आज नोट बंदी की पांचवी बरसी है. आज की ही वो तारीख है जिसने सारे देश को एक साथ लाकर खड़ा कर दिया था, बैंक की लाइनों में. नोटबंदी के समय तमाम किस्म के वादे किए गए थे कि आतंकवाद, नक्सलवाद, कालेधन, कमरदर्द, बदनदर्द और जाने किस-किस चीज की कमर तोड़ दी जाएगी बाकियों का पता नहीं लेकिन कमर नैनो जीपीएस चिप की टूटती नज़र आई थी. दो हज़ार के नोट में इतनी खूबियां गिना दी गईं, मानो वो नोट नहीं नरेंद्र मोदी हों. नोटबंदी कालांतर में उतनी ही सफल साबित हुई, जितना आपको जीएसटी से फायदा हो रहा है. उसी समय देश ने नेताओं के बच्चों और माता-पिताओं को पहली बार अपने साथ खड़ा पाया था, एक बार फिर एटीएम की लाइनों में. बाद में जाने क्या हुआ कि उन लोगों को दोबारा लाइनों में नहीं लगना पड़ा. शायद सबने कुछ हजार के वो नोट निकालकर अक्षयपात्र में रख दिए हों. खैर नोटबंदी के पांच साल हुए, सरकार और सत्तारूढ़ दल तो नोटबंदी के फायदे गिनाना वैसे ही भूल गया, जैसे भूल-भूल में पेमेंट ऐप वाले अपने विज्ञापन में पीएम की फोटो लगा दिया करते थे लेकिन सोशल मीडिया पर उस दिन की याद बरकरार रही.
नोटबंदी के चुटकुलों और मीम्स ने बताया कि 5 साल में क्या हुआ?
मीमबाज़ों का सारा तीन-पांच, गुणा-गणित देखते जाइए.

#DemonetisationDisaster, #नोटबंदीअर्थतंत्रकी_बरसी, #Black_Day_Indian_Economy, #notebandi जैसे हैशटैग चलते नज़र आए. इनमें से कुछ विपक्षी (भाजपा के!) दलों की ओर से चलाए गए हैशटैग थे. शेष मीम बनाने वालों ने भी दिन को उतना ही रंगीन बनाए रखा, जितने रंगीन नोट नोटबंदी के बाद सामने आए हैं.
नोटबंदी का दर्द छलके हो और उस व्यक्ति का जिक्र न हो, जिसने एटीएम की लाइन में खड़े-खड़े उस दौर की सबसे यादगार लेकिन अश्लील बात कह दी थी, ऐसा हो ही नहीं सकता. बात एचडीएफसी बैंक के एटीएम के बाहर साइकलों से थोड़ा पीछे और लाइन से थोड़ा बाहर खड़े उस आदमी की हो रही है, जो नोटबंदी के बाद की एक ठंडी सुबह में ट्राउजर की जेब में हाथ डाले खड़ा था. टीवी रिपोर्टर ने एक आम सा सवाल पूछा कि "ठंड बढ़ गई है, बावजूद उसके आपको लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है." पलटकर नोटबंदी से खिसिआए, पीली-सफ़ेद जैकेट, लालशर्ट और सिर पर उस दिन के बाद आईकॉनिक हो गई टोपी वाले व्यक्ति ने जो बात कही, उसने पूरी नोटबंदी और देश का हाल चंद असंसदीय शब्दों में बयान कर दी. उसे याद करते हुए (कु)ख्यात ट्रोल रोफ्ल गांधी ने लिखा.
दी लल्लनटॉप के ही इंटरव्यू में नोटबंदी नहीं नोटबदली हुई कहने वाले और नोटबंदी के समय एटीएम की लाइन में लगे लोगों का मज़ाक उड़ाने वाला वीडियो वायरल कराकर बाद में मासूम सफाई देने वाले मनोज तिवारी के नाम से बने पैरोडी अकाउंट से उस अखबार की कतरन आई, जिसमें पीएम मोदी कह रहे थे कि नोटबंदी में कोई खोट दिखे तो 50 दिन बाद मुझे सजा दे दीजिएगा.

50 दिन बाद चौराहे पर मिलने न मिलने का जिक्र कई यूजर्स करते मिले. एक यूजर ने ललकार के स्वर में लिखा. "आज नोटबंदी के 5 साल हो गए। 1 साल तक मनाया गया यह उत्सव ऐसा रहा कि, प्रचारमंत्री द्वारा इसकी कहीं चर्चा भी नही की जा रही। उन्होंने ये भी नही बताया 5 सालों में कितना काला धन वापस आया। मोगली जी आ जाओ मेरे चौराहे पर"

पैसे पर रस्क रख धन-ते-रस्क की बधाई देने वाले तरीके से ही नोट पर चिप्स रख, दो हज़ार के नोट में लगी चिप दिखाई गई, कहा गया. 5 साल पहले नोटबंदी करके 2000 की चीप वाली नोट देने के लिए #ThankYou.modi ji
फूड वीडियोज में आलू-चना और सोशल मीडिया पर आलोचना का दौर हमेशा ही चलता रहता है. ऐसे में सवाल उठता है कि कुछ फायदा भी तो हुआ ही होगा. उसी अंदाज़ में तंज़ कसे गए कि "लोग कितना ही कुछ बोलें, नोटबंदी से देश को बहुत फायदा हुआ। काश इस साल फिर से वह सफल प्रयोग दोहराया जाए।"
आज एक तस्वीर सोशल मीडिया पर अलग से भी खूब चल रही है, जिसमें सिलेंडर की टेक लगाकर चूल्हे में लकड़ी जलाई जा रही है. उसे दिखाकर कहा गया.
"नोटबंदी का एक फायदा तो ये रहा ।।।"
जाने तंज़ कसा जा रहा था या तारीफ़ की जा रही थी लेकिन अमित शाह की तस्वीर का प्रयोग हुआ. लिखा गया.
"आज पाँच साल हो गए देश से भ्रष्टाचार, नक्सलवाद और आतंकवाद को ख़त्म हुए। नोटबंदी का शुक्रिया। मैं यह सब दूरबीन लगा कर के ढूँढ रहा था पर मिला नहीं!"
नोटबंदी सफल रही या नहीं रही, ये तो अर्थशास्त्री ही बता सकते हैं, आम लोग तो अनुभव मात्र बस बता सकते हैं, अनुभव बताते लोगों की कमी नहीं रही. इस यूजर ने पड़ोसी के सहारे अनुभव साझा किया कि
"पांच साल पहले मेरा पड़ोसी 8sep 2016 तक जिसके पास alto कार थी 10sep को नयी स्कॉर्पियो ले के आया था!
वो भी मोदी जी को धन्यवाद देता है जिनकी वजह से वो स्कॉर्पियो का मालिक बना!!"
नोटबंदी के बाद जिन चीजों को कोई याद नहीं रखता उनमें से पुराने नोट भी हैं. उन्हें माल्यार्पण करते लोग भी दिखे.
कालांतर में गोलपोस्ट चेंज हुए तो सरकार की ओर से भी कहा गया था कि नोटबंदी का मकसद डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना भी था. केले बेचती महिला के डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की ये तस्वीर दिखा, नोटबंदी की बधाई दी गई. कहा गया कुछ लोगों के पेट में इस कारण गैस बन रही है.









