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वोट तो उसी को मिलेगा जो चूहे मारेगा

गोसाबा में चूहों का आतंक है, किसान बोले पॉलिटिक्स हटाओ, चुनाव होता रहेगा पहले चूहों का कुछ करो.

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फोटो - thelallantop
पश्चिम बंगाल के गोसाबा में विधानसभा चुनाव बस होना ही है. किसानों ने तय कर लिया है कि वे किस पार्टी को वोट देंगे. इन्होंने उम्मीदवार को वोट देने का जो क्राइटेरिया चुना है वो बहुत यूनिक है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि जो इन्हें चूहों से निजात दिलाएगा उसे अपना वोट देंगे. गोसाबा के किसानों की नाक में दम कर रखा है चूहों ने. अपना पेट भरने के लिए किसान मेहनत कर-कर फसल उगाते हैं और चूहे उन्हें सफाचट कर रहे हैं. वो धान से लेकर आलू खा रहे हैं और बर्बाद भी कर रहे हैं. किसान के खाने को लाले पड़े हैं. वो  हर तरह का उपाय कर थक चुके हैं. पर चूहे हैं कि उनके खेतों से जाने का नाम नहीं ले रहे. इसलिए किसानों ने उस उम्मीदवार को वोट देने का फैसला किया है जो उनकी इस परेशानी का हल निकालेगा. बात में दम है भई.

पहले नहीं आते थे इतने चूहे 

यहां पहले चूहों से दिक्कत नहीं थी किसानों को. खेतों में सांप होते थे. और वो पेट भरने के लिए चूहों को खा जाते थे. इस तरह किसानों की फसल बच जाती थी. यहां के लोग कहते हैं कि 2009 में आइला चक्रवात आया था. जिसमें बहुत सांप मारे गए. उनके मरने के बाद चूहों की आबादी बढ़ी और फिर किसानों की परेशानी.

क्या कहते हैं किसान 

गांव के किसान संजय साहा का कहना है कि पिछले साल चूहों ने उनके 200 किलो आलू और 120 किलो धान खा गए थे. जिला प्रशासन से मदद मांगी पर कोई सुनवाई नहीं हुई. मैं और मेरा परिवार उसी को वोट देंगे जो चूहों से हमें निजात दिलाएगा. एक और किसान राधाकांत संतारा कहते हैं कि मैंने दो बीघे में धान की फसल लगाई थी. पर चूहों ने ज्यादातर फसलों को खराब कर दिया. उम्मीदवार जब वोट के लिए आएंगे तो सवाल एक ही होगा, चूहों से राहत दिलाओगे.

वो कहानी याद है?

एक बार जर्मनी के हेमलिन में भी ऐसे ही चूहों ने आतंक मचा रखा था. किसानों की सारी फसलों को खा गए थे. फिर एक बांसुरी बजाने वाला आया. और उसने चूहों को खेत से भगा दिया. कैसे पता है. बांसुरी बजा कर. एख ऐसी धुन बजाई जिससे चूहों ने वहां के किसानों को टाटा बाय-बाय कर दिया. लगता है गोसाबा के किसानों को भी एक ऐसा ही बांसुरी बजाने वाला चाहिए जो उनके फसलों को चूहों  से बचा सके.

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