मंगलवार को ही दहशतगर्दों ने चार शिया औरतों को मार दिया. पाकिस्तान में क्वेटा के हजारा में औरतें बस से उतर रही थीं. दहशतगर्द आए और अंधाधुंध गोलियां चला दीं. वो भी इसलिए क्योंकि वो शिया थीं. मगर ख़ामोशी है. कोई हो-हल्ला नहीं. बस नजर आ रहा है तो कश्मीर. बलूचिस्तान में तो हालात बहुत ही नाजुक हैं. पाकिस्तान में कम तादाद में मौजूद बिरादरियों को निशाना बनाया जा रहा है. 15 सालों में एक हजार 400 से ज्यादा ऐसे हमले हो चुके हैं.
सोशल मीडिया पर इन औरतों के बारे में लिखा गया तो पाकिस्तान में पनप रहे दहशतगर्द को खूब गरियाया गया. कहा गया कि पाकिस्तान में आए दिन बम धमाके होते हैं. शियाओं, कदियानियों को निशाना बनाया जाता है. उन्हें ये तो दिखाई नहीं देता, लेकिन कश्मीर में इंडियन आर्मी क्या कर रही है, ये पता रहता है.

ज़ालान अमजद खान की नसीहत का स्क्रीन शॉट
ज़ालान अमजद खान ने लिखा, अगर कश्मीर में इंडियन फौजी चार औरतें शहीद कर देते तो पूरे पाकिस्तान में शोर मचा होता. क्वेटा में रियासती सरपरस्ती में पलने वाले देवबंदी, दहशतगर्दों ने चार शिया औरतों को शहीद कर दिया मगर ख़ामोशी है.'
ज़ालान अमजद का ये सवाल फेसबुक पर वायरल हो गया. लोगों ने अपनी भड़ास निकाली. सुर स्पीन पख्तून ने लिखा कि क्वेटा, कुचलख सब तालिबान से भरा पड़ा है. वहां तालिबान की ट्रेनिंग होती है. उनकी महीने की तनख्वाह होती है.अपनी आंखें खोलो भाइयों और बहनों. बाकी कमेंट खुद पढ़ लो.

अगर पाकिस्तान को कश्मीर में आतंकवादी मासूम नजर आते हैं तो फिर बलूचिस्तान के लिए ऐसी हेडिंग लगाने पर पाबंदी लगा देनी चाहिए. जो वहां की मीडिया बलूचिस्तान के बदतर हालात के लिए लगाती है.














