वेस्ट एशिया की जंग से पूरी दुनिया परेशान है. इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने युद्ध रोकने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को ‘बढ़िया’ सुझाव दिया था. हालांकि, प्रेसिडेंट ट्रंप ने उनके ऑफर को ठुकरा दिया. रूस के ईरान के साथ अच्छे संबंध हैं. लिहाजा ये डील प्रेसिडेंट पुतिन कामयाब भी करवा सकते थे.
पुतिन ने बताया ईरान युद्ध रोकने का 'सॉलिड' तरीका, पर ट्रंप नहीं माने, क्या था ऑफर?
9 मार्च को प्रेसिडेंट ट्रंप के साथ अपनी बातचीत में पुतिन ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए कई सुझाव दिए थे. यूरेनियम से जुड़ा प्रस्ताव भी उन्हीं में से एक था.
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दरअसल, डॉनल्ड ट्रंप और इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का दावा है कि ईरान न्यूक्लियर बम बनाने भर का यूरेनियम जुटा चुका है. अगर वो बम बना लेता है तो उसका सबसे पहला टारगेट इजरायल होगा. इसी डर से अमेरिका और इजरायल ने ईराम पर हमला बोला है. 14 दिन से लगातार चल रही जंग के बीच Axios की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की है. उन्होंने प्रेसिडेंट ट्रंप से कहा कि अगर यूरेनियम की वजह से ये जंग चल रही है तो वो उसे रूस ले जाएंगे.
पुतिन का प्रस्ताव अमेरिका या इजरायल के सैनिकों को जमीन पर उतारे बिना ईरान के न्यूक्लियर भंडार को हटाने में मदद कर सकता है. रूस पहले से ही एक परमाणु शक्ति है और उसने 2015 के परमाणु समझौते के तहत ईरान के कम-एनरिच किए यूरेनियम को अपने पास रखा था. इस वजह से वह उन चुनिंदा देशों में से एक है जिनके पास इस यूरेनियम को स्वीकार करने की तकनीकी क्षमता भी है.
रिपोर्ट के मुताबिक 9 मार्च को प्रेसिडेंट ट्रंप के साथ अपनी बातचीत में पुतिन ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए कई सुझाव दिए थे. यूरेनियम से जुड़ा प्रस्ताव भी उन्हीं में से एक था. वहीं अमेरिका के एक अधिकारी ने Axios को बताया कि यह पहली बार नहीं है जब यह प्रस्ताव दिया गया है. इसे स्वीकार नहीं किया गया है. अमेरिका का रुख यह है कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यूरेनियम सुरक्षित रहे. रूस ने मई 2025 में भी अमेरिका-ईरान की न्यूक्लियर वार्ता के दौरान जून में इसी तरह के प्रस्ताव रखे थे लेकिन इसके बाद ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकाने पर हमला कर दिया.
US के अधिकारी ने कहा,
प्रेसिडेंट सबसे बात करते हैं. चाहे वो शी जिनपिंग हों, पुतिन हों या यूरोपियन. वह हमेशा डील करने को तैयार रहते हैं. लेकिन यह एक अच्छी डील होनी चाहिए. प्रेसिडेंट बुरी डील नहीं करते.
इस बीच ये भी चर्चा है कि US और इजरायल ने युद्ध के बाद के फेज में न्यूक्लियर स्टॉक को सुरक्षित करने के लिए ईरान में स्पेशल फोर्स भेजने पर चर्चा कर रहे हैं. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 13 मार्च को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी जमीनी हमले की ओर इशारा किया था. उन्होंने कहा कि ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम पर नियंत्रण पाने के लिए अमेरिका के पास कई विकल्प मौजूद हैं. हेगसेथ ने कहा कि एक विकल्प यह है कि ईरान खुद से अपने भंडार को सौंप दे. अमेरिका इस कदम का स्वागत करेगा.
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