महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के चीफ राज ठाकरे गिल्ल हैं. 'ऐ दिल है मुश्किल' के प्रड्यूसर्स की तहजीब को वो अपनी जीत मान रहे हैं. उन्हें लग रहा है कि सेना के कोष में फिल्म वालों से पांच करोड़ रुपए जमा करवाकर उन्होंने जीत हासिल कर ली है और पाकिस्तानी कलाकार उनकी गुंडई के आगे दब गए हैं. सरकार, संविधान और फिल्म इंडस्ट्री, सब उनके ठेंगे पर है. लेकिन, राज ठाकरे की इस गुंडई को सरेआम थप्पड़ मारा है एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर (सेवानिवृत) और दूसरे सेना अफसरों ने.
राज ठाकरे की गुंडई को इंडियन आर्मी ने थप्पड़ रसीद किया है
पांच करोड़ की मांडवाली करके बड़ा खुश थे राज ठाकरे, लेकिन सेनावालों ने दो टूक जवाब दिया है.

पाकिस्तानी कलाकारों को बैन करने के मामले में राज ठाकरे एक गुंडे जैसा रवैया अपनाए हुए थे. सीधा कह रहे थे कि फवाद खान की वजह से 'ऐ दिल है मुश्किल' रिलीज नहीं होने देंगे. महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस और प्रड्यूसर्स गिल्ड के साथ बैठकर 'मांडवाली' की. तय हुआ कि पाक कलाकारों को कभी काम नहीं दिया जाएगा और प्रड्यूसर्स को आर्मी वेलफेयर फंड में 5 करोड़ रुपये जमा कराने होंगे. इसके बाद मनमोहन बहादुर ने पांच ट्वीट दागे और कहा कि सेना जबरन वसूले गए पैसों की मोहताज नहीं है.
पढ़िए मनमोहन बहादुर ने क्या लिखा:

मैंने चालीस साल गुजारे हैं वर्दी में और मैं कभी जबरन वसूले गए पैसों पर नहीं जिया. मेरे देश में ये क्या हो रहा है?

भारतीय सशस्त्र बलों को जबरन वसूली का हिस्सा क्यों बनाना चाहिए? इस पैसे को स्वीकार करते ही वो भ्रष्टाचार/दागी पैसे लेने वाले बन जाएंगे.

भारतीय सशस्त्र बलों को चुनावी महत्वाकांक्षाओं की बैसाखी न तो बनना चाहिए और न वो बन सकते हैं. ये दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि पिछले दिनों से ये ट्रेंड देखने में आ रहा है. सतर्क रहिए.

राज ठाकरे सरकार हैं या...? साफ-साफ बात करते हैं. जैसा शेखर गुप्ता ने ट्वीट किया, ये संविधान को झटका है.

जब देश की जनता सेना के वेलफेयर फंड में योगदान देती है, तो सेना को इस प्यार और भावनाओं पर कभी शक नहीं होता. पर अब से? राज ठाकरे की जबरन वसूली.
राज ठाकरे का राष्ट्रवाद सिर्फ कुछ पैसों के लिए झुक गया और इससे सबसे आहत सेनावाले ही हैं. वो साफ कह रहे हैं कि सेना के नाम पर फायदा उठाया जा रहा है. पूर्व सैन्य सचिव लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत) ने कहा कि वो कभी इस तरह की हरकतों का समर्थन नहीं करते हैं.
लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जायसवाल ने कहा है, 'सेना फंड के लिए भीख मांगने नहीं जाती है. अगर कोई प्रड्यूसर अपने मन से आर्मी वेलफेयर फंड में डोनेशन देना चाहता है, तो वो किसी भी आम भारतीय की तरह डोनेशन दे सकता है, लेकिन फंड के लिए किसी को मजबूर करना गलत है. सेना को राजनीति से दूर रखना चाहिए. हम ऐसे ही रहे हैं और ऐसे ही रहना पसंद करते हैं.'
कारगिल के हीरो रहे ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर (रिटा.) ने कहा, 'सेना के नाम पर राजनीति करके लोगों की भावनाओं से नहीं खेलना चाहिए. 5 करोड़ के जबरन डोनेशन को ठीक कैसे कहा जा सकता है. राजनीतिक लाभ के लिए सेना का मिसयूज नहीं किया जाना चाहिए. अगर प्रडूयसर्स का हाथ मरोड़कर पैसा वसूला गया है तो सेना इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी.'
जिस सेना और देशभक्ति के नाम पर एक विधायक वाले नेता राज ठाकरे लीचड़पना कर रहे हैं, उम्मीद है कि सेना के अफसरों की ये बातें सुनकर उनके कुछ पल्ले पड़ेगा. कुछ अनपढ़ और जाहिर गुंडों के दम पर धमकियां देना बहुत आसान है. ऐसे लोग न तो सीमा पर खड़े होकर खून बहा सकते हैं और न ही पसीना बहाकर कोई फिल्म बना सकते हैं. न जाने कौन इन्हें बोलने का हक दे देता है.
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