फ्रांस की सरकार ने मुस्लिमों को लेकर एक बड़ा आदेश जारी किया है. इसके तहत देश के स्कूलों में मुस्लिम छात्राओं के अबाया पहनने पर रोक लगा दी गई है. फ्रांस के शिक्षा मंत्री गैब्रिएल अत्ताल ने इसकी जानकारी दी है. गैब्रिएल अत्ताल ने कहा कि 4 सितंबर, 2023 से स्कूलों का नया सत्र शुरू हो रहा है और इसी दिन से पूरे देश के स्कूलों में ये नया नियम लागू होगा. (France ban Islamic abayas in schools).
फ्रांस में स्कार्फ और बुर्के के बाद अबाया भी बैन, सरकार ने स्कूलों को लेकर क्यों लिया ये फैसला?
4 सितंबर, 2023 से फ्रांस में स्कूलों का नया सत्र शुरू हो रहा है और इसी दिन से पूरे देश के स्कूलों में ये नया नियम लागू होगा


रविवार, 27 अगस्त को फ्रांस के टीएफ-1 टीवी से बातचीत में शिक्षा मंत्री ब्रिएल अत्ताल ने कहा,
"सरकार ने फैसला किया है कि अब स्कूलों में अबाया नहीं पहना जाएगा. पूरे देश के स्कूलों को आदेश दिया गया है कि अब नए सत्र में जब क्लासरूम में पढ़ाई शुरू हो, तो ध्यान रखा जाए कि स्कूल में किसी भी व्यक्ति को देखने से उसके धर्म की पहचान नहीं होनी चाहिए."
बता दें कि कुछ मुसलमान महिलाएं अबाया पहनती हैं. ये देखने में बुर्के जैसा होता है, लेकिन इसमें चेहरा नहीं ढकता है.
क्यों लगा प्रतिबंध?फ्रांस के स्कूलों में अबाया पहनने पर महीनों से जारी बहस के बीच वहां की सरकार ने ये कदम उठाया है. आबया एक मुद्दा बन साल 2020 में हुई एक घटना के बाद. अक्टूबर 2020 में फ्रांस में एक टीचर का सिर काट दिया गया था. कहा गया था कि आरोपी टीचर से इसलिए नफरत करने लगा था, क्योंकि उन्होंने छात्रों को पैगंबर मुहम्मद के विवादित कार्टून दिखाए थे. इसके बाद से ही फ्रांस में दक्षिणपंथी पार्टियां अबाया को बैन करने की मांग कर रही थीं. पिछले कुछ समय से इन पार्टियों के नेता कह रहे थे कि अबाया पहनने वालों की संख्या बढ़ रही है, इसलिए इसपर तुरंत रोक लगे. जबकि देश की वामपंथी पार्टियों का कहना था कि इस प्रतिबंध की वजह से मुस्लिम महिलाओं और बच्चियों के अधिकारों का हनन होगा.
ऐसी ही एक बहस के चलते साल 2004 में नया कानून बनाकर स्कूलों में हेड स्कार्फ पहनने पर रोक लगा दी गई थी. इसके बाद साल 2010 में फ्रांस ने सार्वजनिक जगहों पर बुर्के को प्रतिबंधित कर दिया था. इन फैसलों पर मुस्लिम समुदाय ने खासी नाराजगी भी जताई थी.
फ्रांस में मुस्लिम महिलाओं द्वारा समुंदर किनारे नहाते वक्त पहने जाने वाले बुर्किनी ड्रेस को लेकर भी काफी विवाद होता रहता है. साल 2016 की गर्मियों से ही फ्रांस के कई तटीय शहरों में बुर्किनी पर प्रतिबंध लगाने की सिलसिला तेज हुआ था. कई स्थानीय महापौरों ने बुर्किनी पर प्रतिबंध लगा दिया. हालांकि, कई जगह इसे चुनौती दी गई जिसके बाद फैसले को भेदभावपूर्ण करार देते हुए रद्द कर दिया. हाल ही में तटीय शहर फ्रेजस में भी बुर्किनी पर विवाद हुआ. यहां भी इस ड्रेस पर प्रतिबंध लगा था, इसके खिलाफ कुछ लोग अदालत गए और जज ने प्रतिबंध हटा दिया.
बता दें कि फ्रांस यूरोप का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला देश है. फ्रांस के नेशनल स्टैटिक्स ब्यूरो (इनसी) के मुताबिक फ्रांस की आबादी में मुसलमानों का हिस्सा करीब 10 फीसदी है.
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