ये स्टोरी निशान्त ने की है.
अबकी बाबा रामदेव की कंपनी पर FIR हुई है
पतंजलि हर्बल एंड मेगा फ़ूड पार्क की साइट पर हुआ हादसा.
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फोटो - thelallantop
यहां रामदेव आजकल सरकार के नोटबंदी के फैसले का घूम-घूम कर बखान कर रहे हैं, वहां उनकी 'कंपनी' पतंजलि के खिलाफ एफईआर दर्ज हो गई है. मामला असम का है. वहां उनके पतंजलि हर्बल एंड मेगा फ़ूड पार्क की साइट पर खुदाई हो रही थी. यहां एक गड्ढे में एक हथिनी गिर गई और उसकी मौत हो गई. असम की फ़ॉरेस्ट मिनिस्टर प्रमिला रानी ब्रह्मा ने पतंजलि के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया. इस गड्ढे में हथिनी और उसका बच्चा दोनों गिर गए थे. फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने हथिनी के बच्चे को तो बचा लिया गया लेकिन हथिनी की चौबीस घंटे के अन्दर मौत हो गई. उसके सिर में गहरी चोट लगी थी और एक पैर टूट गया था. मिनिस्टर ने कहा पतंजलि के लोग वाइल्ड लाइफ को लेकर काफी असंवेदनशील हैं. फॉरेस्ट मिनिस्टर ब्रह्मा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सबको पता है यहां हाथी आते जाते रहते हैं. ऐसे में प्रोजेक्ट वालों ने गड्ढा खुला कैसे छोड़ दिया और उन्हें देखने के लिए कोई आदमी नहीं था. ये उनके नकारेपन को दिखाता है. उन्होंने इस मामले को बहुत हल्के में भी लिया है. पतंजलि की तरफ से बोलते हुए उदितादित्य गोस्वामी ने कहा कि ये एरिया 1990 में इसे इंडस्ट्रियल पार्क घोषित किया गया था और ये एलीफैंट कॉरिडोर नहीं था. ये हाथी अरुणाचल प्रदेश से नीचे आ गए थे. हमें हाथियों को बचाने के मूवमेंट के बारे में पता है. जब ये काम चल रहा था तब हमने अपने छह आदमियों को इसे देखने के लिए लगाया था लेकिन फिर भी ऐसा हो गया. ये दुखद है. गोस्वामी ने ये भी कहा कि पतंजलि जल्द ही 28,000 बीघे में एक हर्बल गार्डेन बनाएगी. पतंजलि फ़ूड पार्क साइट नामेरी नेशनल पार्क से 20 किमी पर है. ब्रह्मा ने आगे कहा कि इस मसले को ठीक से देखने की जरूरत है और हाथियों के लिए बड़े एरिया के ज्यादा कॉरिडोर बनाने की ज़रुरत है. फॉर्रेस्ट डिपार्टमेंट ने क्रेन की मदद से हथिनी और उसके बच्चे को बाहर निकाला. हथिनी को काजीरंगा पार्क के सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन एंड कंजर्वेशन (CWRC) में भेजा गया, जो यहां से साठ किमी दूर है. उसके शरीर से काफी ब्लीडिंग हो रही थी और रास्ते में उसकी मौत हो गई. उसके बच्चे को भी यहां शिफ्ट किया गया है. रामदेव के पतंजलि हर्बल और मेगा फ़ूड पार्क को असम में 150 एकड़ ज़मीन मिली थी. 6 नवम्बर को चीफ मिनिस्टर सर्बानंद सोनोवाल ने इसकी नींव रखी थी.
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