्ट बदला. अंग्रेजी शराब बेचनी भी शुरू कर दी. इसकी कमाई से शहर कोट इलाके में रहने वाले बदमाशों को इकठ्ठा किया. अपनी गैंग बना ली. बाद के दिनों में लतीफ ने हथियार सप्लाई करने वाले शरीफ खान से टाईअप कर लिया. अब वो शराब के साथ-साथ हथियारों की भी तस्करी करने लगा. स्टार्टअप इंडिया से भी कोई इत्ती तेज तरक्की करेगा भला?  लतीफ हर जान की कीमत समझता था. इसलिए नहीं कि वो किसी की जान नहीं लेता था बल्कि इसलिए क्योंकि जब वो गैंगस्टर बन चुका था, तब भी किसी गैंगवार में कभी सामने नहीं आता था. वो अंग्रेजों से इंस्पायर्ड था. चालाकी से दूसरी गैंग में फूट करवा दी और उनके गुर्गों को अपनी गैंग में मिला लिया. धीरे-धीरे अहमदाबाद के साथ उसका दबदबा पूरे गुजरात में फैल गया. लतीफ का ऐसा भौकाल था कि कोई भी बुटलेगर बिना उसकी मर्जी के शराब नहीं बेच सकता था. उसे शराब लतीफ से ही खरीदनी पड़ती थी. शहर के मुस्लिम इलाकों में लतीफ गरीबों का मसीहा माना जाने लगा था. दारूवाला रॉबिनहुड टाइप्स. करता क्या था कि वो बेरोजगार युवकों को अपनी गैंग में शामिल कर लेता था. लड़कों को पैसा मिलने लगता. घर का खर्चा चलता. पेट फुल. जनता खुश. जनता में फेमस था तो जाहिर है पॉलिटिकल सपोर्ट भी मिलबय करेगा.
एक लड़का और था. भला सा नाम था उसका दाऊद इब्राहिम. उसकी चश्मा चबाती फोटो टीवी वाले दिखाते रहते हैं. तो वो लड़का भी उस टाइम वडोदरा में ड्रग्स का नेटवर्क खड़ा कर चुका था. क्योंकि जहां शाहरुख खान रहता है. वहां इमरान हाशमी लीड रोल नहीं कर सकता. तो हुआ ये कि दाऊद और लतीफ के बीच गैंगवार छिड़ गया. लतीफ के गुर्गों ने दाऊद को घेर लिया था और दाऊद को वडोदरा से भागना पड़ गया था.
लतीफ गुजरात में 40 से भी ज्यादा मर्डर के केस में आरोपी था, मैथ ठीक थी. रेशियो का ध्यान रखता था. रेशियो का ध्यान रखते हुए इतने ही अपहरण में भी उसका नाम था. हर अच्छी-बुरी चीज का अंत होता है. लतीफ़ का भी हुआ. 1995 में दिल्ली में धरा गया. गुजरात की हर चीज अंत में दिल्ली ही आती है.  गांधी जी के रास्ते पर चल देती है. सो दिल्ली से 'धरे' गए और साबरमती जेल अहमदाबाद में 'धरे' गए. नवंबर 1997 में अब्दुल लतीफ को गुजरात पुलिस ने माड्डाला. तब वो जेल से भागने की फिराक में था.

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