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शाहजहांपुर बॉर्डर से हरियाणा में घुस रहे किसानों पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज

किसान नेताओं ने क्या ऐलान किया है?

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शाहजहांपुर बॉर्डर से किसान दिल्ली की ओर चले जिनको फिलहाल हरियाणा में रोका गया है. फोटो- KisanEktaMarch
तीन जनवरी 2021. किसान आंदोलन को 39 दिन हो चुके हैं. दिल्ली-एनसीआर में हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है, बारिश भी हुई. लेकिन किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर कुछ किसानों ने अर्धनग्न प्रदर्शन किया. इस बीच शाहजहांपुर से किसान गुड़गांव की तरफ बढ़ गए हैं. वहीं किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पीएम मोदी को खुला खत लिखा है.
शाहजहांपुर से आगे बढ़े किसान
लल्लनटॉप के संवाददाता रजत शर्मा ने बताया कि राजस्थान से किसान शाहजहांपुर के रास्ते हरियाणा में घुस चुके हैं. जानकारी के मुताबिक अब किसान गुड़गांव के रास्ते पर हैं. किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछार का भी इस्तेमाल किया लेकिन किसानों को रोका नहीं जा सका. पुलिस और किसानों के इस टकराव के बाद हाईवे पर करीब पांच किलोमीटर लंबा जाम लग गया. किसानों के इस दल में काफी लोग हैं और कई ट्रैक्टर भी शामिल हैं. फिलहाल सभी आंदोलनरत किसानों को हरियाणा में धारूहेड़ा के पास रोका गया है.
Shahjahanpur
इस दौरान करीब 5 किलोमीटर लंबा जाम भी हाईवे पर लग गया.

'कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर लोहड़ी मनाएंगे'
दिल्ली की सिंघु सीमा पर मीडिया से बात करते हुए किसान नेता मंजीत सिंह राय ने कहा कि 13 जनवरी को हम कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर लोहड़ी मनाएंगे. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर 23 जनवरी को हम किसान दिवस मनाएंगे.
किसान नेता ओंकार सिंह ने कहा कि आज 37वां दिन है. सरकार को अपनी जिद छोड़ देनी चाहिए. जब तक कानूनों को वापस नहीं लिया जाता, हम वापस नहीं जाएंगे. यह निराशाजनक है कि किसान अपनी जान गंवा रहे हैं. इतने किसान ठंड से परेशान हैं और सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है.
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किसान नेता जंगवीर सिंह बाएं और ओंकार सिंह दाएं. फोटो- ANI

किसान नेता जंगवीर सिंह ने कहा कि किसानों ने गन्ना रेट की मांग वाला पत्र पंजाब सरकार को दिया था, लेकिन डेढ महीने बीत चुके हैं और पंजाब सरकार ने जवाब नहीं दिया है. पंजाब के सीएम ने कहा था कि नोटिफिकेशन एक हफ्ते में जारी हो जाएगा. हम पंजाब सरकार से अपील करते हैं कि इस मामले पर गौर करें.
किसान नेता हरमीत सिंह ने कहा कि कल की मीटिंग में हम सरकार से फिर से तीनों कृषि कानून वापस लेने की मांग करेंगे. अब बारिश हो रही है तो हम वाटरप्रूफ टेंट्स का इंतजाम कर रहे हैं, हालांकि ये सरकारी जैसे तो नहीं हैं, साथ ही हम महिलाओं और बुजुर्गों के लिए कंबल और गर्म पानी का भी इंतजाम कर रहे हैं.
सोनिया ने चिट्ठी में क्या कहा?
सोनिया गांधी ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि 39 दिनों से संघर्ष कर रहे अन्नदाताओं की हालत देख कर देशवासियों के साथ मेरा मन भी बहुत व्यथित है. उन्होंने लिखा,
"आंदोलन को लेकर सरकार की बेरुखी के चलते अब तक 50 से अधिक किसान अपनी जान गवां चुके हैं. कुछ ने तो सरकार की उपेक्षा के चलते आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लिया. पर बेरहम सरकार का दिल नहीं पसीजा."
उन्होंने लिखा कि मोदी सरकार सत्ता के अहंकार को छोड़कर तत्काल बिना शर्त तीनों काले कानूनों को वापस ले और ठंड व बरसात में दम तोड़ रहे किसानों का आंदोलन खत्म कराए. यही राजधर्म है और किसानों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि भी.
https://twitter.com/INCIndia/status/1345661529283153922
राजस्थान कांग्रेस ने कृषि कानूनों के खिलाफ दिया धरना
नए कृषि कानूनों के खिलाफ राजस्थान कांग्रेस ने धरना दिया. इस दौरान सीएम अशोक गहलोत और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट एक साथ नजर आए. जयपुर के शहीद स्मारक पर कांग्रेस के विधायक और सरकार का समर्थन कर रहे निर्दलीय विधायक जुटे. गहलोत ने कहा कि कांग्रेस के विधायक और मंत्री अपने इलाकों में इन कानूनों के बारे में किसानों को जानकारी देंगे. गहलोत और सचिन पायलट के एक साथ एक मंच पर नजर आने से कांग्रेस कार्यकर्ता भी उत्साहित दिखे.
https://twitter.com/ashokgehlot51/status/1345671419959472131
किसानों का अर्धनग्न प्रदर्शन
इस बीच किसानों ने दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर बिना शर्ट के प्रदर्शन किया. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया और कहा कि टिकरी बार्डर पर लगभग शून्य डिग्री तापमान, मूसलाधार बारिश व शीतलहर के बीच किसानों ने मजबूर होकर अर्धनग्न प्रदर्शन किया. उन्होंने लिखा कि सत्ता में बैठे लोगों को कब शर्म आएगी, जो किसानों के इस आन्दोलन को अब भी 'इवेंट' बताकर निरंकुशता की सीमाएं लांघ चुके हैं.
https://twitter.com/rssurjewala/status/1345694164638425090
 
अभी तक 54 किसानों की मौत
आंदोलन के दौरान अब तक 54 किसानों की मौत हो चुकी है. इनमें से कुछ लोगों की मौत ठंड, बीमारी और हार्ट अटैक आदि के कारण हुई है वहीं कुछ लोगों ने सुसाइड कर लिया. रविवार को 4 किसानों की मौत की खबर सामने आई. किसानों के संगठन मृतकों के परिवारों को मुआवजे की मांग कर रहे हैं. 26 नवंबर से किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं. इस दौरान लगातार पड़ रही ठंड, बारिश ने भी किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हुई हैं.
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दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. फोटो- PTI

4 जनवरी को होनी है वार्ता
4 जनवरी को सरकार और किसानों के बीच बातचीत होनी है. किसान तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं, वहीं सरकार भी इन कानूनों को वापस लेने के लिए तैयार नहीं है. राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल लगातार किसानों के संपर्क में हैं. किसान संयुक्त मोर्चा ने कहा है कि अगर सरकार ने शर्तों को नहीं माना तो 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर किसान दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे.

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