ईरान के मीनाब शहर में 28 फरवरी को स्कूली बच्चों पर मिसाइल हमला इस जंग का सबसे भयानक और विद्रूप चेहरा है. ईरान में 100 से ज्यादा स्कूली बच्चों के ‘शवों’ में बदल देने वाले इस हमले से इजरायल साफ-साफ मुकर गया है. अमेरिका भी इस पर साफ-साफ कुछ नहीं बता रहा. वहां के जंगी विभाग (Department of war) ने कहा कि इस हमले की जांच की जा रही है.
ईरान के स्कूल पर मिसाइल हमले के पीछे अमेरिका या इजरायल? अखबार ने नाम लिखकर खलबली मचा दी
क्या ईरान के मीनाब के शजारेह तैय्येबेह गर्ल्स एलिमेंट्री स्कूल पर मिसाइल गिरना कोई हादसा या गलती नहीं थी? सैटेलाइट तस्वीरों और सोशल मीडिया में आए सत्यापित वीडियो जैसे कई सबूत ये संकेत देते हैं कि स्कूल की इमारत पर सटीक हमला किया गया था.
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इसी बीच सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर ऐसी बातें भी चलीं कि हो सकता है कि हमले के दौरान स्कूल गलती से निशाना बन गया हो या ईरान का अपना मिसाइल गलती से स्कूल पर गिर गया हो. हालांकि इसके सबूत नहीं हैं, लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट दावा करती है कि स्कूल पर हमला अमेरिकी फोर्स ने किया हो सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, मीनाब के शजारेह तैय्येबेह गर्ल्स एलिमेंट्री स्कूल पर मिसाइल गिरना कोई हादसा या गलती नहीं थी. सैटेलाइट तस्वीरों और सोशल मीडिया में आए सत्यापित वीडियो जैसे कई सबूत ये संकेत देते हैं कि स्कूल की इमारत पर ‘सटीक’ हमला (Precision Strike) किया गया था. ये हमला ठीक उसी समय पर हुआ जब अमेरिकी सेना स्कूल के पास में मौजूद ‘Islamic Revolutionary Guard Corps’ (IRGC) के एक नौसैनिक अड्डे पर हमले कर रही थी.
NYT ने आगे कहा कि अमेरिकी अफसरों के बयान भी यही इशारा करते हैं, जिसमें वो बताते हैं कि स्कूल पर हमले के समय अमेरिकी फोर्स Strait of Hormuz के पास ईरान के नौसैनिक ठिकानों को निशाना बना रही थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल पर अमेरिकी हमले के बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस ने कहा कि उन्हें जहां तक पता है, ये बात सही नहीं है, डिपार्टमेंट ऑफ वॉर इसकी जांच कर रहा है. वहीं इजरायल की सेना के प्रवक्ता Nadav Shoshani ने साफ कहा है कि उन्हें स्कूल वाले इलाके में उनके देश की ओर से किसी भी सैन्य कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं है.
दोनों देश इस हमले से साफ मुकर गए हैं. ऐसे में ये पता लगाना मुश्किल हो गया है कि जिस हमले में 175 लोगों के मारे जाने का दावा ईरान कर रहा है, उस हमले को अंजाम किसने दिया? इन मारे गए लोगों में ज्यादातर बच्चे थे, जिनकी खोदी जा रही छोटी-छोटी कब्रों की फोटो सोशल मीडिया पर बीते दिनों सामने आई तो पूरी दुनिया में शोक और दुख की लहर दौड़ गई.
न्यूयॉर्क टाइम्स कहता है कि मीनाब में उस दिन असल में क्या हुआ था, इसका ठीक-ठीक पता लगाना मुश्किल हो गया है. इसकी वजह ये है कि हमले के बाद हथियारों के कोई साफ टुकड़े (weapon fragments) नहीं मिले. बाहरी पत्रकारों को भी मौके तक पहुंचने की इजाजत नहीं मिली है.

क्या सेना के परिसर में था स्कूल?
सोशल मीडिया पर ये भी कहा जा रहा है कि स्कूल रिवॉल्युशनरी गार्ड के कैंपस में था. हो सकता है कि निशाना सेना का कैंपस हो और स्कूल उसकी चपेट में आ गया हो. लेकिन इंडिया टुडे ने सैटेलाइट मैप की मदद से दावा किया है कि स्कूल सेना के कैंपस से अलग था. उसका गेट भी अलग था और वह एक चारदीवारी से सैन्य कैंपस से अलग भी होता था.
हालांकि, हमेशा से ऐसा नहीं था. पहले स्कूल सेना के परिसर में ही हुआ करता था. ऐसा होना असामान्य नहीं है. भारत में भी सेना के कैंपस में स्कूल होने के कई उदाहरण हैं. ये स्कूल सैन्यकर्मियों के परिवार के लिए बनाए जाते हैं.
इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस टीम ने सैटेलाइट इमेज की स्टडी करके बताया कि लड़कियों का यह स्कूल 2013 तक सेना के कैंपस में ही था. बाद में सिविल यूज के लिए इसे कैंपस से अलग कर दिया गया. सितंबर 2016 की सैटेलाइट फोटो में पहली बार चारदीवारी बनी दिखती है. फरवरी 2018 के बाद की सैटेलाइट तस्वीरों में स्कूल का कैंपस बाकी आर्मी वाले कैंपस से अलग दिखाई देता है. इसमें एक अलग एंट्री गेट भी दिखाई दे रहा है, जिसमें गाड़ियां बिल्डिंग में आती-जाती दिख रही हैं.
रिपोर्ट में बताया गया कि इस पूरे कैंपस में 6 मेन बिल्डिंग्स थीं. हमले में इनमें से 5 ध्वस्त हो गईं. सिर्फ एक फार्मेसी की बिल्डिंग बची है, जो एक साल पहले बनी थी.
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