The Lallantop

गलती से बॉर्डर क्रॉस किया, 36 साल पाकिस्तान की जेल में रहे, अब लौटकर वोट डाला है

वहीं तेलंगाना में 70 वर्षीय गदर ने जीवन में पहली बार डाला वोट. अनोखे वोटर्स के किस्से.

Advertisement
post-main-image
36 साल पाकिस्तान की जेल में बिताने वाले गजानंद शर्मा मतदान करने के बाद.
राजस्थान में शुक्रवार को मतदान सम्पन्न हो गया. अधिकांश लोगों के लिए यह अन्य चुनावों की तरह ही था. लेकिन गजानंद शर्मा के लिए यह खास अवसर था क्योंकि वे साढ़े तीन दशक बाद वोट डालने जा रहे थे. अगर आप सोच रहे हैं कि गजानंद का नाम अब तक वोटर लिस्ट में नहीं रहा होगा या फिर वो मतदान का बहिष्कार कर रहे होंंगे तो आप गलत हैं. दरअसल गजानंद शर्मा लापता हो गए थे. उनके परिजनों ने 1982 में उनके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. वो  जयपुर के नाहरगढ़ इलाके के फतेहराम का टीबा गांव के रहने वाले थे.  36 सालों के बाद इस साल मई में गजानंद की पत्नी मखानी देवी को समोद पुलिस थाने से जानकारी मिली कि गजानंद पाकिस्तान की कुख्यात कोट लखपत जेल में बंद हैं. कुख्यात इसलिए कि इसी जेल में सरबजीत सिंह की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी.
मखानी देवी को जैसे ही ये पता चला कि उनके पति ज़िंदा हैं, उन्होंने गजानंद की रिहाई के प्रयास करने शुरू कर दिए. प्रयास सफल रहा और 14 अगस्त को गजानंद वापस भारत आ गए. गजानंद के छोटे बेटे मुकेश ने बताया, 'मेरे पिता मजदूरी करते थे. एक दिन वो घर से निकले और फिर लौटकर वापस नहीं आए. हमने सभी संभावित स्थानों पर खोजबीन की, लेकिन कुछ पता नहीं चला. मई में जब थाने से उनकी फोटो आई तो हमने तुरंत उन्हें पहचान लिया'.
पाकिस्तान से भारत वापस आने पर लोगों ने धूमधाम से गजानंद का स्वागत किया.
पाकिस्तान से भारत वापस आने पर लोगों ने धूमधाम से गजानंद का स्वागत किया.

दरअसल गजानंद गलती से सीमा पार कर पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गए थे. जिसके बाद पाकिस्तानी दस्तावेजों के अनुसार वो फॉरनर्स एक्ट में वहां पर जेल में बंद थे. गजानंद की तरह हजारों भारतीय अभी भी पाकिस्तान की जेलों में कैद हैं. जो वैध कागजात न होने के कारण पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं.  36 साल के लंबे अंतराल के बाद जब पाकिस्तान की जेल से निकलकर जयपुर अपने घर पहुंचे तो भारी भीड़ ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. उनके घर वापस आने के बाद मिठाई बांटकर, पटाखे जलाकर खुशियां मनाई गई'.
ये खुसी के आंसू हैं. पति के वापस आने की खुशी मखानी देवी के चेहरे पर देखी जा सकती है.
ये खुशी के आंसू हैं. पति के वापस आने की खुशी मखानी देवी के चेहरे पर देखी जा सकती है.

गजानंद के परिवार में पत्नी दो बेटे और बहुएं हैं. उनके वापस आने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है. मुकेश कहते हैं कि मेरे पिता की रिहाई सरकारी अधिकारियों और मीडिया के प्रयासों से ही हो पाई है. हमें यकीन था कि वो ज़िंदा हैं. यह हमारे परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है.
गजानंद 1980 के बाद पहली बार वोट डालने जा रहे हैं. अपने अंतिम मतदान को याद करते हुए वे कहते हैं, 'उस समय एक कागज पर उम्मीदवारों के चुनाव चिन्ह बने होते थे. हमें उस पर मुहर लगाना होता था. इसके बाद कागज को बैलेट बॉक्स में डाल दिया जाता था. मेरी पत्नी ने बताया कि अब मशीन पर बटन दबाकर वोट दिया जाता है. गजानंद ने अगस्त में ही आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड के लिए आवेदन कर दिया था. जो सोमवार को उन्हें मिला. इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने जयपुर में मतदान किया.

70 वर्ष की उम्र में पहली बार वोट डालने के बाद मीडिया से बात करते हुए गदार
70 वर्ष की उम्र में पहली बार वोट डालने के बाद मीडिया से बात करते हुए गदर

जहां एक तरफ गजानंद को छत्तीस साल बाद वोट डालने का मौका मिला, वहीं दूसरी तरफ हैदराबाद में 70 वर्षीय फोक सिंगर और वामपंथी विचार रखने वाले गदर ने पहली बार वोट डाला. तेलंगाना के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस, टीडीपी, सीपीआई और तेलंगाना जन समिति के गठबंधन वाली पीपल्स फ्रंट के लिए प्रचार करने वाले लोकगायक ने पत्रकारों से कहा कि वोटिंग को लेकर उनके विचारों में बदलाव आया है. सत्तर साल की उम्र में पहली बार वोट करने के बाद उन्होंने कहा कि वोटिंग के जरिए बदलाव लाया जा सकता है. हालांकि यह वोटर पर निर्भर करता है कि वो किस प्रकार का परिवर्तन चाहता है.


वीडियो:

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement